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Edible Oil: नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात के कारण वित्त वर्ष 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात 3% बढ़ा, जानें सबकुछ
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 19 May 2026 01:40 PM IST
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सार
भारत का खाद्य तेल आयात वित्त वर्ष 2026 में 3 फीसदी बढ़कर 166.51 लाख टन हो गया, जिसमें नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात की बड़ी भूमिका रही। घरेलू उत्पादन केवल 40 फीसदी मांग पूरी करता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
खाद्य तेल
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने मंगलवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का खाद्य तेल आयात 3 फीसदी बढ़कर 166.51 लाख टन हो गया है। यह वृद्धि मुख्य रूप से नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात में तेज उछाल के कारण हुई है। पिछले वित्त वर्ष में यह आयात 161.82 लाख टन था।
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दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) समझौते के तहत नेपाल को भारतीय बाजारों तक शून्य-शुल्क पहुंच प्राप्त है। इस वर्ष नेपाल ने भारत को 7.36 लाख टन खाद्य तेल का निर्यात किया, जो पिछले वित्त वर्ष के 3.45 लाख टन से 113 फीसदी अधिक है। नेपाल के निर्यात में परिष्कृत सोयाबीन तेल की प्रमुख हिस्सेदारी थी, साथ ही सूरजमुखी तेल, आरबीडी पामोलिन और रेपसीड तेल भी शामिल थे।
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एसईए ने कहा कि नेपाल से परिष्कृत तेलों के शुल्क-मुक्त आयात में वृद्धि ने भारत के कुल खाद्य तेल आयात को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। संगठन ने बताया कि साफ्टा व्यवस्था के बिना, बढ़ती घरेलू मांग के बावजूद कुल आयात पिछले वर्ष के स्तर से कम रह सकता था। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि और रुपये के कमजोर होने से आयात लागत भी बढ़ी है। भारत अभी भी विदेशी आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर है।
घरेलू उत्पादन की चुनौतियां
एसईए के अनुसार, कम तिलहन उपज, खंडित भूमि जोत, सीमित सिंचाई और गेहूं तथा चावल की खेती की ओर नीतिगत झुकाव ने घरेलू उत्पादन वृद्धि को बाधित किया है। भारत अपनी कुल खाद्य तेल आवश्यकताओं का लगभग 40 फीसदी ही घरेलू स्तर पर पूरा कर पाता है। संगठन ने तिलहन उत्पादकता बढ़ाने और घरेलू मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है। इससे दीर्घकालिक आयात निर्भरता को कम करने में मदद मिलेगी।
खपत कम करने और आत्मनिर्भरता पर जोर
एसईए ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने उपभोक्ताओं से खाद्य तेल की खपत को संयमित करने का आग्रह किया था। संगठन ने कहा कि अत्यधिक उपयोग पर अंकुश लगाने के साथ-साथ घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात निर्भरता कम होगी। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव भी कम होगा। भारत को खाद्य तेलों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है।