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कमजोर मानसून बड़ी चुनौती: देश पर सूखे का साया, 22 दिनों में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश; महंगाई बढ़ने का खतरा
बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 24 Jun 2026 04:15 AM IST
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सार
देश में मानसून के शुरुआती महीने में 43% कम बारिश हुई है, जिससे कई राज्यों में खेती और खरीफ फसलों पर खतरा बढ़ गया है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्यों में बारिश की भारी कमी से बुवाई और उत्पादन पर असर दिखने लगा है। पढ़िए रिपोर्ट-
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
दक्षिण-पश्चिम मानसून का पहला महीना खत्म होने में सिर्फ एक सप्ताह बचा है, लेकिन अब तक बीता यह सीजन देश के अन्नदाताओं और अर्थव्यवस्था के लिए सूखे जैसी बड़ी चुनौती लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, एक से 22 जून तक देशभर में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश हुई है। मानसून की स्थिति में अगर तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो देश के प्रमुख कृषि राज्यों में खरीफ की खेती पर तगड़ी मार पड़ सकती है। इससे न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में मांग प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य महंगाई का खतरा भी तेजी से बढ़ेगा।
दरअसल, देश में सबसे ज्यादा खरीफ उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में सामान्य से 82 फीसदी और गुजरात में 75 फीसदी कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में 69 फीसदी और मध्य प्रदेश में 52 फीसदी कम बरसात दर्ज की गई है। वहीं, झारखंड में सामान्य से 66 फीसदी, ओडिशा में 48 फीसदी और बिहार, उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में 43-43 फीसदी कम पानी बरसा है। दक्षिण भारत के कर्नाटक में 40 फीसदी और केरल में 28 फीसदी कम बारिश हुई है।
खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा असर : शिवराज
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मानसून ऐसे ही कमजोर रह सकता है। इसका असर खरीफ फसलों और संवेदनशील इलाकों पर पड़ेगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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देश में अब तक कुल खरीफ क्षेत्र का करीब 10 फीसदी हिस्सा ही बोया गया है। 22 जून तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1.17 करोड़ हेक्टेयर रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि (1.13 करोड़ हेक्टेयर) से थोड़ा अधिक है, लेकिन पानी की कमी से आगे की बुवाई और बोई जा चुकी फसलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश
सरकार ने 111 जिलों को अति-संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया है। यानी इन जिलों में कमजोर मानसून की सबसे अधिक माग पड़ेगी, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 फीसदी से भी कम है और वे बारिश पर ही निर्भर हैं। इनमें अकेले 20 जिले सिर्फ महाराष्ट्र में हैं।
आरबीआई की बड़ी चेतावनी
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 फीसदी से कम है। कमजोर मानसून वृद्धि दर को और नीचे खींच सकता है।
ये भी पढ़ें: यूपीआई और आधार आधरित बैंकिंग से ग्रामीण क्षेत्रों के खुदरा दुकानों पर 61% बढ़ा लेनदेन, जानिए इस बारे में
केंद्रीय बैंक ने इस साल के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। लेकिन, खाद्य पदार्थों की कीमतों में व्यापक स्तर पर होने वाली बढ़ोतरी जून में भी जारी है। अगर खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आई, तो दाल, चावल और सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
सरकार ने शुरू की आपात तैयारी
कृषि मंत्री ने कहा, कमजोर मानसून और खेती पर मंडराते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अग्रिम और आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। संवेदनशील और कम सिंचाई वाले 111 जिलों के लिए विशेष जल प्रबंधन, कम पानी में पकने वाले वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता एवं बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम किया जा रहा है। चौहान ने कहा, हम खेत खाली नहीं रहने देंगे। जितनी बारिश होगी, उसी हिसाब से कोई न कोई फसल हो, केंद्र सरकार की तैयारी उसी हिसाब से है।
दरअसल, देश में सबसे ज्यादा खरीफ उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में सामान्य से 82 फीसदी और गुजरात में 75 फीसदी कम बारिश हुई है। छत्तीसगढ़ में 69 फीसदी और मध्य प्रदेश में 52 फीसदी कम बरसात दर्ज की गई है। वहीं, झारखंड में सामान्य से 66 फीसदी, ओडिशा में 48 फीसदी और बिहार, उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में 43-43 फीसदी कम पानी बरसा है। दक्षिण भारत के कर्नाटक में 40 फीसदी और केरल में 28 फीसदी कम बारिश हुई है।
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खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा असर : शिवराज
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मानसून ऐसे ही कमजोर रह सकता है। इसका असर खरीफ फसलों और संवेदनशील इलाकों पर पड़ेगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
देश में अब तक कुल खरीफ क्षेत्र का करीब 10 फीसदी हिस्सा ही बोया गया है। 22 जून तक खरीफ फसलों का कुल रकबा 1.17 करोड़ हेक्टेयर रहा। हालांकि, यह पिछले वर्ष की समान अवधि (1.13 करोड़ हेक्टेयर) से थोड़ा अधिक है, लेकिन पानी की कमी से आगे की बुवाई और बोई जा चुकी फसलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।
देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश
सरकार ने 111 जिलों को अति-संवेदनशील के रूप में चिन्हित किया है। यानी इन जिलों में कमजोर मानसून की सबसे अधिक माग पड़ेगी, क्योंकि वहां सिंचाई की सुविधा 25 फीसदी से भी कम है और वे बारिश पर ही निर्भर हैं। इनमें अकेले 20 जिले सिर्फ महाराष्ट्र में हैं।
आरबीआई की बड़ी चेतावनी
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.7 फीसदी से कम है। कमजोर मानसून वृद्धि दर को और नीचे खींच सकता है।
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केंद्रीय बैंक ने इस साल के लिए खुदरा महंगाई दर 5.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। लेकिन, खाद्य पदार्थों की कीमतों में व्यापक स्तर पर होने वाली बढ़ोतरी जून में भी जारी है। अगर खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट आई, तो दाल, चावल और सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
सरकार ने शुरू की आपात तैयारी
कृषि मंत्री ने कहा, कमजोर मानसून और खेती पर मंडराते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अग्रिम और आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी हैं। संवेदनशील और कम सिंचाई वाले 111 जिलों के लिए विशेष जल प्रबंधन, कम पानी में पकने वाले वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता एवं बिजली-पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने पर काम किया जा रहा है। चौहान ने कहा, हम खेत खाली नहीं रहने देंगे। जितनी बारिश होगी, उसी हिसाब से कोई न कोई फसल हो, केंद्र सरकार की तैयारी उसी हिसाब से है।