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Budget 2026: बुनियादी ढांचे पर जोर बने रहने के संकेत, FY27 में 12 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है कैपेक्स

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 27 Jan 2026 02:51 PM IST
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सार

बजट 2026 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) 12 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकता है। SBI की रिपोर्ट के मुताबिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस और 10% की वृद्धि जारी रहेगी। जानें बजट के बड़े आंकड़े।

Union Budget 2026 Central Govt Capex SBI Report Infrastructure Growth Indian Economy Fiscal Deficit
बजट 2026 - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को संसद में आगामी केंद्रीय बजट पेश करते हुए एक बार फिर अपना फोकस बुनियादी ढांचे के विकास पर रहने की उम्मीद है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ताजा इकोरैप रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2027 में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स 12 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है।

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इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस: 10% की वृद्धि का अनुमान
एसबीआई की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण और आर्थिक विकास को गति देने की रणनीति जारी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, FY27 में सरकारी कैपेक्स में सालाना आधार पर लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत सरकार अपने पूंजीगत खर्च में कटौती के मूड में नहीं दिख रही है।
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बीते दशक में चार गुना से ज्यादा बढ़ा खर्च
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ वर्षों में बजट के जरिए होने वाले पूंजीगत व्यय में भारी उछाल आया है:

  • बजटीय कैपेक्स: वित्तीय वर्ष 2016 (FY16) में यह मात्र 2.5 लाख करोड़ रुपये था, जो बजट अनुमानों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
  • पूंजीगत संपत्तियों के लिए अनुदान : सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर संपत्ति निर्माण के लिए दिए जाने वाले अनुदान में भी तेजी आई है। यह FY16 में 1.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

FY26 में 19.8 लाख करोड़ पर पहुंचा था आंकड़ा
अगर हम बजटीय आवंटन के साथ-साथ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा किए गए खर्च को भी जोड़ दें, तो तस्वीर और भी व्यापक हो जाती है। सीपीएसई का कैपेक्स (आंतरिक और अतिरिक्त बजटीय संसाधनों द्वारा वित्तपोषित) FY26 में 4.3 लाख करोड़ रुपये रहा। इस प्रकार, बजटीय खर्च, अनुदान और सीपीएसई के खर्च को मिलाकर 'कुल कैपेक्स'  FY16 के 7.0 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 19.8 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। जीडीपी के हिस्से के रूप में भी, पूंजीगत व्यय FY26 में लगभग 5.5 प्रतिशत के मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो सरकार की 'इंफ्रास्ट्रक्चर-लेड ग्रोथ' की नीति को दर्शाता है।

उधारी का गणित और राजकोषीय प्रबंधन
बजट में उधारी के आंकड़ों पर भी बाजार की नजर रहेगी। एसबीआई रिपोर्ट का अनुमान है कि FY27 के लिए केंद्र सरकार की शुद्ध उधारी लगभग 11.7 ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये हो सकती है, जो राजकोषीय घाटे का करीब 70 प्रतिशत है।

  • पुनर्भुगतान: लगभग 4.60 ट्रिलियन रुपये होने की उम्मीद है, जिसमें 1 लाख करोड़ रुपये का अपेक्षित बायबैक और 1.5 ट्रिलियन रुपये के अनुमानित स्विच शामिल हैं।
  • राज्यों की स्थिति: राज्य स्तर पर सकल उधारी 12.6 ट्रिलियन रुपये रहने का अनुमान है।

वैश्विक चुनौतियां और आउटलुक
यह बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल है। रिपोर्ट में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता जताई गई है। सवाल यह है कि क्या क्रूड मौजूदा आपूर्ति-संचालित स्थिरता से बाहर निकलकर व्यापक कमोडिटी रैली में शामिल होगा। कुल मिलाकर, 1 फरवरी को पेश होने वाला बजट यह साबित कर सकता है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत सरकार आर्थिक पहिए को घुमाने के लिए सरकारी खर्च का रास्ता ही अपनाएगी। 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का संभावित कैपेक्स इस बात का संकेत है कि सड़क, रेलवे और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश की रफ्तार धीमी नहीं पड़ने वाली है।

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