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NABARD: ग्रामीण क्षेत्र की मंदी पर नाबार्ड का प्रहार, जानें कैसे दो साल में तैयार किए जाएंगे 4000 नए उद्यमी

Mon, 17 Aug 2026 06:09 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Mon, 17 Aug 2026 06:09 PM IST
सार

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मंदी के बीच नाबार्ड ने शुरू की बड़ी पहल। जानिए कैसे 'ग्राम उद्यम' योजना के जरिए गांव-गांव में खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते और कैसे आप भी ले सकते हैं इसका फायदा। पूरी रिपोर्ट अभी पढ़ें।

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NABARD's 'Gram Udyam' Push: A Blueprint to Revive Rural Economy and Create 4,000 Entrepreneurs
नाबार्ड के सीजीएम - फोटो : IANS

विस्तार

देश के ग्रामीण इलाकों में गहराते वित्तीय संकट और कमाई की सुस्त रफ्तार के बीच राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने ग्रामीण भारत की आर्थिक तस्वीर बदलने के लिए कमर कस ली है। हालिया सर्वे में सामने आया है कि ग्रामीण आय की वृद्धि दर सबसे धीमी हो चुकी है और परिवारों की अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता रिकॉर्ड स्तर पर है। इस संकट से निपटने के लिए नाबार्ड ने जुलाई 2026 से 'ग्राम उद्यम' पोर्टल की शुरुआत की है, ताकि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर दिए जा सकें।

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ग्रामीण भारत में मंदी के बीच क्या है नाबार्ड का नया मास्टरप्लान?

नाबार्ड का मुख्य ध्यान गांवों में छोटे उद्यमों को सुदृढ़ बनाना और रोजगार के नए विकल्प तैयार करना है। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक बीआर प्रेमी अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि ग्रामीण उपभोग और मांग की गति बढ़ाने के लिए यह पहल की गई है। इस योजना के जरिए अगले दो वर्षों में शुरुआती रूप से 4,000 ग्रामीण उद्यमियों को तैयार करने का लक्ष्य है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर बढ़ाया जाएगा।

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'ग्राम उद्यम' पोर्टल क्या है और यह कैसे काम करेगा?

'ग्राम उद्यम' पोर्टल एक ऐसा डिजिटल मंच है जहां छोटे व सूक्ष्म व्यवसायी अपने केवाईसी (केवाईसी) दस्तावेजों के साथ आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं। इस योजना के काम करने का तरीका कुछ इस प्रकार है:

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  • पंजीकरण व चयन: इस पोर्टल पर डेढ़ लाख लोगों के पंजीकरण की योजना है। आवेदकों की केवाईसी और सिबिल (CIBIL) जांच के बाद 50,000 योग्य लोगों का अंतिम चयन किया जाएगा।
  • प्रशिक्षण: चयनित लाभार्थियों को लगभग 50 अलग-अलग प्रकार के उद्योगों में उद्यमी बनने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • व्यावहारिक समझ: प्रशिक्षण के साथ ही उन्हें जीएसटी (जीएसटी), आयकर फाइलिंग, बैंक लोन प्रक्रिया और पंजीकरण जैसी व्यावहारिक जानकारियां भी दी जाएंगी।

इस मिशन के लिए फंडिंग और पार्टनरशिप का क्या गणित है?

इस पूरे प्रोजेक्ट को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए नाबार्ड ने राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एएसडीसी) के साथ साझेदारी की है। दोनों संस्थाएं मिलकर न केवल ट्रेनिंग देंगी बल्कि बिजनेस स्थापित करने के लिए लोन दिलाने में भी मदद करेंगी। फंडिंग का मॉडल इस प्रकार है:

  • नाबार्ड का हिस्सा: कुल फंडिंग आवश्यकता की 60 प्रतिशत राशि नाबार्ड द्वारा दी जाएगी।
  • एनएसडीसी का हिस्सा: शेष 40 प्रतिशत राशि की व्यवस्था एनएसडीसी करेगी।

क्या ग्राम पंचायतों को खुद कमाई करने वाला 'बिजनेस हब' बनाया जा सकता है?

इसके साथ ही, सरकार और नाबार्ड मिलकर पंचायती राज संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी काम कर रहे हैं। वर्तमान में ग्राम पंचायतें मुख्य रूप से सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती हैं। हालांकि, अब इन पंचायतों के लिए एक स्व-राजस्व मॉडल तैयार किया जा रहा है। इसके तहत मछली पालन, इको-फ्रेंडली टूरिज्म और पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देकर वहां के राजस्व को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, 'स्पेशल फार्मिंग जोन' योजना में भी नाबार्ड अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मंदी और ठहर चुके उपभोग को गति देने के लिए नाबार्ड की यह एकीकृत पहल मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह न केवल युवाओं को कौशल प्रदान करेगी बल्कि उन्हें सीधे बाजार और संस्थागत वित्तीय मदद से जोड़कर एक स्थायी आर्थिक विकास की नींव रखेगी।

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