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AI Impact Summit 2026: 'एआई मिशन का फोकस हाइप नहीं, बल्कि असर और उत्पादन', बोले MeitY सचिव एस कृष्णन

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 17 Feb 2026 04:10 PM IST
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सार

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने इंडिया एआ में कहा कि इंडिया एआई मिशन का लक्ष्य हाइप नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में वास्तविक प्रभाव लाना है। जानें कैसे 600 से अधिक   स्टार्टअप्स और एआई उत्पादकता बढ़ा रहे हैं।

AI Impact Summit 2026 MeitY Secretary S. Krishnan emphasized that the India AI Mission
एआई समिट - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में चर्चा केवल एल्गोरिदम तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका केंद्र अब 'आउटकम' यानी परिणामों पर शिफ्ट हो गया है। एआई इंडिया इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन एक महत्वपूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने साफ किया कि 'इंडिया एआई मिशन' को विविध जरूरतों और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मॉडल किया गया है।

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सचिव ने जोर देकर कहा कि एआई की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसकी चर्चा कितनी है, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि वह नागरिकों के जीवन में कितना सुधार लाता है।
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कंप्यूट और डेटा का उद्देश्य वास्तविक समाधान
सत्र "फ्रॉम एल्गॉरिदम टू आउटकम्स: बिल्डिंग एआई दैड वर्क्स फॉर् पीपल" के दौरान एस. कृष्णन ने कहा, "हम कंप्यूट, मॉडल और डेटा केवल एक ही कारण से उपलब्ध करा रहे हैं- ताकि ऐसे एप्लिकेशन बनाए जा सकें जिनका वास्तविक असर हो।"

उन्होंने सरकार के सामने आने वाली संरचनात्मक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि सरकारों के पास कभी भी पर्याप्त शिक्षक, डॉक्टर या न्यायाधीश नहीं होंगे। लेकिन यदि एआई उत्पादकता बढ़ा सकता है, तो सेवा की गुणवत्ता में नाटकीय सुधार संभव है।

600 से अधिक स्टार्टअप्स और सेक्टोरल फोकस
समिट के दौरान एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर प्रकाश डालते हुए, सचिव ने बताया कि एक्सपो में 600 से अधिक स्टार्टअप्स और कंपनियां भाग ले रही हैं। ये स्टार्टअप्स स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और विनिर्माण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जहां एआई का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा।

विशेष बोले- सबूत और मूल्यांकन है जरूरी
जे-पाल के ग्लोबल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, इकबाल सिंह धालीवाल ने सत्र में 'सिल्वर बुलेट्स' (जादुई समाधान) के भ्रम से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "बिना कठोर मूल्यांकन के, हम उत्साह को प्रभाव समझने की गलती कर सकते हैं। हमें यह पूछने की जरूरत है कि एआई किसके लिए काम करता है और किन संदर्भों में काम करता है।

वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर माइकल क्रेमर ने ट्रेफिक एनफोर्समेंट, स्वास्थ्य और शिक्षा में एआई के शुरुआती प्रभावों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 'पर्सनलाइज्ड एडेप्टिव लर्निंग' ने सप्ताह में केवल एक घंटे के उपयोग से छात्रों के सीखने की गति को दोगुना कर दिया है। क्रेमर ने यह भी कहा कि सरकारी सेवाओं में सुधार के लिए केवल तकनीक काफी नहीं है, क्योंकि यहां निजी क्षेत्र जैसे मजबूत इंसेंटिव्स हमेशा मौजूद नहीं होते, इसलिए परोपकार और सरकार की भूमिका अहम है।

समिट के इस सत्र से जो सबसे जो सबसे अहम बात निकल कर सामने आई वह यह रही कि एआई में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इसे महसूस करने के लिए साक्ष्य-आधारित कार्यान्वयन और जिम्मेदार स्केलिंग की आवश्यकता है। चुनौती यह चुनने की है कि क्या काम करता है, गोपनीयता की रक्षा कैसे की जाए, और यह सुनिश्चित किया जाए कि जनता का पैसा मापनीय परिणाम दे सके।

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