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Adani: 'जीत का अहंकार नहीं, मन में है विनम्रता', अमेरिका में आपराधिक केस खारिज होने के बाद बोले गौतम अदाणी

Wed, 12 Aug 2026 07:51 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 12 Aug 2026 07:51 PM IST
सार

अमेरिकी कोर्ट से सभी क्रिमिनल चार्ज खारिज होने के बाद गौतम अदाणी ने अपनी टीम को संबोधित किया। अपनी बात, अपनों के साथ कार्यक्रम में उन्होंने हिंडनबर्ग विवाद, 20,000 करोड़ रुपये का एफपीओ रद्द करने और देश के भविष्य को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने क्या-क्या कहा जानिए।

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'Trust is Greater Than Any Legal Right', Gautam Adani Addresses Employees
गौतम अदाणी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अमेरिका में आपराधिक मामला खत्म होने पर प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी कोर्ट की ओर से उनके और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ सभी आपराधिक मामलों को खारिज किए जाने के बाद, अदाणी ने कहा है कि इस फैसले ने उनके मन में जीत के अहंकार की जगह गहरी विनम्रता का भाव छोड़ा है। बुधवार को समूह के विशेष कार्यक्रम 'अपनी बात, अपनों के साथ' के दूसरे संस्करण में कर्मचारियों और सहयोगियों को संबोधित करते हुए उन्होंने पूरे विवाद और भविष्य के विजन पर खुलकर बात की।

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अमेरिकी कोर्ट से केस खारिज होने पर गौतम अदाणी ने अपनी टीम से क्या कहा?

न्यूयॉर्क के फेडरल जज की ओर से क्रिमिनल केस को पूरी तरह समाप्त करने के बाद, गौतम अदाणी ने अपनी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जब आम जनता और मीडिया का ध्यान पूरी तरह से इस अदालती लड़ाई पर टिका हुआ था, तब उनके कर्मचारियों, सप्लायर्स, वेंडर्स और पार्टनर्स ने बिना शोर मचाए चुपचाप अपना काम जारी रखा और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा किया। अदाणी के मुताबिक, सहयोगियों के इसी अटूट भरोसे और समर्पण की वजह से समूह का यह सबसे चुनौतीपूर्ण दौर कंपनी के इतिहास के सबसे मजबूत विकास के दौर में बदल गया।

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मुसीबत के समय के समय अदाणी समूह का अनुभव कैसा रहा?

गौतम अदाणी ने स्वीकार किया कि साल 2023 में आए हिंडनबर्ग के आरोपों और उसके बाद नवंबर 2024 में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से लगाए गए कथित रिश्वतखोरी के आरोपों ने पूरे समूह की कड़ी परीक्षा ली थी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कानून के शासन के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय ने उन्हें सिखाया है कि असली और स्थायी विश्वास मुश्किल समय में अपने मूल्यों पर टिके रहने, सही काम करने और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने से ही हासिल होता है।

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अदाणी ने साल 2023 के एफपीओ को वापस लेने के फैसले को क्यों याद किया?

संबोधन के दौरान उन्होंने साल 2023 के उस बड़े फैसले को याद किया जब हिंडनबर्ग के आरोपों के तुरंत बाद उन्होंने पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुके ₹20,000 करोड़ के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को वापस ले लिया था। इस फैसले पर बात करते हुए उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही कि भरोसा किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा होता है। उनका मानना है कि कानून हमें अधिकार जरूर देता है, लेकिन हमारे मूल्य यह तय करते हैं कि उन अधिकारों का उपयोग कब और कैसे किया जाना चाहिए। 

समुद्र मंथन और बिना तराशे हीरे के उदाहरण से अदाणी ने क्या समझाया?

अपने जीवन के संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने हिंदू पौराणिक कथा समुद्र मंथन का उदाहरण दिया और कहा कि कठिन समय कभी चरित्र का निर्माण नहीं करता, बल्कि वह उसे दुनिया के सामने उजागर करता है। उन्होंने चरित्र की तुलना एक बिना तराशे हुए हीरे से की, जिसकी असली चमक और भव्यता केवल कठिन परिस्थितियों, दृढ़ता और कड़े अनुभवों से गुजरने के बाद ही बाहर निकल कर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर आलोचना को संगठन के भीतर सुधार और आत्ममंथन के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।

80वें स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले अदाणी ने देश के विकास पर क्या विजन रखा?

देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों के बीच, गौतम अदाणी ने कानूनी लड़ाइयों को पीछे छोड़ते हुए अपनी टीम का ध्यान देश के विकास की ओर खींचा। उन्होंने अदाणी परिवार के तीन लाख से अधिक कर्मचारियों और साझेदारों से एक गंभीर सवाल पूछने की अपील की और कहा कि हमारी पीढ़ी को किस काम के लिए याद किया जाएगा?।



उन्होंने गुजरात के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क के काम और वहां काम कर रहे एक युवा इंजीनियर अमित कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि असली विकास को केवल सीमेंट और कंक्रीट के बड़े बुनियादी ढांचे से नहीं मापा जाना चाहिए। विकास का असली पैमाना यह होना चाहिए कि वह कितनी आशाएं जगाता है, लोगों को कितना सम्मान वापस दिलाता है और कितनी जिंदगियों को बदलता है।

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