Nuvama Report: दिसंबर में बिजली की मांग 6.8 प्रतिशत बढ़ी, तीसरी तिमाही में हालात और सुधरने के संकेत
दिसंबर 2025 में बिजली की मांग में 6.8% की बढ़ोतरी से वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही की कमजोरी कुछ हद तक कम हुई। हालांकि, बेमौसम बारिश और कम तापमान के कारण पूरी तिमाही में मांग थोड़ी घटी, लेकिन पीक डिमांड मजबूत बनी रही।
विस्तार
ब्रोकरेज फर्म नुवामा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 में बिजली मांग में सुधार देखने को मिला, जिससे वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के दौरान आई समग्र कमजोरी कुछ हद तक कम हुई। हालांकि, तिमाही के अधिकांश हिस्से में बेमौसम बारिश और अपेक्षाकृत कम तापमान के कारण बिजली मांग पर दबाव बना रहा।
बिजली की मांग वार्षिक आधार पर 6.8 प्रतिशत बढ़ी
रिपोर्ट में कहा गया है कि दिसंबर 2025 में बिजली की मांग साल-दर-साल आधार पर 6.8 प्रतिशत बढ़ी, जो तिमाही की कमजोर शुरुआत के बाद स्थिर सुधार का संकेत है। इसके साथ ही, नुवामा ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में अपने पावर सेक्टर कवरेज में शामिल कंपनियों के लिए मामूली मुनाफा वृद्धि का अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान में कमजोर थर्मल प्लांट लोड फैक्टर (PLF) के कारण मुनाफे की वृद्धि सीमित रह सकती है।
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तिमाही आधार पर मांग घटी
हालांकि, पूरी तिमाही को देखें तो बिजली मांग 0.4 प्रतिशत घट गई। इसका मुख्य कारण अक्तूबर में हुई बेमौसम बारिश और औसत तापमान का 23 डिग्री सेल्सियस रहना बताया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में औसत तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस था।
इसके बावजूद, पीक पावर डिमांड मजबूत बनी रही। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में अधिकतम मांग करीब 241 गीगावॉट तक पहुंच गई, जो पिछले साल की समान अवधि से 7.6 प्रतिशत अधिक है। यह उच्च मांग वाले समय में बिजली खपत की अंतर्निहित मजबूती को दर्शाता है।
थर्मल पावर का दबदबा बना रहा
उत्पादन के मोर्चे पर, थर्मल पावर का दबदबा बना रहा और वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कुल बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी करीब 77 प्रतिशत रही। हालांकि, विभिन्न यूटिलिटीज में प्लांट लोड फैक्टर अपेक्षाकृत कमजोर बना रहा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पावर एक्सचेंजों पर रुझान मिले-जुले रहे। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) पर दिसंबर 2025 में बिजली वॉल्यूम साल-दर-साल 3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में यह वृद्धि 12 प्रतिशत रही। हालांकि, रिन्यूएबल एनर्जी सर्टिफिकेट (REC) की कमजोर मांग के चलते कुल वॉल्यूम में गिरावट दर्ज की गई।
कीमतों के मोर्चे पर, सोलर घंटों के दौरान बिजली के दाम बढ़े, जबकि नॉन-सोलर घंटों में मांग और पीक डेफिसिट दोनों में इजाफा हुआ। इस बीच, कोयले की उपलब्धता में सुधार देखा गया। एनटीपीसी के संयंत्रों में कोयले का स्टॉक औसतन 18 दिन का रहा, जबकि कुल कोयला भंडार बढ़कर करीब 5.4 करोड़ टन पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 18 प्रतिशत अधिक है।
आगे की ओर देखते हुए, नुवामा को वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में पावर सेक्टर में सीमित लेकिन स्थिर मुनाफा वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही, रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े टेंडर मजबूत बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सोलर और स्टोरेज परियोजनाओं के नेतृत्व में करीब 350 गीगावॉट की परियोजनाओं की पाइपलाइन मौजूद है, जो आने वाले वर्षों में सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।