Gold-Silver Price: सोना 1.60 लाख के करीब; चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, भाव 3.59 लाख प्रति किग्रा के शिखर पर
सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल। एमसीएक्स पर चांदी 3.59 लाख रुपये/kg और सोना 1.59 लाख रुपये/10g के पार। जानें ट्रंप की नीतियों और बजट का क्या होगा असर।
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वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में मंगलवार को ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने और चांदी की कीमतों ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव 3.59 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गया, जबकि सोना 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बेहद करीब पहुंच गया है। बाजार के जानकारों का कहना है कि यह तेजी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका में बदल रही आर्थिक नीतियों के डर का नतीजा है।
एमसीएक्स पर तेजी से बढ़े भाव
मंगलवार को वायदा कारोबार में चांदी में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 25,101 रुपये यानी 7.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,59,800 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही चांदी ने पहली बार 3 लाख रुपये का आंकड़ा पार किया था और एक हफ्ते में इसमें 16.3% की तेजी आ चुकी थी।
वहीं, सोने की चमक भी और बढ़ गई है। फरवरी कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 3,783 रुपये (2.42%) उछलकर 1,59,820 रुपये प्रति 10 ग्राम के नए 'लाइफ-टाइम हाई' पर पहुंच गया। पिछले एक हफ्ते में सोने की कीमतों में 9.5% यानी करीब 13,520 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है।
तेजी की मुख्य वजह: 'सेफ-हेवन' की तलाश
विश्लेषकों के अनुसार, इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:
- ट्रंप का 'टैरिफ वार' डर: मेहता इक्विटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री बताते हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दक्षिण कोरियाई आयात पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया है।
- सॉवरेन बॉन्ड्स पर घटा भरोसा: कलंत्री के अनुसार, राजकोषीय अनुशासन और नीतिगत विश्वसनीयता को लेकर बढ़ती चिंताओं ने सॉवरेन बॉन्ड्स और करंसी (मुद्रा) पर निवेशकों का भरोसा कम किया है, जिससे वे सोने-चांदी की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं।
- डीबेसमेंट ट्रेड: रिलायंस सिक्योरिटीज के जिगर त्रिवेदी का कहना है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारी सरकारी खर्च को देखते हुए निवेशक बॉन्ड्स से पैसा निकालकर 'रियल एसेट्स' में लगा रहे हैं, जिसे 'डीबेसमेंट ट्रेड' कहा जा रहा है।
ग्लोबल मार्केट में मुनाफावसूली, लेकिन रिकॉर्ड कायम
जहां भारतीय बाजार में कीमतें चढ़ रही थीं, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली देखी गई। मार्च डिलीवरी वाली चांदी 6.27% गिरकर 108.26 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, हालांकि इससे पहले इसने 117.26 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड बनाया था,। इसी तरह, सोना भी 5,107.9 डॉलर का रिकॉर्ड छूने के बाद मामूली गिरावट के साथ 5,096.05 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। सोने ने शुक्रवार को पहली बार 5,000 डॉलर का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया था।
अब बजट और फेड पर नजर
घरेलू बाजार में सोमवार को गणतंत्र दिवस की छुट्टी के बाद मंगलवार को यह एक्शन देखने को मिला। अब ट्रेडर्स की नजर दो बड़ी घटनाओं पर है:
- यूएस फेड पॉलिसी: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक और ट्रंप द्वारा नए फेड चेयरमैन की नियुक्ति की अटकलें बाजार की दिशा तय करेंगी।
- केंद्रीय बजट 2026: कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट पर भी बाजार की नजर है। इम्पोर्ट ड्यूटी में किसी भी बदलाव का सीधा असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ेगा।
फिलहाल बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है, जो कीमती धातुओं के लिए 'रॉकेट फ्यूल' का काम कर रहा है। जब तक वैश्विक नीतियां स्थिर नहीं होतीं, बुलियन बाजार में यह उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।