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Cyber Insurance: यूपीआई फ्रॉड से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक, एक छोटी-सी पॉलिसी लुटने से बचाएगी जिंदगी भर की कमाई
अंकित गुप्ता, हेड ऑफ साइबर इंश्योरेंस, पॉलिसीबाजार फॉर बिजनेसेस
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 19 Jan 2026 05:54 AM IST
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सार
Cyber Insurance: एक छोटी-सी गलती में जीवन भर की कमाई उड़ सकती है। तेजी से बढ़ते साइबर हमलों के दौर में मोबाइल और ऑनलाइन बैंकिंग हर व्यक्ति को जोखिम में डाल रहे हैं। यही वजह है कि पर्सनल साइबर इंश्योरेंस अब सुविधा नहीं, बल्कि डिजिटल जीवन की अनिवार्य सुरक्षा बन चुका है। पढ़िए रिपोर्ट-
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
शिव कुमार अपने रिटायरमेंट के पैसों से एक छोटा-सा सपना बुन रहे थे। एक दोपहर उनके पास फोन आया-सर, आपका बिजली का बिल अपडेट नहीं है, अभी लिंक पर क्लिक करें, वरना कनेक्शन कट जाएगा। शिव कुमार ने घबराहट में क्लिक किया, एक OTP साझा किया और अगले पांच मिनट में उनके खाते से 20 लाख रुपये गायब हो गए। सेक्राइट की इंडिया साइबर थ्रेट रिपोर्ट 2026 बताती है कि 2025 में 26.5 करोड़ से अधिक साइबर हमले हुए, यानी हर दिन औसत सात लाख से अधिक घटनाएं दर्ज की गईं।
साइबर इंश्योरेंस की किसे जरूरत?
ये भी पढ़ें: मोमेंटम इन्वेस्टिंग: ट्रेंड्स को मुनाफे में बदलने की रणनीति, शेयर पहचानने के लिए करें इन फिल्टर का इस्तेमाल
भारत में सबसे आम साइबर अपराध
अपने जोखिम प्रोफाइल को जानें: अपनी डिजिटल गतिविधियों और डाटा की संवेदनशीलता का आकलन करें। इसमें आपके द्वारा हैंडल किए जाने वाले डाटा के प्रकार और आपकी सुरक्षा प्रणालियों (जैसे MFA, फायरवॉल) का मूल्यांकन शामिल है।
कवरेज बारीकी से जांचें: सुनिश्चित करें कि पॉलिसी फर्स्ट पार्टी लॉस (जैसे डाटा रिकवरी, रैनसमवेयर भुगतान) और थर्ड-पार्टी लायबिलिटी (जैसे ग्राहकों या भागीदारों द्वारा किए गए दावे), दोनों को कवर करती है।
एक्सक्लूजन पर ध्यान दें: करीब 27% दावे केवल एक्सक्लूजन के कारण आंशिक रूप से भुगतान या अस्वीकार कर दिए जाते हैं। सामान्य एक्सक्लूजन में घटना की देरी से सूचना देना, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना या पॉलिसी से पहले की घटनाएं शामिल हैं।
कवरेज लिमिट, डिडक्टिबल: डिडक्टिबल वह राशि है, जो आपको क्लेम मिलने से पहले जेब से देनी होगी।
क्लेम सेटलमेंट हिस्ट्री : बीमा कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेशियो जांचें। उस कंपनी को चुनें, जिनके पास साइबर जोखिमों का अनुभव हो और जो 24/7 रिस्पॉन्स सहायता प्रदान करती हो।
असली समस्या
आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि आपके बैंक की चाबी है। जितनी तेजी से UPI, ई-बैंकिंग और ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बढ़ा है, उतनी ही तेजी से साइबर ठगों के हमले भी बढ़े हैं। ऐसे में पर्सनल साइबर इंश्योरेंस डिजिटल जीवन की सबसे जरूरी चीज बन चुका है।
जानना जरूरी है साइबर इंश्योरेंस के लाभ
वित्तीय सुरक्षा: यह साइबर हमले के कारण हुए धन के नुकसान की भरपाई करता है और चोरी हुए डाटा को बहाल करने की लागत को कवर करता है।
प्रतिष्ठा की बहाली: यदि हमले से आपकी सामाजिक या व्यावसायिक साख खराब होती है, तो यह संकट प्रबंधन और प्रतिष्ठा सुधारने के खर्चों में मदद करता है।
कानूनी सहायता: डाटा उल्लंघन के कारण होने वाले मुकदमों, कानूनी बचाव और नियामक जुर्माने के खर्च को कवर करता है।
विशेषज्ञ सहायता: धोखाधड़ी होने पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से तुरंत तकनीकी मदद और जांच प्रक्रिया में सहायता मिलती है।
व्यवसाय की निरंतरता: हमले से काम ठप हो जाए, तो यह आय के नुकसान की भरपाई करता है, ताकि बिजनेस जल्द पटरी पर लौटे।
मानसिक शांति: बीमा होने पर आप बिना किसी बड़े डर के डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: ताकि सनद रहे: कार खरीदने पर TCS को पा सकते हैं वापस, किसे और कितना मिलेगा? जानिए
व्यक्तिगत साइबर बीमा कवर:
यह कवर नहीं: तथ्य छिपाने से नुकसान, निवेश या ट्रेडिंग गतिविधियां, भौतिक संपत्ति को नुकसान, दुर्भावनापूर्ण, बेईमानी या जानबूझकर किया कार्य, चोट, सदमा या मृत्यु, जुआ और क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन, साइबर युद्ध
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साइबर इंश्योरेंस की किसे जरूरत?
- ऑनलाइन खरीदार और बैंकिंग यूजर
- हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स
- रिमोट वर्कर्स और फ्रीलांसर
- सोशल मीडिया यूजर्स और इन्फ्लुएंसर
- बच्चे और परिवार
- व्यक्तिगत जानकारी डिजिटल रूप से सहेजने वाले
ये भी पढ़ें: मोमेंटम इन्वेस्टिंग: ट्रेंड्स को मुनाफे में बदलने की रणनीति, शेयर पहचानने के लिए करें इन फिल्टर का इस्तेमाल
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भारत में सबसे आम साइबर अपराध
- धन की चोरी: स्कैमर्स हैकिंग या फिशिंग के जरिये आपके बैंक खातों या डिजिटल वॉलेट तक पहुंच बनाकर अवैध रूप से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।
- पहचान की चोरी: जब कोई थर्ड पार्टी इंटरनेट पर आपकी व्यक्तिगत जानकारी या कानूनी दस्तावेज (जैसे आधार या पैन) चुराकर उसका दुरुपयोग करता है।
- फिशिंग: हमलावर भरोसेमंद बनकर फर्जी ई-मेल या कॉल करते हैं, ताकि आपसे संवेदनशील जानकारी निकलवाई जा सके या मालवेयर डाउनलोड कराया जा सके।
- धोखाधड़ी वाली ऑनलाइन बिक्री: स्कैमर्स ऐसी वस्तुओं के लिए भुगतान प्राप्त करने के लिए नकली वेबसाइटें बनाते हैं, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं।
- डिजिटल अरेस्ट: यह एक नया ट्रेंड है, जहां स्कैमर्स सरकारी अधिकारी बनकर आपको गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देते हैं और डर का माहौल बनाकर बड़ी रकम वसूलते हैं।
अपने जोखिम प्रोफाइल को जानें: अपनी डिजिटल गतिविधियों और डाटा की संवेदनशीलता का आकलन करें। इसमें आपके द्वारा हैंडल किए जाने वाले डाटा के प्रकार और आपकी सुरक्षा प्रणालियों (जैसे MFA, फायरवॉल) का मूल्यांकन शामिल है।
कवरेज बारीकी से जांचें: सुनिश्चित करें कि पॉलिसी फर्स्ट पार्टी लॉस (जैसे डाटा रिकवरी, रैनसमवेयर भुगतान) और थर्ड-पार्टी लायबिलिटी (जैसे ग्राहकों या भागीदारों द्वारा किए गए दावे), दोनों को कवर करती है।
एक्सक्लूजन पर ध्यान दें: करीब 27% दावे केवल एक्सक्लूजन के कारण आंशिक रूप से भुगतान या अस्वीकार कर दिए जाते हैं। सामान्य एक्सक्लूजन में घटना की देरी से सूचना देना, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना या पॉलिसी से पहले की घटनाएं शामिल हैं।
कवरेज लिमिट, डिडक्टिबल: डिडक्टिबल वह राशि है, जो आपको क्लेम मिलने से पहले जेब से देनी होगी।
क्लेम सेटलमेंट हिस्ट्री : बीमा कंपनी का क्लेम सेटलमेंट रेशियो जांचें। उस कंपनी को चुनें, जिनके पास साइबर जोखिमों का अनुभव हो और जो 24/7 रिस्पॉन्स सहायता प्रदान करती हो।
असली समस्या
आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि आपके बैंक की चाबी है। जितनी तेजी से UPI, ई-बैंकिंग और ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बढ़ा है, उतनी ही तेजी से साइबर ठगों के हमले भी बढ़े हैं। ऐसे में पर्सनल साइबर इंश्योरेंस डिजिटल जीवन की सबसे जरूरी चीज बन चुका है।
जानना जरूरी है साइबर इंश्योरेंस के लाभ
वित्तीय सुरक्षा: यह साइबर हमले के कारण हुए धन के नुकसान की भरपाई करता है और चोरी हुए डाटा को बहाल करने की लागत को कवर करता है।
प्रतिष्ठा की बहाली: यदि हमले से आपकी सामाजिक या व्यावसायिक साख खराब होती है, तो यह संकट प्रबंधन और प्रतिष्ठा सुधारने के खर्चों में मदद करता है।
कानूनी सहायता: डाटा उल्लंघन के कारण होने वाले मुकदमों, कानूनी बचाव और नियामक जुर्माने के खर्च को कवर करता है।
विशेषज्ञ सहायता: धोखाधड़ी होने पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों से तुरंत तकनीकी मदद और जांच प्रक्रिया में सहायता मिलती है।
व्यवसाय की निरंतरता: हमले से काम ठप हो जाए, तो यह आय के नुकसान की भरपाई करता है, ताकि बिजनेस जल्द पटरी पर लौटे।
मानसिक शांति: बीमा होने पर आप बिना किसी बड़े डर के डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शॉपिंग और ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।
ये भी पढ़ें: ताकि सनद रहे: कार खरीदने पर TCS को पा सकते हैं वापस, किसे और कितना मिलेगा? जानिए
व्यक्तिगत साइबर बीमा कवर:
- धन की चोरी
- पहचान की चोरी
- मालवेयर
- रैनसमवेयर
- ऑनलाइन शॉपिंग और बिक्री
- सोशल मीडिया और मीडिया दायित्व
- साइबर बुलिंग, प्रतिष्ठा की हानि
- नेटवर्क सुरक्षा और गोपनीयता उल्लंघन दायित्व
यह कवर नहीं: तथ्य छिपाने से नुकसान, निवेश या ट्रेडिंग गतिविधियां, भौतिक संपत्ति को नुकसान, दुर्भावनापूर्ण, बेईमानी या जानबूझकर किया कार्य, चोट, सदमा या मृत्यु, जुआ और क्रिप्टोकरेंसी में लेन-देन, साइबर युद्ध
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