कच्चे तेल में भारी उछाल: ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा, 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, ब्रेंट क्रूड $120 के पार। अमेरिका-ईरान तनाव, ओपेक से यूएई के बाहर होने और भारतीय कॉरपोरेट्स पर इसके प्रभाव की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर भारी तेजी दर्ज की गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष में गतिरोध और ईरानी बंदरगाहों व निर्यात पर अमेरिका की लंबी नाकेबंदी की चिंताओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से यह भारी उछाल आया है।
अमेरिका-ईरान विवाद और गहराता भू-राजनीतिक संकट
इस ऊर्जा संकट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक प्रमुख कारण है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश की गई थी; ट्रंप का स्पष्ट कहना है कि जब तक कोई व्यापक परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक रोक जारी रहेगी। नाकेबंदी के संभावित प्रभावों को कम करने के लिए ट्रंप ने तेल कंपनियों के साथ बैठक भी की है।
इसके साथ ही, ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उसे "जल्द समझदारी दिखानी चाहिए"। इस पोस्ट में एक एआई-जनरेटेड तस्वीर भी साझा की गई, जिसमें ट्रंप को बंदूक पकड़े हुए दिखाया गया है और पीछे विस्फोट हो रहे हैं, साथ ही "नो मोर मिस्टर नाइस गाय!" का संदेश लिखा गया है। विश्लेषकों ने इस स्थिति को दुनिया के अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा व्यवधान के रूप में वर्णित किया है, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है।
बाजार के आंकड़े: लगातार बढ़ रही हैं कीमतें
कच्चे तेल के वायदा बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- जून अनुबंध के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 1.91 डॉलर (1.62 प्रतिशत) बढ़कर 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो लगातार नौवें दिन बढ़त की राह पर है।
- जुलाई का अधिक सक्रिय अनुबंध 0.85 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 111.38 डॉलर पर कारोबार कर रहा है।
- अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.59 प्रतिशत चढ़कर 107.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया है; डब्ल्यूटीआई पिछले नौ सत्रों में आठवीं बार चढ़ा है।
लगातार बढ़ते इन तेल दामों का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है, जहां कंपनियों के मुनाफे और कॉरपोरेट मार्जिन पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
आपूर्ति संकट और यूएई का ओपेक से किनारा
आपूर्ति के मोर्चे पर स्थिति और जटिल होती जा रही है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद से तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते अपने जहाजों को छोड़कर बाकी सभी शिपिंग को रोक दिया है। इसके जवाब में अमेरिका ने भी इसी महीने से ईरानी जहाजों की नाकेबंदी शुरू कर दी है।
इस बीच, एक बड़ा रणनीतिक बदलाव यह हुआ है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) 1 मई से ओपेक (OPEC) और ओपेक+ (OPEC+) गठबंधन से बाहर निकल रहा है। इस कदम से कीमतों को नियंत्रित करने की ओपेक की क्षमता कमजोर होने की आशंका है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार रविवार को होने वाली बैठक में ओपेक+ देश तेल उत्पादन कोटा में लगभग 1,88,000 बैरल प्रतिदिन की मामूली वृद्धि पर सहमति जता सकते हैं।
आगे का आउटलुक
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि ईरान संघर्ष या होर्मुज़ जलडमरूमध्य के जल्द खुलने की संभावनाएं बेहद कम हैं। यदि अमेरिका की नाकेबंदी इसी तरह जारी रहती है, तो सीमित भंडारण क्षमता और प्रतिबंधित ईरानी निर्यात के कारण वैश्विक स्तर पर आपूर्ति संकट और अधिक गहरा सकता है, जिससे आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
