Amar Ujala Samwad 2026: इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा से तय हो रही विकास की दिशा, बोले विशेषज्ञ
लखनऊ में अमर उजाला संवाद 2026 में 'नया भारत, नया उत्तर प्रदेश' पर विशेषज्ञों की राय जानें। इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य और सड़क सुरक्षा पर सटीक विश्लेषण के लिए पूरी खबर पढ़ें।
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विस्तार
लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद 2026 के मंच पर मंगलवार को 'नया भारत, नया उत्तर प्रदेश' विषय पर एक विस्तृत परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण सत्र में उद्योग जगत के दिग्गजों और नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया और राज्य के आर्थिक विकास, आधारभूत ढांचे, क्विक कॉमर्स और स्वास्थ्य क्षेत्र में आ रहे बदलावों का डेटा-आधारित विश्लेषण पेश किया।
रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और रियल एस्टेट परिदृश्य पर बात करते हुए एफिल ग्रुप के चेयरमैन एसके गर्ग ने राज्य की निवेश संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में अपार संभावनाएं मौजूद हैं और राज्य के पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। इसके साथ ही नीतियों को लागू करने के लिए मंत्रियों का एक पूरा समूह (गैलेक्सी ऑफ मिनिस्टर) कार्यरत है। उन्होंने कहा कि रेरा के लागू होने के बाद से रियल एस्टेट सेक्टर की विश्वसनीयता में भारी वृद्धि हुई है और आगे चलकर इस क्षेत्र में और अधिक पारदर्शी व्यवस्था देखने को मिलेगी।
सड़क सुरक्षा: एक बड़ी चुनौती और समाधान
पूर्व आईएएस अधिकारी एससी नागपाल ने संवाद के मंच पर पहली बार सड़क सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को शामिल करने के लिए आयोजकों की सराहना की। सड़क हादसों के गंभीर आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया:
- भारत में प्रतिदिन लगभग 500 लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं।
- उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा रोज करीब 60 से 65 मौतों का है।
- देश की कुल सड़कों में एक्सप्रेस-वे और स्टेट हाईवे की हिस्सेदारी मात्र तीन प्रतिशत है, लेकिन यूपी के हाईवे में बड़े पैमाने पर आधुनिक रोड सेफ्टी फीचर्स जोड़े गए हैं।
नागपाल ने हादसों को कम करने के लिए दो प्रमुख कदम सुझाए। पहला, ओवर-स्पीडिंग रोकने के लिए पेट्रोलिंग गाड़ियों की ड्यूटी हर दिन अलग-अलग स्थानों पर लगाई जानी चाहिए। दूसरा, अवैध जगहों से होने वाली 'रॉन्ग साइड एंट्री' को प्राथमिकता के आधार पर रोकना जरूरी है। उनका मानना है कि हादसे के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
क्विक कॉमर्स और शहरी अर्थव्यवस्था का विस्तार
उपभोक्ता बाजार के बदलते स्वरूप पर जेप्टो के चीफ ग्रोथ ऑफिसर दिवेश साहनी ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जेप्टो का नेटवर्क अब 50 शहरों तक पहुंच चुका है। क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि घनी आबादी वाले शहर इस सेवा के लिए सबसे अनुकूल होते हैं। कंपनी का मुख्य लक्ष्य अब अलग-अलग तरह के शहरों में ऐसी जगहों की पहचान कर अपनी पहुंच (रीच) को और अधिक विस्तार देना है।
हेल्थकेयर: बीमा से कम हो रहा आर्थिक बोझ
स्वास्थ्य और बीमा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति पर उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के एमडी और सीईओ नितिन नाग ने अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने बीमा क्षेत्र में मौजूद वित्त के गैप (वित्तीय कमी) की बात स्वीकार की, लेकिन सरकारी योजनाओं के प्रभाव को भी स्पष्ट किया। नाग के अनुसार, आयुष्मान कार्ड योजना के जरिये देश के 55 करोड़ लोगों को बीमा कवर मिला है। इस कार्ड के माध्यम से अब कोई भी व्यक्ति किसी भी अस्पताल में जाकर अपना इलाज करा सकता है, जिससे आम परिवारों पर पड़ने वाले भारी आर्थिक बोझ में बड़ी कमी आई है।
अमर उजाला संवाद 2026 के इस सत्र से यह साफ हुआ कि उत्तर प्रदेश का विकास अब केवल औद्योगिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है। राज्य में रियल एस्टेट की पारदर्शिता, आम जनमानस की सड़क सुरक्षा, क्विक कॉमर्स जैसे नए बिजनेस मॉडल और स्वास्थ्य बीमा के विस्तार को लेकर जो जमीनी काम हो रहा है, वही 'नए उत्तर प्रदेश' की वास्तविक नींव रख रहा है। भविष्य में इन क्षेत्रों में होने वाला नीतिगत सुधार राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।