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West Bengal: बंगाल के समुद्री क्षेत्रों का भी कायाकल्प कर सकते हैं अदाणी, सोनोवाल की सीएम से मुलाकात पर नजर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 04 Jun 2026 11:43 AM IST
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सार

पश्चिम बंगाल में समुद्री बुनियादी ढांचा क्षेत्र में नई हलचल। अदाणी पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक करण अदाणी की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अब केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी मुख्यमंत्री से मिलेंगे। ताजपुर बंदरगाह परियोजना के पुनरुद्धार की उम्मीदें बढ़ीं।

Adani-Bengal Maritime Hopes Rekindle as Union Minister Sonowal Meets CM
सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार

अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने बुधवार, 3 जून 2026 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इस बैठक से राज्य के समुद्री क्षेत्र के पुनरुद्धार की उम्मीदें फिर से जगी हैं। अब केंद्रीय बंदरगाह और जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल गुरुवार, 4 जून 2026 को मुख्यमंत्री से मिलने वाले हैं।



करण अदाणी, उद्योगपति गौतम अदाणी के पुत्र हैं। उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अदाणी समूह की राज्य के समुद्री बुनियादी ढांचा क्षेत्र में रुचि फिर से बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। अधिकारियों ने हालांकि चर्चा के विवरण का खुलासा नहीं किया। उद्योग विशेषज्ञों ने बताया कि अदाणी समूह की बंगाल में डेटा केंद्रों, बिजली पारेषण और शहर गैस वितरण सहित कई बुनियादी ढांचा खंडों में पहले से ही उपस्थिति है। अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन पहले प्रस्तावित ताजपुर गहरे समुद्र बंदरगाह परियोजना के लिए सफल बोलीदाता के रूप में उभरा था। हालांकि, पिछली टीएमसी सरकार ने निविदा रद्द कर दी थी और एक नई बोली प्रक्रिया का विकल्प चुना था।

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ताजपुर बंदरगाह परियोजना की उम्मीदें

भाजपा ने अपने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में पूर्वी मिदनापुर में ताजपुर गहरे समुद्र बंदरगाह के विकास का वादा किया था। उन्होंने दक्षिण 24 परगना में प्रस्तावित कुलपी बंदरगाह के विकास का भी उल्लेख किया था। इन परियोजनाओं को औद्योगीकरण, लॉजिस्टिक्स वृद्धि और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण बताया गया था। अनुमानित 25,000 करोड़ रुपये की ताजपुर परियोजना को लेकर उम्मीदें सरकार बदलने के बाद बढ़ी हैं। उद्योग हितधारकों को उम्मीद है कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय इस उद्यम को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

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निविदा और वर्तमान चुनौतियां

पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम द्वारा दिसंबर 2025 में जारी नवीनतम वैश्विक निविदा को रद्द कर दिया गया था। यह निविदा न्यूनतम आवश्यक बोलियां आकर्षित करने में विफल रही थी। बंगाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की राष्ट्रीय शिपिंग और लॉजिस्टिक्स समिति के अध्यक्ष अधिप नाथ पाल चौधरी ने इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बंगाल में केंद्र-राज्य का तालमेल परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत स्थिति में रखता है। हालांकि, इसकी सफलता मजबूत कनेक्टिविटी और निर्बाध बहुविध एकीकरण पर निर्भर करेगी।

परियोजना का लंबा इतिहास

एक दशक से भी पहले ताजपुर बंदरगाह परियोजना की कल्पना की गई थी। इसका उद्देश्य नदी आधारित कोलकाता डॉक प्रणाली पर दबाव कम करना है। यह पूर्वी भारत के समुद्री बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का भी लक्ष्य रखती है। परियोजना को शुरू में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता के साथ साझेदारी में खोजा गया था। बाद में राज्य ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल का विकल्प चुना। 2021 में, अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने नई बंदरगाह परियोजना के लिए उच्चतम बोली लगाई थी। यह बोली डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन और हस्तांतरण आधार पर थी। इसने जेएसडब्ल्यू इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रतिद्वंद्वी बोली को हराया था। पिछली टीएमसी के नेतृत्व वाली सरकार ने कुछ मतभेदों के कारण परियोजना की पेशकश से पीछे हट गई थी।

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