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Biz Updates: 1085 करोड़ की धोखाधड़ी में अनिल अंबानी पर एफआईआर
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 09 Mar 2026 05:50 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उद्योगपति अनिल अंबानी, उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस लि. और उसकी पूर्व निदेशक मंजरी अशोक कक्कड़ के खिलाफ 1,085 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में एफआईआर दर्ज की है। यह मामला पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शिकायत पर 5 मार्च को दर्ज किया गया है।
यह शिकायत बैंक की मुंबई में स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच के चीफ मैनेजर संतोषकृष्ण अन्नावरपु ने दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर 2013 से 2017 के बीच पीएनबी और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (अब पीएनबी में विलय हो गया है) के साथ धोखाधड़ी की। इससे बैंकों को लगभग 1,085.19 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। नुकसान में पीएनबी के 621.39 करोड़ रुपये और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के 463.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश रचा और बेईमानी से बैंकों को रिलायंस कम्युनिकेशंस को क्रेडिट सुविधा मंजूरी करने के लिए मनाया। शक है कि ऋण के पैसे दूसरी जगह हस्तांतरित किए गए और इनका दुप्रयोग किया गया। इससे कथित तौर पर आपराधिक विश्वासघात और हेराफेरी हुई।
शिकायत के अनुसार, ऋण खातों को बाद में 2017 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स के तौर पर क्लासिफाई कर दिया गया, क्योंकि कर्ज लेने वाला वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में नाकाम रहा और ऋण की शर्तों का उल्लंघन किया। बैंक ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि बीडीओ इंडिया एलएलपी के किए गए फोरेंसिक ऑडिट के नतीजों के बाद फरवरी 2021 में खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया गया था। ऑडिट में बैंक फंड के कथित डायवर्जन और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन की ओर इशारा किया गया।
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यह शिकायत बैंक की मुंबई में स्ट्रेस्ड एसेट्स मैनेजमेंट ब्रांच के चीफ मैनेजर संतोषकृष्ण अन्नावरपु ने दर्ज कराई है। एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर 2013 से 2017 के बीच पीएनबी और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (अब पीएनबी में विलय हो गया है) के साथ धोखाधड़ी की। इससे बैंकों को लगभग 1,085.19 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। नुकसान में पीएनबी के 621.39 करोड़ रुपये और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के 463.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। एफआईआर के अनुसार आरोपियों ने कथित तौर पर आपराधिक साजिश रचा और बेईमानी से बैंकों को रिलायंस कम्युनिकेशंस को क्रेडिट सुविधा मंजूरी करने के लिए मनाया। शक है कि ऋण के पैसे दूसरी जगह हस्तांतरित किए गए और इनका दुप्रयोग किया गया। इससे कथित तौर पर आपराधिक विश्वासघात और हेराफेरी हुई।
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शिकायत के अनुसार, ऋण खातों को बाद में 2017 में नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स के तौर पर क्लासिफाई कर दिया गया, क्योंकि कर्ज लेने वाला वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में नाकाम रहा और ऋण की शर्तों का उल्लंघन किया। बैंक ने जांचकर्ताओं को यह भी बताया कि बीडीओ इंडिया एलएलपी के किए गए फोरेंसिक ऑडिट के नतीजों के बाद फरवरी 2021 में खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया गया था। ऑडिट में बैंक फंड के कथित डायवर्जन और संबंधित पक्षों के साथ लेनदेन की ओर इशारा किया गया।
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