Biz Updates: जंग से बाजार दबाव में; मार्च में एफपीआई की रिकॉर्ड बिकवाली, NCLAT ने बीएसई की अपील ठुकराई
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखने लगा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च महीने में अब तक रिकॉर्ड स्तर पर बिकवाली की है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, 27 मार्च तक एफपीआई ने नकदी बाजार में 1,13,380 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। यह किसी भी महीने में अब तक का सबसे बड़ा बाहरी पूंजी प्रवाह है। इससे पहले अक्तूबर 2024 में 94,017 करोड़ रुपये की बिकवाली का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं। इससे रुपया और इक्विटी बाजार दोनों पर दबाव देखा जा रहा है। इस बीच, डीमैट खातों की जब्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की अपील खारिज कर दी है।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि दिवालियापन प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) को हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की धारा 60(5) के तहत एनसीएलटी को व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं।
दरअसल, बीएसई ने एनसीएलटी के उस अधिकार को चुनौती दी थी, जिसके तहत दिवालियापन समाधान या परिसमापन के दौरान कंपनियों के डीमैट खातों पर लगी रोक हटाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। बीएसई का तर्क था कि यह मामला भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नियामकीय दायरे में आता है और एनसीएलटी को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हालांकि, अपीलीय अधिकरण ने इस दलील को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि दिवालियापन से जुड़े मामलों में एनसीएलटी का अधिकार सर्वोपरि है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्टता आएगी।
तेल कीमतों पर राहत देने की तैयारी, ऑस्ट्रेलिया ने फ्यूल टैक्स आधा किया
तेल की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के बीच ऑस्ट्रेलिया सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने सोमवार को घोषणा की कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले फ्यूल एक्साइज टैक्स को आधा करेगी। कैनबरा में राज्यों और क्षेत्रों के नेताओं के साथ बैठक के बाद अल्बनीज ने बताया कि यह कटौती बुधवार से लागू होगी और तीन महीने तक जारी रहेगी। इस फैसले से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 26.3 सेंट प्रति लीटर की कमी आने की उम्मीद है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आई है, जिसका असर ऑस्ट्रेलिया में भी साफ दिख रहा है। ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (AIP) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पेट्रोल की औसत कीमत 2.53 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले 6.3% अधिक है। वहीं डीजल की कीमतों में और तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक सप्ताह में डीज़ल 9.7% महंगा होकर 3.1 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि टैक्स में कटौती से उपभोक्ताओं पर बढ़ते ईंधन खर्च का बोझ कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
भारत के एविएशन सेक्टर में विमान खरीद पर संकट, डिलीवरी में 15 साल तक की देरी संभव
भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नए विमानों की खरीद में बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा है कि देश की एयरलाइनों द्वारा लगभग 1,700 विमानों का ऑर्डर दिया गया है, लेकिन वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण इनकी डिलीवरी में 15 साल तक का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में विमान निर्माण की गति धीमी हो गई है, जिससे विमानों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। नायडू ने कहा कि हवाई अड्डों का निर्माण जमीन उपलब्ध होने पर अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन विमानों की उपलब्धता अब सबसे बड़ा अवरोध बन गई है।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार घरेलू स्तर पर विमान निर्माण को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के साथ साझेदारी में सुखोई सुपरजेट 100 विमान के निर्माण की दिशा में काम चल रहा है।
पंजाब में फसल चक्र पर दबाव, किसानों को विविधीकृत खेती की ओर बढ़ाने की पहल
पंजाब में दशकों से चली आ रही गेहूं-धान की पारंपरिक खेती अब संकट के दौर से गुजर रही है। कभी देश की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ रही यह प्रणाली अब घटती जोत, बढ़ती लागत, गिरते भूजल स्तर और अनिश्चित मौसम जैसी चुनौतियों के कारण अस्थिर होती जा रही है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और इसके तहत काम करने वाले कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को विविधीकृत और एकीकृत खेती मॉडल अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस मॉडल में पारंपरिक फसलों के साथ डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों की आय के स्रोत बढ़ें और जोखिम कम हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव न केवल किसानों की आजीविका को स्थिर बनाएगा, बल्कि कृषि को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी बनाएगा।