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West Asia: होर्मुज बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई संकट में, रिपोर्ट में दावा सबसे ज्यादा एशिया पर पड़ा असर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Mon, 30 Mar 2026 03:41 PM IST
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सार

ईरान-अमेरिका-इस्राइल संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल सप्लाई बाधित हो गई है। सबसे पहले एशिया में तेल की कमी का असर दिख रहा है, जबकि धीरे-धीरे यह संकट यूरोप और अमेरिका तक पहुंचेगा।

Closure of Hormuz puts global oil supply in jeopardy, report claims Asia most affected
पश्चिम एशिया में जारी तनाव - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज फिलहाल बंद हो गया है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस मार्ग के बंद होने से पश्चिम एशिया से दुनिया के अन्य हिस्सों में तेल की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है और कई देशों में तेल भंडार घटने का असर दिखने लगा है।
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पश्चिम एशिया संकट का सबसे पहले एशिया पर पड़ रहा

अमेरिकी वित्तीय संस्था जेपी मॉर्गन चेस की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट का असर सबसे पहले एशिया पर पड़ रहा है और धीरे-धीरे यह अमेरिका और यूरोप तक पहुंचेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर फारस की खाड़ी से तेल 10 से 20 दिनों में एशिया, 20 से 35 दिनों में यूरोप-अफ्रीका और 35 से 45 दिनों में अमेरिका पहुंचता है, लेकिन सप्लाई चेन बाधित होने से यह क्रम टूट गया है।
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युद्ध से पहले भेजी गई अधिकांश खेप अब खत्म हो चुकी है

रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी तेल टैंकर 28 फरवरी को होर्मुज स्ट्रेट से निकला था और युद्ध से पहले भेजी गई अधिकांश खेप अब खत्म हो चुकी है। इसके चलते एशिया में सबसे पहले दबाव बढ़ा है, जहां तेल की कीमतों से ज्यादा अब वास्तविक कमी बड़ी चुनौती बन गई है।

तेल निर्यात में महीने दर महीने 41% की गिरावट दर्ज की गई

दक्षिण-पूर्व एशिया इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां तेल निर्यात में महीने-दर-महीने 41 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके बाद अफ्रीका में असर तेजी से बढ़ रहा है और अप्रैल की शुरुआत तक कई देशों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। शुरुआती संकेत भी सामने आने लगे हैं, केन्या में रिटेल स्तर पर ईंधन की कमी दिख रही है, जबकि तंजानिया में अभी पर्याप्त भंडार मौजूद है।

यूरोप और अमेरिका को लेकर क्या अनुमान

यूरोप पर इसका असर अप्रैल के मध्य तक दिखने की संभावना है, हालांकि वहां मजबूत स्टॉक और वैकल्पिक सप्लाई स्रोत होने के कारण तत्काल संकट कुछ हद तक नियंत्रित रह सकता है। वहीं, अमेरिका पर इसका असर सबसे अंत में पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू उत्पादन अधिक होने के कारण अमेरिका को तत्काल भौतिक कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन ऊंची कीमतों का दबाव बना रहेगा। खासकर कैलिफोर्निया जैसे क्षेत्रों में सप्लाई चुनौतियां उभर सकती हैं।


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