AI की असली रेस: चिप्स, मशीनें और पावर गेम बदल रहे हैं दुनिया की अर्थव्यवस्था, जानिए आपके फोन पर क्या होगा असर?
एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स और एएसएमएल मशीनें दुनिया की अर्थव्यवस्था को बदल रही हैं। एआई के विस्तार से आपके स्मार्टफोन क्यों महंगे हो रहे हैं। एआई विशेषज्ञ गेनारो कुओफानो ने अपने एक आलेख में इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। आइए इसी आधार पर इस पूरे विषय को समझने की कोशिश करते हैं।
विस्तार
एआई, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कहें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यह केवल एक नया सॉफ्टवेयर या एप नहीं है, बल्कि बिजली और इंटरनेट की तरह एक 'सुपरसाइकिल' है। यह अगले 30 से 50 वर्षों के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से बदलने जा रहा है। अक्सर लोग यह समझ लेते हैं कि हम एआई के 'एप्लीकेशन' (इस्तेमाल) के दौर में पहुंच चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि अभी इसका सिर्फ बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। आइए समझते हैं कि एआई के बुनियादी ढांचे के पर्दे के पीछे असल में कौन सा आर्थिक और भू-राजनीतिक खेल चल रहा है।
सवाल : क्या एआई की रेस सिर्फ बेहतरीन सॉफ्टवेयर बनाने तक सीमित है?
जवाब: बिल्कुल नहीं। यह रेस असल में एक फिजिकल सप्लाई चेन (भौतिक आपूर्ति शृंखला) की प्रतियोगिता है। मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा मुनाफा उन कंपनियों को हो रहा है जो इस बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए जरूरी पुर्जे (जैसे चिप्स और मशीनें) बना रही हैं। एनवीडिया और टीएसएमसी जैसी कंपनियां इसी वजह से भारी मुनाफा कमा रही हैं।
सवाल: एआई के विस्तार में समय-समय पर कौन सी बड़ी रुकावटें सामने आई हैं?
जवाब: दुनिया में एआई से जुड़ी रुकावटें लगातार अपना रूप बदल रही हैं। इसे ऐसे समझिए-
- 2022: उस समय सबसे बड़ी चुनौती एडवांस चिप पैकेजिंग (CoWoS) की थी, जिसे पूंजी का इस्तेमाल कर सुलझा लिया गया।
- 2023-2024: इस दौरान पावर (बिजली) और डेटा सेंटर्स की कमी सामने आई। इसे गैस प्लांट और सोलर-बैटरी जैसे विकल्पों के जरिए सुलझाया जा रहा है।
- 2025-2027 (वर्तमान चुनौती): इस समय असली संकट चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों (Fab) और मेमोरी की कमी का है।
- 2028-2030: यह सबसे बड़ी और पार न की जा सकने वाली रुकावट होगी, जो एएसएमल कंपनी की मशीनें यानी ईयूवी टूल्स से जुड़ी हैं।
सवाल: एएसएमल कौन सी कंपनी हैं, इसकी बनाई मशीनें अहम क्यों है?
जवाब: एएसएमएल एक डच (नीदरलैंड की) कंपनी है। यह एकमात्र कंपनी है जो एआई और आधुनिक सेमीकंडक्टर चिप निर्माण के लिए आवश्यक सबसे उन्नत ईयूवी (Extreme Ultraviolet) लिथोग्राफी मशीनें बनाती है। इसका पूरा नाम एडवान्स्ड सेमिकंडक्टर मैटेरियल्स लिथोग्राफ्री है। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया में एएसएमएल की अहमियत इतनी ज्यादा है कि 2028 से 2030 के बीच एआई के विस्तार में इसकी मशीनें सबसे बड़ी और पार न की जा सकने वाली रुकावट मानी जा रही हैं।
सवाल: एएसएमएल की मशीनों को रातों-रात क्यों नहीं खरीदा जा सकता?
जवाब: एएसएमएल की ईयूवी मशीनें बेहद जटिल होती हैं। ये मशीनें टिन की बूंदों पर लेजर से हमला कर रोशनी पैदा करती हैं और इनमें 18 शीशे परमाणु सटीकता के साथ लगाए जाते हैं। इन्हें बनाने की सप्लाई चेन में 10,000 से अधिक संस्थाएं शामिल हैं। 2025 में एएसएमएल ने केवल 48 मशीनें दीं और 2030 तक सालाना 100 मशीनें बनाने का लक्ष्य है। यही कारण है कि कोई बड़ी से बड़ी कंपनी भी सिर्फ बड़ा चेक लिखकर कल ही ये मशीनें हासिल नहीं कर सकती।
सवाल: ओपनएआई और एंथ्रोपिक की रणनीति ने बाजार को क्या सिखाया?
जवाब: एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे बड़ा फायदा उन कंपनियों को हुआ जिन्होंने जोखिम उठाकर सबसे पहले निवेश किया। ओपनएआई ने शुरुआती दौर में ही लंबी अवधि के लिए 1.40 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से सस्ते कंप्यूटर पावर के सौदे कर लिए। दूसरी ओर, एंथ्रोपिक ने सावधानी बरती। मार्च 2026 की शुरुआत तक एंथ्रोपिक का रेवेन्यू बढ़कर 19 बिलियन डॉलर हो गया, लेकिन क्षमता कम होने के कारण अब उन्हें 2.40 डॉलर प्रति घंटे या उससे भी अधिक का 'स्पॉट प्राइस' चुकाना पड़ रहा है।
सवाल: एआई बूम का आम आदमी के स्मार्टफोन या गैजेट्स पर क्या असर पड़ रहा है?
जवाब: आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा आर्थिक असर पड़ने लगा है। एआई के लिए एचबीएम (हाई बैंडविड्थ मेमोरी) चाहिए, जो सामान्य फोन की मेमोरी के मुकाबले चार गुना ज्यादा जगह लेती है। एआई कंपनियां इसके लिए ज्यादा पैसा दे रही हैं, जिससे आम फोन की मेमोरी का उत्पादन प्रभावित हुआ है और 2025 में फोन की रैम (RAM) के दाम चार गुना तक बढ़ गए। इसके चलते 2026 में स्मार्टफोन की बिक्री 12.9% गिरने का अनुमान है। सस्ते एंड्रॉइड फोन बनाने वाली कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि एपल सुरक्षित है। लोग जल्द ही देखेंगे कि एआई के कारण उनके गैजेट्स महंगे हो रहे हैं।
सवाल: एआई चिप्स को लेकर चीन और अमेरिका की रणनीति के क्या मायने हैं ?
जवाब: यह रेस इस बात की है कि चीन अपनी सप्लाई चेन पूरी तरह से स्वदेशी करने से पहले, अमेरिका कितनी बढ़त बना लेता है। अमेरिका अभी आगे है, लेकिन चीन ने शेन्जेन में एक गुप्त ईयूवी मशीन का प्रोटोटाइप बना लिया है, इसके जरिए 2028-2030 के बीच चिप्स का उत्पादन शुरू हो सकता है। वहीं, ताइवान पर अत्यधिक निर्भरता एक बड़ा खतरा है। अगर ताइवान ब्लॉक होता है, तो वैश्विक एआई क्षमता 200 गीगावॉट से गिरकर 10-20 गीगावॉट रह जाएगी, जो पूरी इंडस्ट्री को ठप कर देगा।
सवाल: क्या अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनाना इस समस्या का हल है?
जवाब: अभी के लिए नहीं। अंतरिक्ष में चिप भेजने और सेट करने में बहुत समय लगता है। अभी एआई चिप्स बहुत कीमती हैं और उनकी क्षमता का हर दिन कीमती है। ऐसे में उन्हें महीनों तक अंतरिक्ष भेजने की प्रक्रिया में फंसाए रखना आर्थिक रूप से एक गलत फैसला है। जानकारों का मानना हे कि यह विचार 2035 के बाद ही व्यावहारिक होगा।
सवाल: फिलहाल एआई के बारे में हम क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
जवाब: एआई विशेषज्ञ गेनारो कुओफानो के अनुसार एआई की असली दौड़ बेहतरीन मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि सीमित हार्डवेयर और सप्लाई चेन के अनुबंधों पर कब्जा करने की है। आने वाले समय में जो देश और कंपनियां एएसएमएल जैसी अहम कड़ियों को नियंत्रित करेंगी, वही विश्व अर्थव्यवस्था के नए बॉस होंगे।