कौन चला रहा दाऊद गिरोह?: ISI ने उत्तराधिकार विवाद सुलझाकर बचाया आतंकी फंडिंग नेटवर्क, जानिए डी-कंपनी का सच
भारत में अपनी काली करतूतों के कारण वांछित दाऊद इब्राहिम लंबे समय से पाकिस्तान में है। अब दाऊद इब्राहिम की खराब सेहत से जुड़ी खबरों के बीच इस बात का दावा किया जा रहा है कि उसके गिरोह को बिखरने से बचाने का जिम्मा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने संभाल लिया है। आईएसआई की मदद से डी कंपनी को नया कॉरपोरेट खाका देने की कोशिश हो रही है। इस बारे में क्या जानकारी सामने आई है? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर।
विस्तार
फिल्म धुरंधर: द रिवेंज के कारण अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस फिल्म में 1993 के धमाकों के आरोपी दाऊद को बिस्तर पर पड़े हुए एक बीमार व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है। मुंबई धमकों के आरोपी दाऊद इब्राहिम की यह तस्वीर उन पुरानी तस्वीरों के बिल्कुल विपरीत है, जिसे भारत में आमतौर पर देखा जाता है।
दाऊद की बिगड़ती सेहत का असर उसके काले कारनामों पर भी पड़ रहा है। दाऊद की बिगड़ी सेहत के बीच उसके सिंडिकेट, जिसे भारत में डी कंपनी के नाम से जाना जाता है, के भीतर उत्तराधिकार के लिए भी विवाद शुरू है। इस विवाद में आईएसआई की भी इंट्री हो गई है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए दाऊद का गिरोह एक बहुत बड़ी संपत्ति है, क्योंकि वह नशीले पदार्थों और जाली मुद्रा के नेटवर्क को नियंत्रित करता है। यही कारण है कि आईएसआई को सिंडिकेट को दो हिस्सों में बंटने से रोकने के लिए पूरे मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
क्या दाऊद के गिरोह में चल रहा उत्तराधिकार का संघर्ष?
आईएएनएस ने अपनी एक रिपोर्ट में खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के हवाले से बताया है कि 70 वर्षीय दाऊद बीते कई वर्षों से बीमार है। वह गंभीर मधुमेह व हृदय रोग से पीड़ित है। स्वास्थ्य कारणों से दाऊद मुख्य रूप से घर के अंदर ही रहता है और गिरोह के सदस्यों के साथ उसकी बातचीत न के बराबर होती है। आईएसआई और सिंडिकेट ने दाऊद की इन स्वास्थ्य समस्याओं को लंबे समय तक छिपा कर रखा ताकि गिरोह अवैध कारोबार जारी रहे।
चूंकि दाऊद रोजाना के कामकाज से बाहर है, इसलिए उत्तराधिकार की लड़ाई उसके बेहद करीबी सहयोगी छोटा शकील और परिवार के सदस्यों के बीच छिड़ गई थी। दाऊद के परिवार में उसका भाई, बेटा, पत्नी और दामाद शामिल हैं, जो चाहते थे कि सिंडिकेट का प्रमुख उनके बीच से ही कोई हो। दूसरी ओर, वे अपने गिरोह को टूटने से भी बचाना चाहते हैं।
आईएसआई और दाऊद के गिरोह का क्या कनेक्शन?
आईएसआई यह अच्छी तरह से जानती थी कि सिंडिकेट में बंटवारा उसके लिए नुकसानदायक होगा। जब दाऊद ने भारत से भागकर पाकिस्तान में शरण ली थी, तब उसे पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ एक सौदा करना पड़ा था। इस सौदे के तहत तय हुआ था कि दाऊद नशीले पदार्थों के व्यापार और जाली भारतीय मुद्रा से होने वाली अपनी आय का 40 प्रतिशत हिस्सा आईएसआई को देगा। यह व्यवस्था आज भी जारी है और आईएसआई इस पैसे का इस्तेमाल भारत में आतंकी गतिविधियों को भारतीय धरती पर हमला करने वाले अपने आतंकी संगठनों को चलाने के लिए करती है। सिंडिकेट के टूटने का सीधा मतलब था कि आईएसआई को दाऊद गिरोह से होने वाली काली कमाई बंद हो जाती।
दाऊद के गिरोह को आईएसआई किस रूप में ढाल रही?
आईएसआई ने उत्तराधिकार के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया और गिरोह को एक कॉरपोरेट फर्म का रूप दे दिया है। इस व्यवस्था के तहत गिरोह के अलग-अलग लोगों को अलग-अलग भूमिका दी गई है।
- भारत में कौन देख रहा गिरोह?: भारत में दाऊद गैंग की काली करतूतों को अंजाम देने में सबसे बड़ी भूमिका छोटा शकील की है। रंगदारी से लेकर नकली नोटों का कारोबार हो गया अवैध वसूली- वह भारत में दाऊद का पूरा गिरोह चलाता है। भारत में दाऊद के सभी गुर्गे उसे अपना बॉस मानते हैं। दाऊद परिवार के लिए शकील को खोने का मतलब भारतीय बाजार को खोना था। आईएसआई की ओर से तय कॉरपोरेट ढांचे में शकील को भारत में डी-कंपनी चलाने का जिम्मा सौंपा गया है।
- विदेशी कारोबार: दाऊद के भाई अनीस इब्राहिम को दुनियाभर में फैले दाऊद के अवैध गिरोहों को चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पाकिस्तान के बाहर दाऊद गैंग का हवाला करोबार भी उसके जिम्मे किया गया है।
- वित्तीय प्रबंधन: दाऊद के दामाद जुनैद मियांदाद के बारे में कहा जाता है कि वह गिरोह की काली कमाई मैनेज करता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्लान के अनुसार उसे गिरोह का वित्त विभाग चलाने और दाऊद के काले पैसे का हिसाब-किताब रखने को कहा गया है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि दाऊद की पत्नी महजबीन अपने बेटे मोईन को डी-कंपनी के आतंकी नेटवर्क में टॉप पर पहुंचाना चाहती थी। लेकिन आएसआई ने फिलहाल इसे टाल दिया है। इस उत्तराधिकार योजना पर बातचीत के दौरान भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में फैले दाऊद के आतंकी नेटवर्क के सहयोगियों से परामर्श किया गया। आईएसआई के सूत्रों के अनुसार, गिरोह का कोई एक बॉस नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे अहम का टकराव हो सकता है और वे आपस में ही लड़ सकते हैं। ऐसे में यह तय किया गया है कि दाऊद की मौत के बाद भी दाऊद गिरोह उसी तरीके से काम करेगा जैसा खाका आईएसआई ने तैयार किया है।
आईएसआई के लिए दाऊद का गिरोह कितना जरूरी?
आईएसआई के लिए दाऊद आज भी पैसे की उगाही करने वाली सबसे बड़ी मशीन है। उसी से मिले काले पैसे का इस्तेमाल इंडियन मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को पालने के लिए किया जाता है। इसके बदले में आईएसआई सिंडिकेट को सुरक्षा और नशीले पदार्थों के टांसपोर्टेशन की अनुमति देती है। आईएसआई लॉजिस्टिक्स (रसद) व तस्करी के मार्गों को सुरक्षित रखने में मदद करती है। इस नई रणनीति से आईएसआई ने न केवल दाऊद सिंडिकेट को बिखरने से बचाया है, बल्कि अपने नापाक इरादों के लिए फंडिंग भी सुनिश्चित कर ली है।