Gautam Adani: अदाणी समूह का बड़ा दांव, गौतम अदाणी बोले- 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
अदाणी समूह ने 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की घोषणा की है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और समूह को एकीकृत बिजली मंच में विस्तार देगा।
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ऊर्जा क्षेत्र में अपना दबदबा और मजबूत करते हुए अदाणी समूह ने न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) सेक्टर में कदम रखने का बड़ा ऐलान किया है। बुधवार को कंपनी की एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) में चेयरमैन गौतम अदाणी ने बताया कि समूह 2035 तक 10 गीगावाट (जीडब्ल्यू) न्यूक्लियर पावर क्षमता विकसित करेगा। इस कदम से समूह अब थर्मल, रिन्यूएबल, हाइड्रो और गैस के बाद परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराएगा
अदाणी ने शेयरधारकों को संबोधित करते हुए बताया कि परमाणु ऊर्जा उद्यम, अदाणी एटॉमिक एनर्जी के लिए भूमि की पहचान कर ली गई है। यह बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बिजली की बढ़ती मांग के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। समूह का लक्ष्य स्वच्छ और चौबीसों घंटे बिजली की बढ़ती राष्ट्रीय मांग को पूरा करना है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब समूह ऊर्जा मूल्य शृंखला में निवेश बढ़ा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा अब राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में उभरी है। अरबपति उद्योगपति ने कहा कि समूह का एकीकृत बुनियादी ढांचा मॉडल विश्वसनीय और सस्ती बिजली प्रदान करने के लिए बनाया गया है। यह बाहरी निर्भरता को कम करके भारत की ऊर्जा लचीलापन को मजबूत करेगा। समूह खनन और ईंधन आपूर्ति से लेकर बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण तक निवेश बढ़ा रहा है।
समूह ऊर्जा क्षेत्र में कैसे विस्तार कर रहा है?
अदाणी पावर भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय कार्यक्रम चला रही है। इसमें दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है। इसका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में 45 गीगावाट उत्पादन क्षमता तक पहुंचना है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का पारेषण आदेश पुस्तिका 72,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसमें खावड़ा-दक्षिण ओलपाड उच्च-वोल्टेज प्रत्यक्ष धारा पारेषण लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। कंपनी भारत की एकमात्र निजी क्षेत्र की खिलाड़ी है जिसके पास सिद्ध उच्च-वोल्टेज प्रत्यक्ष धारा क्षमताएं हैं। समूह कम कार्बन ऊर्जा में भी अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है। भूटान के ड्रक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन के साथ 5,000 मेगावाट जलविद्युत परियोजनाओं के विकास का समझौता हुआ है। अदाणी टोटल गैस ने वर्ष के दौरान 11 लाख पाइप प्राकृतिक गैस घरेलू कनेक्शन का आंकड़ा पार किया है।
अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में क्या प्रगति हुई है?
अदाणी पोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2026 में 50 करोड़ टन से अधिक माल संभाला। इसका लक्ष्य 2030 तक 1 अरब टन तक पहुंचना है। विझिंजम बंदरगाह ने अपने पहले वर्ष के संचालन में 10 लाख कंटेनर पार किए। समूह ने नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और गुवाहाटी हवाई अड्डे पर एक नए टर्मिनल का भी उद्घाटन किया। इसके डेटा केंद्र कारोबार का लक्ष्य 2030 तक 3 गीगावाट मंच स्थापित करना है। विशाखापत्तनम में गूगल के साथ गीगावाट-स्केल डेटा केंद्र परियोजना के लिए एक बाध्यकारी समझौता हुआ है। खनन सेवाओं के कारोबार में चार नए खनन विकासक और संचालक समझौतों से क्षमता बढ़कर 14.5 करोड़ टन सालाना हो गई है।
समूह का वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
वित्त वर्ष 2026 के लिए अदाणी समूह का समेकित राजस्व 2.92 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछले वर्ष से 7.4 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। परिचालन लाभ 94,834 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। कर पश्चात लाभ 13.9 फीसदी बढ़कर 46,376 करोड़ रुपये हो गया। अदाणी ने कहा कि ये रिकॉर्ड आंकड़े महत्वाकांक्षी पूंजीगत व्यय योजनाओं को वित्तपोषित करने की वित्तीय ताकत, तरलता और आत्मविश्वास देते हैं। समूह भारत के मुख्य बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में अभूतपूर्व पैमाने पर निर्माण जारी रखेगा। अध्यक्ष ने कहा कि समूह अनिश्चितता के दौर में भी निवेश जारी रखेगा।
बुनियादी ढांचे और एआई पर अदाणी समूह का क्या नजरिया?
अदाणी ग्रुप ने 'भौतिक बुनियादी ढांचे' और 'इंटेलिजेंस (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व डिजिटल तकनीक)' को भारत के आर्थिक विकास और वैश्विक महाशक्ति बनने के दो प्रमुख स्तंभों के रूप में प्रस्तुत किया है। इसी रणनीतिक विजन और भारी दबाव व स्क्रूटनी के बावजूद, समूह ने वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल नए निजी पूंजीगत व्यय का 30 फीसदी हिस्सा (1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक) इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया, जिससे कंपनी का समेकित राजस्व 7.4 प्रतिशत बढ़कर 2.92 लाख करोड़ रुपये हो गया।
इस महात्वाकांक्षी विस्तार के तहत जहां पावर सेक्टर में 45 गीगावाट का लक्ष्य रखा गया है, वहीं 'अदाणी एटॉमिक एनर्जी' के जरिए 2035 तक 10 गीगावाट स्वच्छ परमाणु ऊर्जा उत्पादन की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ अदाणी पोर्ट्स (विझिंजम में एक मिलियन टीईयू का रिकॉर्ड), नए हवाई अड्डों का संचालन, गूगल के साथ गीगावाट-स्केल डेटा सेंटर का निर्माण और रक्षा व एयरोस्पेस विनिर्माण जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि कंपनी भौतिक संपत्तियों और डिजिटल तकनीकों के एकीकरण से देश की रणनीतिक आत्मनिर्भरता व व्यापारिक क्षमता को आक्रामक रूप से मजबूत कर रही है।