ईरान जंग के आगे बेबस बाजार: सेंसेक्स 2400 अंक धड़ाम, जानिए बिकवाली की सुनामी आने के पांच बड़े कारण क्या?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल के कारण भारत समेत दुनियाभर के शेयर बाजार धड़ाम हो गए हैं। जानिए सेंसेक्स और निफ्टी के क्रैश होने के पांच प्रमुख कारण।
विस्तार
जंग ईरान में हो रही है। ईरान के साथ भिड़े हैं अमेरिका और इस्राइल। इसके चपेट में हैं खाड़ी के देश। फिर भारत के शेयर बाजार में बिकवाली क्यों हो रही है? आइए समझने की कोशिश करते हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज उछाल ने वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों को बुरी तरह झकझोर दिया है।
सोमवार की सुबह बाजार में क्या हुआ?
सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी सदमे से कम नहीं रहा। सोमवार को सुबह-सुबह भारतीय शेयर बाजार में हुई भारी बिकवाली के कारण शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों को करीब 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने की आशंका है। बेंचमार्क सूचकांक भारी बिकवाली के दबाव के साथ खुले। सेंसेक्स 2,320 अंकों का भारी गोता लगाकर 76,598 के स्तर पर आ गया, वहीं निफ्टी करीब 700 अंक टूटकर 23,764 पर पहुंच गया। बैंक निफ्टी में भी 2,288 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई। रुपया भी शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 43 पैसे गिरकर 92.25 पर आ गया।
भारतीय और वैश्विक बाजारों में इस तीव्र बिकवाली के पीछे पांच प्रमुख कारण ये रहे-
1. ईरान-इस्राइल युद्ध और बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव
इस्राइल और ईरान के बीच मिसाइल हमले और तनाव चरम पर है। इस्राइल द्वारा तेहरान के एक तेल डिपो को निशाना बनाए जाने के बाद निवेशकों में दहशत फैल गई है। इसके अलावा, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख- जिसमें उन्होंने ईरान से बिना शर्त सरेंडर की मांग की है और जमीनी हमले की भी चेतावनी दी है- ने वैश्विक अस्थिरता को और गहरा कर दिया है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा उछाल
युद्ध के कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है। कुवैत, यूएई और इराक जैसे प्रमुख देशों ने उत्पादन में भारी कटौती की है। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड में लगभग 20% से 24% की जोरदार उछाल आई और यह 110 से 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो जून 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। कतर के ऊर्जा मंत्री की इस चेतावनी ने कि कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती हैं, बाज़ार की घबराहट को और बढ़ा दिया है।
3. विदेशी निवेशकों की निरंतर और भारी निकासी
भारतीय बाज़ार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का पलायन जारी है। शुक्रवार को FIIs ने कैश, इंडेक्स और स्टॉक फ्यूचर्स मिलाकर कुल 9,459 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की। यह लगातार छठा दिन है जब विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 6,972 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने का प्रयास किया है, लेकिन विदेशी निकासी का दबाव हावी है।
4. वैश्विक बाजार में चौतरफा बिकवाली
कच्चे तेल और युद्ध का असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ा है। एशियाई बाजारों में ऐतिहासिक गिरावट आई है; जापान का निक्केई (Nikkei 225 futures) 7.4% और टॉपिक्स (Topix) 5.8% गिर गया। ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 4.3%, हांगकांग का हैंग सेंग 2.9% और शंघाई कंपोजिट 1.3% तक टूटे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी भारी दबाव है, जहां डाओ फ्यूचर्स में करीब 900 अंकों की गिरावट दिखी और एसएंडपी (S&P) 500 फ्यूचर्स 2.2% गिर गए।
5. सेक्टोरल बिकवाली और बढ़ता 'फियर इंडेक्स'
बाजार में अनिश्चितता का अंदाजा 'इंडिया विक्स' (वोलैटिलिटी इंडेक्स) से लगाया जा सकता है, जिसमें 21% का तेज उछाल दर्ज किया गया और यह 24.04 के स्तर पर पहुंच गया। घरेलू बाजार में पीएसयू बैंक 5%, ऑटो 4%, फाइनेंशियल 3.7%, मीडिया 3.4% और मेटल सेक्टर 3% गिर गए। एफएमसीजी, आईटी और फार्मा जैसे डिफेन्सिव सेक्टर्स में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाता है।
अब आगे क्या?
वैश्विक अनिश्चितता और इक्विटी बाजारों में मचे इस हाहाकार के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि डॉलर इंडेक्स तीन महीने के ऊंचे स्तर 99.50 के पार निकल गया है और घरेलू बाजार में सोने व चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। जब तक मध्य पूर्व के कूटनीतिक हालात स्थिर नहीं होते और कच्चे तेल की सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताएं दूर नहीं होतीं, बाज़ार में यह दबाव और 'रिस्क-ऑफ' सेंटिमेंट बने रहने की पूरी संभावना है।
कमेंट
कमेंट X