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अदाणी पोर्ट्स, एनएमडीसी और वेले ब्राजील मिलकर विकसित करेंगे 'आयरन ओर' के लिए एसईजेड आधारित इकोसिस्टम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:33 PM IST
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सार
परियोजना के तहत पूर्णतः मशीनीकृत बर्थिंग और कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं का विकास, एंड-टू-एंड यार्ड मैनेजमेंट, ब्लेंडिंग ऑपरेशन, और जहाजों की लोडिंग-अनलोडिंग जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी, जिससे सप्लाई चेन की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
अदाणी बंदरगाह
- फोटो : IANS
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विस्तार
अदाणी बंदरगाह और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एपीएसईजेड) ने अपनी सहायक कंपनी अदाणी गंगावरम पोर्ट लिमिटेड (एजीपीएल) के माध्यम से सरकारी कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड और वेले एस.ए. (वेले ब्राजील) के साथ एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह एमओयू भारत-ब्राजील बिजनेस फोरम शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इसके तहत गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर ब्लेंडिंग सुविधा और एक समर्पित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के विकास के लिए रणनीतिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
समझौते पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे, जो भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।
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वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा ये समझौता
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा कि यह सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए भविष्य-उन्मुख और लचीला बुनियादी ढांचा विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले खनिज लॉजिस्टिक्स को उन्नत बंदरगाह क्षमताओं के साथ जोड़कर उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ देश की व्यापक आर्थिक वृद्धि में योगदान दिया जाएगा।
इस सहयोग के तहत गंगावरम पोर्ट पर एक एकीकृत एसईजेड-आधारित इकोसिस्टम विकसित, संचालित और प्रबंधित किया जाएगा, जिसमें आयरन ओर की ब्लेंडिंग, वैल्यू एडिशन और व्यावसायीकरण शामिल होगा। इस पहल का उद्देश्य भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात वैल्यू चेन को मजबूत करना और खनिज प्रसंस्करण एवं व्यापार में दक्षता, पैमाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
ये भी पढ़ें: Congress: 'भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को स्थगित करें', कांग्रेस की मांग- शर्तों पर हो फिर से विचार
गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन होगी
इस विकास के साथ गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच जाएगी और यह भारत तथा क्षेत्र के लिए आयरन ओर निर्यात का प्रमुख केंद्र बनेगा। गुप्ता ने कहा कि एनएमडीसी और वेले के साथ साझेदारी पूर्वी तट पर आयरन ओर क्षेत्र के लिए आधुनिक, कुशल और सतत इकोसिस्टम स्थापित करने में मदद करेगी। गंगावरम पोर्ट भारत का पहला ऐसा बंदरगाह बनने की दिशा में अग्रसर है, जो ‘वैलेमैक्स’ जहाजों- दुनिया के सबसे बड़े वेरी लार्ज ओर कैरियर्स (वीएलओसी) को संभालने में सक्षम होगा, जिनकी वहन क्षमता 4,00,000 एमएमटी तक है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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यह एमओयू भारत-ब्राजील बिजनेस फोरम शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित किया गया। इसके तहत गंगावरम पोर्ट पर आयरन ओर ब्लेंडिंग सुविधा और एक समर्पित विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के विकास के लिए रणनीतिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
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समझौते पर ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान हस्ताक्षर हुए। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी उपस्थित रहे, जो भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।
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वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा ये समझौता
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा कि यह सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए भविष्य-उन्मुख और लचीला बुनियादी ढांचा विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले खनिज लॉजिस्टिक्स को उन्नत बंदरगाह क्षमताओं के साथ जोड़कर उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ देश की व्यापक आर्थिक वृद्धि में योगदान दिया जाएगा।
इस सहयोग के तहत गंगावरम पोर्ट पर एक एकीकृत एसईजेड-आधारित इकोसिस्टम विकसित, संचालित और प्रबंधित किया जाएगा, जिसमें आयरन ओर की ब्लेंडिंग, वैल्यू एडिशन और व्यावसायीकरण शामिल होगा। इस पहल का उद्देश्य भारत के पूर्वी तट पर आयरन ओर निर्यात वैल्यू चेन को मजबूत करना और खनिज प्रसंस्करण एवं व्यापार में दक्षता, पैमाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
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गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन होगी
इस विकास के साथ गंगावरम पोर्ट की क्षमता बढ़कर 75 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) तक पहुंच जाएगी और यह भारत तथा क्षेत्र के लिए आयरन ओर निर्यात का प्रमुख केंद्र बनेगा। गुप्ता ने कहा कि एनएमडीसी और वेले के साथ साझेदारी पूर्वी तट पर आयरन ओर क्षेत्र के लिए आधुनिक, कुशल और सतत इकोसिस्टम स्थापित करने में मदद करेगी। गंगावरम पोर्ट भारत का पहला ऐसा बंदरगाह बनने की दिशा में अग्रसर है, जो ‘वैलेमैक्स’ जहाजों- दुनिया के सबसे बड़े वेरी लार्ज ओर कैरियर्स (वीएलओसी) को संभालने में सक्षम होगा, जिनकी वहन क्षमता 4,00,000 एमएमटी तक है।
(इनपुट आईएएनएस से)
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