Railway: माल ढुलाई से कमाई बढ़ाएगी रेलवे, बंदरगाह कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर खर्च करेगी 3300 करोड़ रुपये
- पारादीप के लिए बिछेगी 98 किमी रेल लाइन, माल ढुलाई का घटेगा समय
- कटक और हरिदासपुर मार्ग पर भी बढ़ाई जा रही क्षमता
- रेलवे ने 'मिशन 3000' के तहत 2030-31 तक 3000 मीट्रिक टन फ्रेट लोडिंग का रखा लक्ष्य
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विस्तार
भारतीय रेलवे यात्री सुविधाओं के साथ-साथ माल ढुलाई से अपनी कमाई और लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर नेटवर्क विस्तार में जुटा है। इसी रणनीति के तहत रेल मंत्रालय ने देश के दूसरे सबसे बड़े मालवाहक बंदरगाह, ओडिशा के पारादीप पोर्ट की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने का फैसला लिया है। इसके लिए दो अलग-अलग मार्गों पर कुल 98 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई जाएंगी, जिस पर करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
माल ढुलाई से 1.89 लाख करोड़ कमाने का लक्ष्य
भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए माल ढुलाई से 1.89 लाख करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में माल ढुलाई से कुल कमाई 1.78 लाख करोड़ रुपये से 5.8 फीसदी अधिक है।भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.67 अरब टन वार्षिक माल ढुलाई का आंकड़ा दर्ज किया। यह एक नया रिकॉर्ड है, जो उर्वरक, कच्चा लोहा और तैयार इस्पात के परिवहन में 13 फीसदी की बढ़ोतरी के कारण संभव हुआ। वित्त वर्ष 2026-27 में रेलवे द्वारा कुल माल ढुलाई 1.76 अरब टन रहने की उम्मीद है।
क्या है योजना?
वित्त वर्ष 2025-26 में पारादीप पोर्ट ने रिकॉर्ड 156.45 मिलियन टन माल का प्रबंधन किया था। यहां से कोयला, कच्चा लोहा और अन्य भारी जिंसों की तेज और निर्बाध ढुलाई के लिए रेलवे ने दो प्रमुख परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है।
- हरिदासपुर–पारादीप (53 किमी): मौजूदा समय में इस मार्ग पर सिंगल लाइन है, जिसे दोहरा किया जाएगा। लगभग 1,100 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की डीपीआर को रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है।
- कटक-पारादीप (45 किमी): यह मार्ग फिलहाल डबल लाइन है। यहां दबाव कम करने के लिए दो अतिरिक्त लाइनें (तीसरी और चौथी लाइन) बिछाई जाएंगी। लगभग 2,210 करोड़ रुपये की इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे भी मंजूरी मिल जाएगी।
2030-31 तक पूरा होगा काम
रेल मंत्रालय के अनुसार, परियोजनाओं में देरी रोकने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। जब कम से कम 90 फीसदी जमीन का अधिग्रहण पूरा हो जाएगा, तभी टेंडर जारी किया जाएगा। संभावना है कि अगले साल टेंडर जारी कर दिए जाएंगे और 4 साल के भीतर यानी 2030-31 तक दोनों मार्गों पर काम पूरा कर लिया जाएगा।
क्या है 'मिशन 3000'?
भारतीय रेलवे ने 2030-31 तक सालाना माल ढुलाई को 3,000 मीट्रिक टन तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिसे 'मिशन 3000' नाम दिया गया है। देश के प्रमुख बंदरगाहों से निकलने वाले भारी माल को सड़क मार्ग की बजाय रेल नेटवर्क पर शिफ्ट करने से लॉजिस्टिक्स लागत और समय दोनों में बड़ी बचत होगी।
बंदरगाहों और रेलवे का नेटवर्क
जहाजरानी एवं बंदरगाह मंत्रालय के अनुसार, देश में कुल 226 मान्यता प्राप्त बंदरगाह हैं, जिनमें से 69 बंदरगाह पूरी तरह कार्यरत हैं। वर्तमान में देश के 12 प्रमुख बंदरगाह सीधे रेल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं:
- पूर्वी तट: श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट (कोलकाता/हल्दिया), पारादीप (ओडिशा), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), कामराजर (एन्नोर), चेन्नई और वीओ चिदंबरनार (तूतीकोरिन - तमिलनाडु)।
- पश्चिमी तट: कोचीन (केरल), न्यू मैंगलोर (कर्नाटक), मुरमुगाओ (गोवा), मुंबई पोर्ट व जेएनपीए/न्हावा शेवा (महाराष्ट्र) और दीनदयाल पोर्ट (कांडला - गुजरात)।