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Amar Ujala Samwad: रिन्यूएबल एनर्जी से कैसे बदलेगी अर्थव्यवस्था की तस्वीर? विशेषज्ञों ने साझा किया मास्टरप्लान

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 24 Jun 2026 11:31 AM IST
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सार

अमर उजाला संवाद के 'सतत विकास की नई राह' सत्र में राज्य की ऊर्जा नीतियों और रिन्यूएबल इकॉनमी पर होगी अहम चर्चा हुई। पूरी रिपोर्ट पढ़ें और भविष्य के विकास मॉडल को समझें।

Amar Ujala Samvad: Future of Green Energy and Sustainable Development in Uttarakhand in Focus
Amar Ujala Samwad - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

अमर उजाला संवाद के 'सतत विकास की नई राह' सत्र में ऊर्जा क्षेत्र के दिग्गजों और नीति निर्माताओं ने उत्तराखंड में नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) की संभावनाओं और चुनौतियों पर गहन मंथन किया। राज्य में जमीन की कमी, बैटरी स्टोरेज की लागत और औद्योगिक बिजली की बढ़ती दरों जैसे अहम मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी। सत्र के दौरान अतिथियों द्वारा रखे गए विचारों के प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:

'डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी' और 'एनर्जी मिक्स' पर सरकार का जोर: आर. मीनाक्षी सुंदरम

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उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य ने सोलर एनर्जी पॉलिसी के तहत 1000 मेगावाट का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात और राजस्थान की तरह उत्तराखंड में बंजर जमीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए सरकार का मुख्य फोकस 'डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर एनर्जी' पर है, जिसके लिए पुरानी गाइडलाइंस को आसान बनाकर फिर से लॉन्च किया गया है। पीक डिमांड के समय सौर ऊर्जा का उपलब्ध न होना और महंगी बैटरी स्टोरेज एक बड़ी चुनौती है, जिसका समाधान खोजने के लिए रिसर्च जारी है। मीनाक्षी सुंदरम ने 2070 के 'नेट-जीरो' लक्ष्य के लिए सोलर एनर्जी को बेहद अहम बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रो पावर और कार्बन क्रेडिट राज्य के लिए कमाई का नया जरिया बन सकते हैं और बेस व पीक लोड को संतुलित करने के लिए 'एनर्जी मिक्स' की सख्त जरूरत है।

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बड़े प्रोजेक्ट्स की जगह 'स्मॉल हाइड्रो स्कीम' से मिलेगी रफ्तार: संजय शर्मा

सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के निदेशक संजय शर्मा ने राज्य में जलविद्युत (हाइड्रो पावर) की अपार संभावनाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बड़े प्रोजेक्ट्स लगाने के बजाय सरकार ने 'स्मॉल हाइड्रो स्कीम' लॉन्च की है, जिसके तहत नदियों के बहाव (रन ऑफ द रिवर) पर आधारित छोटी परियोजनाएं विकसित की जा सकती हैं। एसईसीआई की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सीमित मानव संसाधन के बावजूद यह पीएसयू पिछले 10-14 वर्षों में 50-60 गुना बढ़कर 36-37 हजार (मेगावाट) ऊर्जा जनरेट कर रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सराहा गया है। संजय शर्मा ने सुझाव दिया कि हम ब्राजील के नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों से सीख लेकर बड़े शहरों की नगर पालिकाओं का आर्थिक बोझ कम कर सकते हैं।

जमीन की कमी के कारण राजस्थान से सोलर पावर खरीदने का सुझाव: कार्तिकेय एन शर्मा

सनश्योर एनर्जी के संस्थापक कार्तिकेय एन शर्मा ने उत्तराखंड को एक 'पावर सरप्लस' राज्य बताते हुए यहां ऊर्जा उत्पादन की बड़ी संभावनाओं का जिक्र किया। राज्य में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर पर फोकस को उन्होंने एक बेहतरीन कदम बताया, लेकिन भौगोलिक सीमाओं के कारण सुझाव दिया कि जमीन की कमी से निपटने के लिए उत्तराखंड को राजस्थान से सोलर पावर खरीदनी चाहिए। औद्योगिक बिजली की बढ़ती दरों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पांच साल पहले जो पावर सबसे सस्ती थी, वह अब 9 रुपये प्रति यूनिट के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। उन्होंने कोयले पर निर्भरता कम करने वाली नीतियों की वकालत करते हुए बताया कि बैटरी स्टोरेज अब घरों में भी संभव है और उनकी कंपनी शाम के समय भी किफायती दरों (6.65) पर बिजली उपलब्ध करा रही है।

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