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E10 Petrol: पुराने वाहनों के लिए फिर लौटेगा E10 पेट्रोल, E20 के बीच सरकार क्यों कर रही विकल्प देने पर विचार?
Thu, 20 Aug 2026 05:31 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Thu, 20 Aug 2026 05:31 AM IST
सार
E20 पेट्रोल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच पुराने वाहनों के मालिकों की चिंता अब केंद्र सरकार के सामने बड़ा मुद्दा बन गई है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के सुझाव के बाद सरकार E10 पेट्रोल को फिर विकल्प के तौर पर उपलब्ध कराने पर विचार कर रही है। क्या पुराने वाहनों के लिए E10 सच में जरूरी है? इसे दोबारा बाजार में लाने में सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी और क्या सरकार इस पर अंतिम फैसला ले चुकी है?
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क्या E10 से पुराने वाहनों की समस्या दूर हो सकती है?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्र सरकार मौजूदा E20 पेट्रोल के साथ पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार कर रही है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के सुझाव के बाद इस मुद्दे पर तेल कंपनियों के साथ बातचीत शुरू हुई है। हालांकि, यह बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और E10 को दोबारा बाजार में उतारने का कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। सरकार का ध्यान खास तौर पर उन पुराने वाहनों पर है, जो E20 के लिए तैयार नहीं किए गए हैं।
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E20 के बाद पुराने वाहन मालिकों की चिंता क्यों बढ़ी?
भारत ने पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से करीब पांच साल पहले हासिल कर लिया था। इसके बाद E20 पेट्रोल को प्रमुख ईंधन विकल्प के तौर पर लागू किया गया। इससे पुराने कार और दोपहिया वाहन मालिकों की चिंता बढ़ी है। उनका कहना है कि ज्यादा इथेनॉल मिश्रण के लिए डिजाइन नहीं किए गए वाहनों में माइलेज कम हो सकता है और इंजन से जुड़ी परेशानियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से E10 को एक वैकल्पिक ईंधन के तौर पर फिर से लाने की मांग उठ रही है।
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E10 और E20 दोनों रखने में सबसे बड़ी मुश्किल क्या है?
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईंधन की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था है। अगर E10 और E20 दोनों पेट्रोल उपलब्ध कराए जाते हैं तो पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग ईंधन रखने के लिए अतिरिक्त भंडारण व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ परिवहन और वितरण का पूरा नेटवर्क भी अलग तरीके से संभालना पड़ सकता है। सरकार पहले भी देशभर में पेट्रोल के अलग-अलग ग्रेड उपलब्ध कराने को महंगा और जटिल काम बता चुकी है। इसलिए E10 की वापसी सिर्फ ईंधन बनाने का नहीं, बल्कि पूरी आपूर्ति व्यवस्था का सवाल है।
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