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टैक्स बचाने के लिए नहीं चलेगा कोई जुगाड़: समझिए क्या है पूरा गणित? इस साल लगभग 20000 संदिग्ध मामले आए सामने
Mon, 13 Jul 2026 04:36 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 13 Jul 2026 04:36 AM IST
सार
टैक्स प्लानिंग और टैक्स चोरी के बीच बड़ा फर्क होता है। कानूनी तौर पर हर टैक्स छूट और कटौती की अपनी शर्तें और दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिन्हें सिर्फ टैक्स बचाने के उद्देश्य से आपस में बदला नहीं जा सकता।
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टैक्स रिटर्न
- फोटो : ANI
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विस्तार
आईटी प्रोफेशनल सौभाग्य ने टैक्स बचाने के लिए अपनी अतिरिक्त एचआरए की रकम को अदर सोर्सेज की ऐसी धारा में डाल दिया, जहां टैक्स छूट मिलती है। सौभाग्य अपनी इस चालाकी पर बहुत खुश थे। लेकिन अब रातों की नींद उड़ी हुई है, क्योंकि आयकर विभाग ने चोरी पकड़ ली है।
आयकर विभाग के आधुनिक डाटा एनालिटिक्स सिस्टम ने सौभाग्य के उस जुगाड़ का पता लगा लिया, जिसमें टैक्स बचाने के लिए गलत नियमों की अदला-बदली की गई थी। टैक्स बचाने के लिए जुगाड़ का इस्तेमाल करने वाले सौभाग्य अकेले नहीं हैं। आयकर विभाग ने इस साल अब तक करीब 20,000 ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जहां करदाताओं ने अपनी टैक्स देनदारी कम करने के लिए स्वैप्ड प्रोविजन्स (गलत प्रावधानों की अदला-बदली) का सहारा लिया है।
क्या होते हैं स्वैप्ड प्रोविजन्स?
आयकर कानून की किताब में स्वैप्ड प्रोविजन्स जैसी कोई परिभाषा नहीं लिखी है, बल्कि यह विभाग द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक तकनीकी शब्द है। यह उन चालाकियों को दर्शाता है, जहां कोई करदाता टैक्स छूट का पात्र नहीं होता, लेकिन टैक्स का बोझ कम करने के लिए वह उस दावे को किसी दूसरी ऐसी धारा में ट्रांसफर कर देता है, जिसके लिए उसके पास न तो योग्यता होती है और न ही कोई दस्तावेजी सबूत।
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आसान भाषा में इसे ऐसे समझें
आज के दौर में आयकर विभाग पूरी तरह से तकनीक आधारित जोखिम मूल्यांकन पर काम कर रहा है। आपके द्वारा आईटीआर में भरी गई एक-एक जानकारी को विभाग आपके वार्षिक सूचना विवरण (AIS), टीडीएस स्टेटमेंट्स, फॉर्म 26एएस और बैंकों से मिलने वाली हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन (SFT) रिपोर्ट्स के साथ कंप्यूटर एल्गोरिदम के जरिये मिलान करता है।
आपके दावों और डिजिटल फुटप्रिंट में जरा-सा भी अंतर मिलता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देता है। ऐसी विसंगतियां सामने आने पर न केवल आपका दावा खारिज कर दिया जाता है, बल्कि भारी ब्याज के साथ टैक्स डिमांड और स्क्रूटनी की कार्यवाही भी शुरू हो सकती है।
गलती का एहसास होते ही उठाएं कदम
करदाताओं को जैसे ही यह एहसास हो कि उन्होंने ऐसी कोई गलती की है, तो सबसे पहले दाखिल किए गए रिटर्न की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें और सैलरी स्लिप, फॉर्म 16, एआईएस, फॉर्म 26एएस, निवेश के सबूत और बैंक स्टेटमेंट के साथ उसका अच्छे से मिलान करें।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अंकित गुप्ता बताते हें कि आयकर विभाग का यह कदम उन करदाताओं के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं। याद रखें, विभाग द्वारा कड़ा एक्शन लिए जाने से पहले खुद आगे बढ़कर की गई सुधार की कोशिश हमेशा करदाता को मजबूत और सुरक्षित स्थिति में रखती है। टैक्स बचाने के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई और साख को दांव पर न लगाएं। यदि आपके पास अब भी कानूनन समय सीमा बची है, तो अपनी गलती स्वीकार करते हुए तुरंत एक संशोधित रिटर्न दाखिल करें और सही विवरण दें।
करदाता के पास हैं ये विकल्प
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आयकर विभाग के आधुनिक डाटा एनालिटिक्स सिस्टम ने सौभाग्य के उस जुगाड़ का पता लगा लिया, जिसमें टैक्स बचाने के लिए गलत नियमों की अदला-बदली की गई थी। टैक्स बचाने के लिए जुगाड़ का इस्तेमाल करने वाले सौभाग्य अकेले नहीं हैं। आयकर विभाग ने इस साल अब तक करीब 20,000 ऐसे संदिग्ध मामलों की पहचान की है, जहां करदाताओं ने अपनी टैक्स देनदारी कम करने के लिए स्वैप्ड प्रोविजन्स (गलत प्रावधानों की अदला-बदली) का सहारा लिया है।
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क्या होते हैं स्वैप्ड प्रोविजन्स?
आयकर कानून की किताब में स्वैप्ड प्रोविजन्स जैसी कोई परिभाषा नहीं लिखी है, बल्कि यह विभाग द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक तकनीकी शब्द है। यह उन चालाकियों को दर्शाता है, जहां कोई करदाता टैक्स छूट का पात्र नहीं होता, लेकिन टैक्स का बोझ कम करने के लिए वह उस दावे को किसी दूसरी ऐसी धारा में ट्रांसफर कर देता है, जिसके लिए उसके पास न तो योग्यता होती है और न ही कोई दस्तावेजी सबूत।
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आसान भाषा में इसे ऐसे समझें
- नियमों की अनुचित अदला-बदली: एक प्रावधान की जगह दूसरे प्रावधान का इस्तेमाल करना, भले ही आपके वास्तविक वित्तीय आंकड़े उसका समर्थन न करते हों।
- दोहरा दावा: एक ही निवेश या खर्च को दो अलग-अलग धाराओं के तहत दिखाकर दो बार टैक्स छूट का लाभ उठाना।
- अपात्र छूट: किसी खर्च या निवेश को कानूनन तय सीमा से अधिक फायदेमंद और गलत धारा में रिपोर्ट कर देना।
आज के दौर में आयकर विभाग पूरी तरह से तकनीक आधारित जोखिम मूल्यांकन पर काम कर रहा है। आपके द्वारा आईटीआर में भरी गई एक-एक जानकारी को विभाग आपके वार्षिक सूचना विवरण (AIS), टीडीएस स्टेटमेंट्स, फॉर्म 26एएस और बैंकों से मिलने वाली हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन (SFT) रिपोर्ट्स के साथ कंप्यूटर एल्गोरिदम के जरिये मिलान करता है।
आपके दावों और डिजिटल फुटप्रिंट में जरा-सा भी अंतर मिलता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देता है। ऐसी विसंगतियां सामने आने पर न केवल आपका दावा खारिज कर दिया जाता है, बल्कि भारी ब्याज के साथ टैक्स डिमांड और स्क्रूटनी की कार्यवाही भी शुरू हो सकती है।
गलती का एहसास होते ही उठाएं कदम
करदाताओं को जैसे ही यह एहसास हो कि उन्होंने ऐसी कोई गलती की है, तो सबसे पहले दाखिल किए गए रिटर्न की सावधानीपूर्वक समीक्षा करें और सैलरी स्लिप, फॉर्म 16, एआईएस, फॉर्म 26एएस, निवेश के सबूत और बैंक स्टेटमेंट के साथ उसका अच्छे से मिलान करें।
- यदि रिटर्न संशोधन अवधि के भीतर है, तो गलती को सुधारने का सबसे सीधा तरीका आमतौर पर सटीक विवरण के साथ एक संशोधित रिटर्न दाखिल करना है।
- यदि रिटर्न पहले ही प्रोसेस हो चुका है और कोई सूचना या नोटिस जारी किया गया है, तो करदाता को निर्धारित समय के भीतर जवाब दें और जहां आवश्यक हो, लागू ब्याज के साथ अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करें।
- आयकर अधिनियम धारा 143(2) के तहत स्क्रूटनी नोटिस भेजना : आपके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न की गहन जांच शुरू हो जाएगी।
- धारा 142 के तहत जानकारी और रिकॉर्ड मांगने का नोटिस : विभाग आपसे दावों से जुड़े पक्के दस्तावेजी सबूत, रसीदें और बैंक खाते का विवरण मांग सकता है।
- धारा 270ए में 200 फीसदी जुर्माने का नोटिस : गलत जानकारी देने या आय छिपाने के जुर्म में बनती हुई टैक्स राशि पर सीधा दो गुना जुर्माना लग सकता है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अंकित गुप्ता बताते हें कि आयकर विभाग का यह कदम उन करदाताओं के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो टैक्स बचाने के लिए शॉर्टकट अपनाते हैं। याद रखें, विभाग द्वारा कड़ा एक्शन लिए जाने से पहले खुद आगे बढ़कर की गई सुधार की कोशिश हमेशा करदाता को मजबूत और सुरक्षित स्थिति में रखती है। टैक्स बचाने के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई और साख को दांव पर न लगाएं। यदि आपके पास अब भी कानूनन समय सीमा बची है, तो अपनी गलती स्वीकार करते हुए तुरंत एक संशोधित रिटर्न दाखिल करें और सही विवरण दें।
करदाता के पास हैं ये विकल्प
- निर्धारण वर्ष 2026-27 के लिए सही दावे के साथ संशोधित रिटर्न दाखिल करें।
- निर्धारण वर्ष 2025-26 और पिछले वर्षों के लिए सही दावे के साथ अपडेटेड रिटर्न दाखिल करें।
- यदि असेसमेंट की कार्यवाही चल रही है और अपडेटेड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा बंद हो चुकी है, तो सही टैक्स देनदारी का स्वयं मूल्यांकन करें और इसे ब्याज सहित जमा करें तथा प्राप्त नोटिस का जवाब देते समय इस तरह के टैक्स जमा के विवरण का उल्लेख करें।