GDP: 'विकसित भारत के लिए 7-8 फीसदी की वृद्धि दर जरूरी'; EAC-PM अध्यक्ष ने निजी निवेश और निर्यात पर दिया जोर
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष महेंद्र देव ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए 7-8 फीसदी आर्थिक वृद्धि दर जरूरी है। उन्होंने निजी निवेश, निर्यात वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत नीति पर जोर दिया। कृषि क्षेत्र में बदलाव और आर्थिक संकेतकों पर भी बात की।
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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष महेंद्र देव ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के लिए 7 से 8 फीसदी की निरंतर आर्थिक वृद्धि दर चाहिए। यह लक्ष्य निजी क्षेत्र के निवेश और मजबूत निर्यात वृद्धि पर बहुत अधिक निर्भर करता है। देव ने 23 जून को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए यह बात कही।
देव ने जोर दिया कि विकसित भारत के लिए निवेश आवश्यक है। निजी क्षेत्र का निवेश और निर्यात वृद्धि दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। घरेलू बाजार को वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पाद गुणवत्ता बढ़ानी होगी। आत्मनिर्भर भारत नीति का अर्थ वैश्विक व्यापार से पीछे हटना नहीं है।
इसका ध्यान देश की जनसांख्यिकीय और तकनीकी क्षमताओं का लाभ उठाने पर है। सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 100 वस्तुओं की पहचान की है। इन वस्तुओं का घरेलू विनिर्माण विदेशी सामान का स्थान ले सकता है। व्यापार सुगमता और जीवन सुगमता में सुधार के प्रयास भी जारी हैं। ये सभी प्रयास अर्थव्यवस्था को बाहरी कमजोरियों से बचाने की व्यापक योजना का हिस्सा हैं।
आत्मनिर्भर भारत का क्या अर्थ है?
महेंद्र देव ने साफ किया कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब आयात प्रतिस्थापन नहीं है। इसका उद्देश्य घरेलू प्रतिस्पर्धा को बढ़ाना है। इससे उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद अधिक निर्यात करने में मदद करेंगे। भारत के पास जनसांख्यिकीय लाभ और प्रौद्योगिकी सुधार कौशल हैं। ये सभी कारक 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे।
कृषि क्षेत्र में क्या बदलाव आ रहे हैं?
कृषि क्षेत्र में पारंपरिक रासायनिक इनपुट से दूर जाना एक प्रमुख नीतिगत फोकस है। सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती जैसी वैकल्पिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना चाहती है। इसका उद्देश्य उर्वरक सब्सिडी के कुल उपभोग और राजकोषीय बोझ को कम करना है।
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में हालिया बदलावों से कुछ राजकोषीय राहत मिली है। अंतरराष्ट्रीय यूरिया की कीमतें 900 डॉलर से घटकर 450 डॉलर हो गई हैं। इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा।
आर्थिक संकेतक क्या कहते हैं?
देव ने वर्तमान खाद्य भंडार पर विश्वास व्यक्त किया। भारत के पास दालों का पर्याप्त भंडार है। यह घरेलू खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ने से रोकेगा।
हालांकि, बाहरी कारक अभी भी आर्थिक दृष्टिकोण के लिए जोखिम पैदा करते हैं। पश्चिम एशिया युद्ध और अल नीनो के कारण चुनौतियां हैं। देव भारतीय रिजर्व बैंक के 6.6 फीसदी वृद्धि और 5.1 फीसदी मुद्रास्फीति के अनुमानों से सहमत हैं।