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कच्चे तेल का संकट: $120/बैरल पर पहुंचा भाव तो 6% तक फिसल सकती है भारत की जीडीपी ग्रोथ, महंगाई भी सताएगी: ईवाई

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Wed, 29 Apr 2026 02:23 PM IST
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सार

ईवाई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यदि पश्चिम एशियाई संकट के कारण वित्त वर्ष 27 में कच्चा तेल $120/बैरल तक पहुंचता है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6% तक गिर सकती है और महंगाई RBI के ऊपरी स्तर को छू सकती है। जानें अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव।

EY Claims GDP growth may slip to 6 pc if Indian crude basket averages USD 120/barrel in FY27
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अगर लंबा खिंचता है और इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2027 में भारतीय कच्चे तेल का बास्केट (आईसीबी) औसतन 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच जाता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। प्रमुख कंसल्टेंसी फर्म EY इंडिया ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में आशंका जताई है कि इस परिदृश्य में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर फिसलकर 6 प्रतिशत के आसपास आ सकती है। इतना ही नहीं कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर महंगाई पर भी पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 6 प्रतिशत के ऊपरी सहिष्णुता स्तर तक पहुंच सकती है।

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नीतिगत हस्तक्षेप और चुनौतियों पर जोर
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने 'ईवाई इकोनॉमी वॉच' रिपोर्ट में कहा कि हालांकि नीतिगत हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए नीति निर्माताओं को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि पश्चिम एशियाई संकट के कारण आईसीबी की कीमतें और बढ़ती हैं, तो रेपो दर में ऊपर की ओर संशोधन और कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों में तेजी से विविधता लाने पर विचार किया जाना चाहिए। श्रीवास्तव ने राजकोषीय मोर्चे पर भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "राजकोषीय घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए, ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ खुदरा विक्रेताओं पर अपेक्षाकृत अधिक हद तक डाला जाना चाहिए।"
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लंबा खिंच सकता है पश्चिम एशियाई संकट
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि मौजूदा संकेत बताते हैं कि पश्चिम एशियाई संकट उम्मीद से कहीं अधिक समय तक चल सकता है। श्रीवास्तव ने कहा कि भले ही यह संघर्ष सुलझ जाए, लेकिन वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति को पूरी तरह सामान्य होने में काफी समय लगेगा।
रिपोर्ट में अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (यूएस ईआईए) के अनुमानों का भी हवाला दिया गया है, जिसमें ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें Q1 2026 में औसतन 81 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर Q2 2026 में 115 डॉलर प्रति बैरल के शिखर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।

अन्य अनुमानों से तुलना और भविष्य की राह
ईवाई का यह प्रतिकूल परिदृश्य अन्य प्रमुख वित्तीय संस्थानों के आधारभूत अनुमानों से काफी अलग है। जानिए अन्य संस्थानों के क्या अनुमान हैं।

  • आरबीआई: वित्त वर्ष 27 के लिए 6.9% जीडीपी ग्रोथ और 4.6% औसत महंगाई का अनुमान।
  • आईएमएफ: 6.5% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान।
  • एडीबी: 6.9% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान।
  • विश्व बैंक: 6.6% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान।

श्रीवास्तव ने कहा कि इस बात की संभावना है कि वित्त वर्ष 27 में ICB की कीमत औसतन 95 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो सकती है। ऐसे में भारत की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से कम और मुद्रास्फीति RBI के आधारभूत अनुमानों से कुछ अधिक रह सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी रेखांकित किया गया है। श्रीवास्तव ने कहा, "प्रतिकूल परिदृश्य में भी, वित्त वर्ष 27 में भारत की वृद्धि दर वैश्विक विकास दर से दोगुनी से अधिक रहने की उम्मीद है।"

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