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Biz Updates: भारत वैश्विक मांग का प्रमुख चालक बन रहा है; US में ट्रंप के ट्रिलियन डॉलर निवेश दावों पर सवाल

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 27 Jan 2026 02:23 PM IST
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बिजनेस अपडेट - फोटो : अमर उजाला
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संयुक्त अरब अमीरात के उद्योग मंत्री और ADNOC के सीईओ सुल्तान अल जाबेर ने कहा है कि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण वैश्विक मांग का निर्णायक चालक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में खपत को बढ़ाएगी, जिसमें हवाई यात्रा से लेकर डेटा सेंटर तक शामिल हैं।

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इंडिया एनर्जी वीक में मंगलवार को बोलते हुए सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि भारत धीरे-धीरे नहीं, बल्कि बड़े और निर्णायक कदमों के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले 15 वर्षों में भारत में हवाई यात्रा 150 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि आज की ऊर्जा व्यवस्था को कई लोग अस्थिरता, आपूर्ति शृंखला में बदलाव, भू-राजनीतिक झटकों और तकनीकी बदलाव के नजरिए से देखते हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण अलग है।
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सुल्तान अल जाबेर के अनुसार, मौजूदा उथल-पुथल के पीछे बड़े स्तर पर बदलाव की तस्वीर छिपी है, और यह बदलाव उन देशों और कंपनियों को फायदा पहुंचाएगा जो साहसिक फैसले लेते हैं, न कि उन लोगों को जो स्थिरता का इंतजार करते हैं।


अमेरिका में निवेश के ट्रंप के दावों पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों को अमेरिका में ट्रिलियन डॉलर के निवेश का वादा करने के लिए मजबूर किया है। हालांकि, मंगलवार को सामने आए एक अध्ययन ने इन निवेश प्रतिबद्धताओं की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं और यह भी पूछा है कि अगर ये निवेश आए भी, तो उनका उपयोग किस तरह किया जाएगा।

पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री ग्रेगरी ऑक्लेयर और अदनान मजारई ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि इन निवेश वादों की व्यवहारिकता संदिग्ध है। उन्होंने कहा, “इन प्रतिबद्धताओं की वास्तविकता क्या है? संक्षिप्त उत्तर यह है कि इनमें काफी अनिश्चितता है।

अध्ययन में पिछले वर्ष किए गए 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के निवेश वादों का विश्लेषण किया गया। इनमें यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और खाड़ी देशों सऊदी अरब, कतर, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

महाराष्ट्र में आईटीए छात्रों के लिए PM-SETU योजना लागू
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) में पीएम-सेतु योजना लागू करने को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं के कौशल विकास को मजबूत करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

पहले चरण में नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जिलों के ITI संस्थानों में योजना लागू की जाएगी। इसके बाद अगले चरण में इसे राज्य के अन्य जिलों में विस्तार दिया जाएगा। आधिकारिक बयान के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ढांचे को आधुनिक बनाया जाएगा और छात्रों के लिए नौकरी हासिल करना आसान होगा। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना की शुरुआत 4 अक्तूबर 2025 को हुई थी, जिसका लक्ष्य देशभर के 1,000 सरकारी ITI संस्थानों का आधुनिकीकरण करना है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) से जुड़े ठेकेदारों के लंबित भुगतान को निपटाने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत को ऊर्जा क्षेत्र में हर साल 145 अरब डॉलर निवेश की जरूरत
भारत को आर्थिक विकास और नेट-जीरो लक्ष्य के बीच संतुलन बनाने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में हर साल औसतन करीब 145 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी। यह बात वैश्विक ऊर्जा सलाहकार कंपनी वुड मैकेंजी ने मंगलवार को कही।

इंडिया एनर्जी वीक 2026 में बोलते हुए वुड मैकेंजी के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के वाइस चेयरमैन जोशुआ नगु ने कहा कि 2035 तक करीब 6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि बनाए रखने और ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने के लिए पूंजी निवेश को रणनीतिक रूप से बिजली उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड के आधुनिकीकरण पर केंद्रित करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए अगला दशक निर्णायक होगा। भारत को एक साथ दो बड़ी चुनौतियों से निपटना होगा तत्काल ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और कम-कार्बन अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करना। जोशुआ नगु के अनुसार, आज लिए गए निवेश फैसले तय करेंगे कि भारत कार्बन-आधारित ढांचे में फंस जाएगा या कम-कार्बन औद्योगिकीकरण में दुनिया का नेतृत्व करेगा।

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