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Biz Updates: जेपी मॉर्गन की इकाई पर सेबी का शिकंजा; ट्रंप टैरिफ के बावजूद भारत का अमेरिकी निर्यात बढ़ा
Thu, 20 Aug 2026 08:26 AM IST
ज्योति भास्कर
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 20 Aug 2026 08:26 AM IST
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- फोटो : amarujala.com
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भारतीय शेयर बाजार नियामक- सेबी ने सेंसेक्स एक्सपायरी वाले दिन क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) में कथित हेरफेर को लेकर जेपी मॉर्गन से जुड़ी कॉप्थॉल मॉरीशस और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। 13 अगस्त को 3:20 से 3:30 बजे के बीच बाजार में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया। संस्थाओं से 3.68 करोड़ जब्त करने का आदेश दिया गया है।
ट्रंप टैरिफ के बावजूद भारत का अमेरिकी निर्यात बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय सामान पर लगाए गए भारी शुल्क के बावजूद देश के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग स्थिर बनी है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई तक के 12 महीनों में भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही। एक समय ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर दिया था। इस साल फरवरी में इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया। फिलहाल, भारतीय वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू है। इसके बावजूद अमेरिकी बाजार भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजार बना हुआ है। अमेरिका अब भी भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे आकर्षक बाजार है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 2022-23 के 17.4 फीसदी से बढ़कर अब करीब 20 फीसदी हो गई है। हालांकि, निर्यातक अब एक ही बाजार पर निर्भरता का जोखिम कम करने को लेकर अधिक सतर्क हैं। व्यापारिक अनिश्चितता के बीच भारत ने पिछले एक साल में दूसरे बड़े बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया है।
शीर्ष निजी बैंकों में एक साल में 10,000 से ज्यादा नौकरियां घटीं
भारत के बड़े निजी बैंकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक का असर अब रोजगार पर भी दिखने लगा है। देश के शीर्ष 10 निजी बैंकों के कर्मचारियों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में 10,114 घट गई। इन बैंकों का कुल कार्यबल मार्च 2026 तक 7,39,452 रह गया, जो दो साल पहले के 7,59,203 से करीब 2.6% कम है।
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किन बैंकों में कितने कर्मचारी घटे?
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ट्रंप टैरिफ के बावजूद भारत का अमेरिकी निर्यात बढ़ा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारतीय सामान पर लगाए गए भारी शुल्क के बावजूद देश के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी लगभग स्थिर बनी है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई तक के 12 महीनों में भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 20 फीसदी रही। एक समय ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी तक कर दिया था। इस साल फरवरी में इसे घटाकर 18 प्रतिशत किया गया। फिलहाल, भारतीय वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क लागू है। इसके बावजूद अमेरिकी बाजार भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण निर्यात बाजार बना हुआ है। अमेरिका अब भी भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे आकर्षक बाजार है। आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 2022-23 के 17.4 फीसदी से बढ़कर अब करीब 20 फीसदी हो गई है। हालांकि, निर्यातक अब एक ही बाजार पर निर्भरता का जोखिम कम करने को लेकर अधिक सतर्क हैं। व्यापारिक अनिश्चितता के बीच भारत ने पिछले एक साल में दूसरे बड़े बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया है।
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शीर्ष निजी बैंकों में एक साल में 10,000 से ज्यादा नौकरियां घटीं
भारत के बड़े निजी बैंकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीक का असर अब रोजगार पर भी दिखने लगा है। देश के शीर्ष 10 निजी बैंकों के कर्मचारियों की कुल संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में 10,114 घट गई। इन बैंकों का कुल कार्यबल मार्च 2026 तक 7,39,452 रह गया, जो दो साल पहले के 7,59,203 से करीब 2.6% कम है।
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किन बैंकों में कितने कर्मचारी घटे?
| बैंकों के नाम | कर्मचारियों की संख्या |
| आईसीआईसीआई बैंक | 6,633 |
| एचडीएफसी बैंक | 3,346 |
| एक्सिस बैंक | 3,116 |
| कोटक महिंद्रा बैंक | 1,269 |
| मध्यम आकार के इन बैंकों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ी | |
| फेडरल बैंक | 1,570 |
| इंडसइंड बैंक | 1,491 |
| यस बैंक | 904 |
| आईडीएफसी फर्स्ट बैंक | 869 |
| बंधन बैंक | 365 |
पिछले वर्ष यूएएन में शामिल हुए 79% युवा
वित्त वर्ष 2025-2026 में बने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) में से 79 फीसदी 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। कर्मचारी एवं कार्यबल समाधान कंपनी क्वेस कॉर्प की पल्स 2025-2026 रिपोर्ट से पता चलता है कि युवा भारत में संगठित रोजगार को गति दे रहे हैं। इससे देश के कार्यबल में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-2026 में 57000 से अधिक नए यूएएन बने। 21 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक रही। नए सदस्यों में करीब 59 प्रतिशत 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के थे। यह अर्थव्यवस्था में युवाओं की भूमिका को दर्शाता है।
क्या है यूएएन नंबर
यूएएन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा नौकरी करने वाले हर व्यक्ति को दिया जाने वाला 12 अंकों का यूनिक और स्थायी नंबर है। यह प्रत्येक कर्मचारी को दिया जाता है, जो नौकरी के दौरान कभी नहीं बदलता।
वित्त वर्ष 2025-2026 में बने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) में से 79 फीसदी 18 से 30 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। कर्मचारी एवं कार्यबल समाधान कंपनी क्वेस कॉर्प की पल्स 2025-2026 रिपोर्ट से पता चलता है कि युवा भारत में संगठित रोजगार को गति दे रहे हैं। इससे देश के कार्यबल में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत मिलता है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-2026 में 57000 से अधिक नए यूएएन बने। 21 से 25 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से अधिक रही। नए सदस्यों में करीब 59 प्रतिशत 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग के थे। यह अर्थव्यवस्था में युवाओं की भूमिका को दर्शाता है।
क्या है यूएएन नंबर
यूएएन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा नौकरी करने वाले हर व्यक्ति को दिया जाने वाला 12 अंकों का यूनिक और स्थायी नंबर है। यह प्रत्येक कर्मचारी को दिया जाता है, जो नौकरी के दौरान कभी नहीं बदलता।