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वैश्विक बाजार में बड़ी राहत: ट्रंप के ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के बाद टूटा कच्चा तेल, कीमतें 15% तक फिसलीं

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Mon, 23 Mar 2026 05:30 PM IST
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सार

मध्य पूर्व में तनाव कम होने और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले के बाद कच्चे तेल  की कीमतों में 15% तक की भारी गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके असर की पूरी खबर पढ़ें।

Crude Oil price Brent crude WTI Trump Iran conflict Strait of Hormuz Brent Crude Prices Fall
कच्चे तेल की कीमतों पर असर - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

पश्चिम एशिया में चल रहे गंभीर भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजारों से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को टालने के आदेश के बाद, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इस बड़े कूटनीतिक कदम से तेल बाजार में बिकवाली का दौर शुरू हो गया, जिससे कीमतें अपने हालिया उच्चतम स्तरों से काफी नीचे आ गई हैं।

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आंकड़ों में गिरावट: ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड का हाल
बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका के इस फैसले के बाद तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत से अधिक की कुल गिरावट देखी गई है। बाजार में इस डी-एस्केलेशन (तनाव में कमी) का सीधा असर दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क पर पड़ा है:

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  • ब्रेंट क्रूड: 11:08 GMT तक, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा में लगभग 17 डॉलर यानी 15 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 96 डॉलर प्रति बैरल के सत्र के निचले स्तर पर आ गया।
  • डब्ल्यूटीआई क्रूड: इसी तर्ज पर, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) में भी भारी बिकवाली देखी गई। यह 13 डॉलर या लगभग 13.5 प्रतिशत टूटकर 85.28 डॉलर प्रति बैरल के सत्र के निचले स्तर पर पहुंच गया।

तनाव का असर: 100 डॉलर के पार क्यों गया था तेल?
इस तेज गिरावट को समझने के लिए बाजार के हालिया रुझानों पर गौर करना जरूरी है। इससे पहले, मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था और यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। इस भारी उछाल का मुख्य कारण ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमले थे। इन हमलों की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, व्यावहारिक रूप से  बंद हो गया था। आपूर्ति बाधित होने के इस सीधे खतरे ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा कर दी थी।

अर्थव्यवस्था और बाजार के लिए इसके मायने?
ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई टलने का अर्थ है कि फिलहाल खाड़ी क्षेत्र से तेल उत्पादन और आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है। 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी कीमतों का 96 डॉलर (ब्रेंट) और 85.28 डॉलर (डब्ल्यूटीआई) पर वापस लौटना, वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आयातक देशों के लिए महंगाई के मोर्चे पर एक बड़ा सकारात्मक संकेत है। जहाजों पर हमलों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जो आपूर्ति का जोखिम पैदा हुआ था, वह सैन्य कार्रवाई टलने से बाजार की नजरों में थोड़ा कम हुआ है।

भू-राजनीतिक मोर्चे पर यह तनाव में कमी ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि तेल की कीमतों में यह भारी सुधार आ गया है, लेकिन बाजार की नजरें अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी रहेंगी। यदि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह सामान्य होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में आगे और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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