IRCTC: मुनाफे की रफ्तार बढ़ाने के लिए चार नए रेल नीर संयंत्र लगाएगी आईआरसीटीसी, जानिए अध्यक्ष क्या बोले
- सप्लाई गैप को पाटने और नीर से कमाई बढ़ाने के लिए कंपनी ने बनाई आक्रामक रणनीति
- मौजूदा संयंत्रों की क्षमता विस्तार के साथ मैसूर, भागलपुर, रांची और प्रयागराज में लगाए जाएंगे नए रेल नीर प्लांट
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रेल यात्रियों की लाइफलाइन कही जाने वाली इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में राजस्व तो 18 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है, लेकिन शुद्ध लाभ लगभग स्थिर रहा।
आईआरसीटीसी का लाभ बढ़ाने के लिए कंपनी ने नई रणनीतियों पर काम शुरू किया है। आईआरसीटीसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राहुल हिमालियन का कहना है कि आईआरसीटीसी का बुनियादी कारोबार बेहद मजबूत है, लेकिन कम मार्जिन वाले कैटरिंग पर बढ़ती निर्भरता और रेल नीर का सप्लाई गैप इसके मुनाफे की रफ्तार को रोक रहा है।
मुनाफे की रफ्तार को बढ़ाने के लिए आईआरसीटीसी ने रेल नीर का उत्पादन बढ़ाने के साथ वंदे भारत स्लीपर के साथ कैटरिंग कारोबार बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हिमालयन ने भरोसा जताया कि नई रणनीति के तहत, आने वाली तिमाहियों में कंपनी का परिचालन लाभ एक बार फिर 30 फीसदी के ऊपर जाता दिखेगा। सोमवार को बीएसई पर आईआरसीटीसी का शेयर 0.60 फीसदी यानी 3 रुपये की मजबूती के साथ 500.45 रुपये पर बंद हुआ।
कैसा रहा पहली तिमाही का प्रदर्शन?
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 330.16 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभदर्ज किया, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 330.71 करोड़ रुपये से कम है। परिचालन से कंपनी का राजस्व 1,369.53 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 1,159.7 करोड़ रुपये से सालाना आधार पर 18.1 फीसदी अधिक है।
किस सेगमेंट से कितनी कमाई और मुनाफा हुआ
| सेगमेंट | वित्त वर्ष 2026-27 पही तिमाही राजस्व | सालाना बढ़त | मुनाफा मार्जिन का दायरा |
| कैटरिंग | 732.26 करोड़ | +33.9% | 10 से 12% (कम मार्जिन) |
| इंटरनेट टिकटिंग | 361.00 करोड़ | +0.6% | 80 से 85% (सबसे अधिक मार्जिन) |
| पर्यटन | 168.07 करोड़ | +13.8% | 14 से 15% |
| रेल नीर | 113.91 करोड़ | सपाट (-0.8%) | 10 से 14% |
क्यों घटा मुनाफा?
राहुल हिमालियन ने बताया कि, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मुनाफा घटने के पीछे कई बड़े कारण रहे। सबसे पहला कारण है, ग्रेच्युटी की सीमा 20 से 25 लाख रुपये होने और पोस्ट-रिटायरमेंट सेटलमेंट के लिए 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च बुक करना पड़ा। दूसरा कारण है, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) ट्रेनें अंतिम तिमाही में नहीं चल पाईं, जिससे 4.7 करोड़ रुपये का सीधा असर पड़ा। तीसरा कारण है, पश्चिम एशिया संकट के चलते रेल नीर की बोतलों के कैप में इस्तेमाल होने वाले पेट्रोलियम आधारित रेजिन की कीमतें 30 फीसदी तक बढ़ना। कच्चे माल की लागत 55 करोड़ से बढ़कर सीधे 61 करोड़ रुपये हो गई, जिसने अकेले रेल नीर के मुनाफे में 4 करोड़ रुपये की चपत लगाई। चौथा कारण है, कंपनी की कुल आय में कैटरिंग की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही, लेकिन इसमें मुनाफा मार्जिन केवल 10-12 फीसदी ही है।
क्या है अब नई योजना?
राहुल हिमालियन ने बताया कि सप्लाई गैप को पाटने और नॉन-फेयर व नीर से कमाई बढ़ाने के लिए कंपनी ने आक्रामक रणनीति बनाई है। इसके तहत मैसूर, भागलपुर, रांची और प्रयागराज में नए रेल नीर प्लांट लगाए जा रहे हैं। प्रयागराज और मैसूर में जमीन मिल चुकी है, रांची में जमीन आवंटन की पुष्टि हो गई है। इसके अलावा 250 किलोमीटर के दायरे को कवर करने के लिए वाराणसी और पुणे में भी नए प्लांट की संभावना तलाशी जा रही है।
इसके अलावा, चालू वित्त वर्ष में महाराष्ट्र के अंबरनाथ प्लांट की क्षमता 2 लाख से बढ़ाकर 3 लाख बोतल और दानापुर प्लांट की क्षमता 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख बोतल प्रतिदिन की जाएगी। हिमालियन के मुताबिक, भारत गौरव के नए रेक शामिल किए गए हैं और महाराजा एक्सप्रेस का रेक भी बेड़े में आएगा। साथ ही वंदे भारत स्लीपर की 15 से 20 नई रेक आने से कैटरिंग वॉल्यूम में तेज उछाल देखने को मिलेगा। इसके अलावा, क्लस्टर आधारित माइस (मीटिंग्स, इंसेंटिव, कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन) टूरिज्म को बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों में विज्ञापनों और ब्रांडिंग के जरिए नॉन-फेयर रेवेन्यू को रफ्तार दी जा रही है।