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ED Action: लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक पर ईडी का शिकंजा; ₹85 करोड़ के हेरफेर में गिरफ्तारी, जानें सबकुछ

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 12 Feb 2026 09:16 PM IST
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सार

ED Action: प्रवर्तन निदेशालय ने 85 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व निदेशक राजेंद्र लोढ़ा को गिरफ्तार किया है। जानें कैसे फर्जी कंपनियों और जमीन सौदों के जरिए की गई करोड़ों की हेराफेरी।

Enforcement Directorate Acton Updates Lodha Developers Ex Director Arrested by agency Know the full Details
समस्तीपुर में ईडी की छापेमारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

रियल एस्टेट सेक्टर की दिग्गज कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है।  प्रवर्तन निदेशालय ने कंपनी के पूर्व निदेशक राजेंद्र लोढ़ा को 85 करोड़ रुपये के धनशोधन मामले में गिरफ्तार कर लिया है। ईडी का आरोप है कि राजेंद्र लोढ़ा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कंपनी को करोड़ों का चूना लगाया और अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित की।

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जेल से ही लिया गया हिरासत में 
राजेंद्र लोढ़ा पहले से ही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एक अन्य मामले में पिछले साल सितंबर से न्यायिक हिरासत में थे। गुरुवार को ईडी ने उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश किया और औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को उन्हें रिमांड के लिए दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी की एफआईआर के आधार पर की गई है।
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क्या है पूरा मामला?
जांच में सामने आया है कि 2015 में कंपनी के निदेशक बने राजेंद्र लोढ़ा के पास केवल जमीन अधिग्रहण के सीमित अधिकार थे। लेकिन उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कई अनधिकृत सौदे किए।

  • पारिवारिक साजिश: ईडी का दावा है कि राजेंद्र ने अपने बेटे साहिल लोढ़ा और करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर कंपनी के पैसे के गबन की साजिश रची।
  • नकदी की हेराफेरी: फर्जी कब्जेदार दिखाए गए, मनगढ़ंत समझौते बनाए गए और कंपनी के फंड को नकद  में निकाला गया।
  • बेनामी संपत्ति: उन्होंने कंपनी के संसाधनों का इस्तेमाल अपने और परिवार के निजी लाभ के लिए किया और बिना किसी हक के अपने सहयोगियों को सस्ते में फ्लैट आवंटित किए।

10 करोड़ रुपये की जमीन मात्र 48 लाख रुपये में बेची 
घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू जमीनों की खरीद-फरोख्त में सामने आया है। ईडी ने बताया कि पनवेल में कंपनी की 4,150 वर्ग मीटर जमीन, जिसका बाजार मूल्य लगभग 10 करोड़ रुपये था, उसे एक फर्जी कंपनी को महज 48 लाख रुपये में बेच दिया गया। इससे कंपनी को सीधे तौर पर 9.50 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इसके अलावा, 'उषा प्रॉपर्टीज' और 'श्रीराम रियल्टीज' जैसी मुखौटा कंपनियों के जरिए पहले जमीन खरीदी गई और बाद में उसे लोढ़ा डेवलपर्स को बहुत ऊंची कीमतों पर बेचा गया।

मृत कर्मचारी के नाम पर भी फर्जीवाड़ा 
जांच एजेंसी को एक और गंभीर मामला मिला है। 2013 में कंपनी के कर्मचारी मंगेश पुराणिक के नाम पर जमीन खरीदी गई थी। मंगेश की मौत के बाद, उस जमीन को धोखे से लोढ़ा के सहयोगियों के नाम ट्रांसफर किया गया और फिर भारी मुनाफे पर वापस कंपनी को बेच दिया गया। ईडी के मुताबिक, इन सभी हथकंडों से कंपनी को कुल 85 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

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