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किसान क्रेडिट कार्ड में बदलाव: अब मिट्टी की जांच व मौसम की जानकारी के लिए भी लोन, जानें RBI के मसौदे में क्या

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 12 Feb 2026 08:27 PM IST
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सार

Kisan Credit Card New Draft Rules: आरबीआई ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के नियमों में बड़े बदलाव का मसौदा जारी किया है। इस पर आम लोगों से 6 मार्च तक राय मांगी गई गई है। इन मसौदा नियमों के अनुसार अब केसीसी के तहत ऋण की अवधि पांच की जगह छह वर्ष की जा सकती है। इसके अलावे, मिट्टी की जांच व मौसम से जुड़ी जानकारी जुटाने पर किया गया खर्च भी इसमें जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया है। आइए जानते हैं, नए मसौदा नियमों में क्या-क्या है खास।

RBI Kisan Credit Card KCC Revamp RBI Governor Sanjay Malhotra Crop Loan Farm Credit KCC Scheme 2026
भारतीय रिजर्व बैंक - फोटो : PTI
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विस्तार

देश में खेती-किसानी को अत्याधुनिक बनाने और किसानों की ऋण सीमा को यथार्थवादी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ी तैयारी की है। केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) स्कीम में बदलाव के लिए नया मसौदा जारी किया। आरबीआई के नए मसौदा नियमों के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड सिर्फ खाद-बीज खरीदने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें मिट्टी की जांच और मौसम पूर्वानुमानों से जुड़ी रिपोर्ट का खर्चा भी शामिल रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा की हालिया घोषणा के बाद केंद्रीय बैंक ने नए मसौदा नियम जारी किए हैं। 

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लोन की मियाद अब छह वर्ष करने का प्रस्ताव

भारतीय रिजर्व बैंक ने लोन चुकाने और फसल चक्र के नियमों में देशव्यापी एकरूपता लाने का प्रस्ताव दिया है। किसानों को बड़ी राहत देते हुए केसीसी की अवधि को बढ़ाकर छह वर्ष करने का प्रस्ताव किया गया है। इससे लंबी अवधिक की फसलों के लिए ऋण का तालमेल बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। केसीसी की वैधता अवधि फिलहाल पांच वर्ष है। फसल चक्र के बारे में भी आरबीआई मसौदा नियम में बदलाव किया गया है। शॉर्ट ड्यूरेशन फसलों के लिए 12 महीने और लॉन्ग ड्यूरेशन फसलों के लिए 18 महीने का मानक चक्र तय किया गया है। 

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खेती की असल लागत पर मिलेगा पैसा 

किसानों की शिकायत रहती थी कि केसीसी के तहत बैंक से मिलने वाली लोन की रकम खेत में लगने वाली लागत से कम होती है। रिजर्व बैंक ने प्रस्तावित मसौदा नियमों में इस परेशानी को भी दूर करने की कोशिश की है। इस विसंगति को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक ने प्रस्ताव दिया है कि इसके तहत आहरण की सीमा को फसल की 'स्केल ऑफ फाइनेंस' से सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि अब ऋण की रकम खेती की वास्तविक लागत अनुसार ही तय होगी। जिससे किसानों को पर्याप्त ऋण मिल सके।

अब स्मार्ट खेती का खर्च भी उठाएगा बैंक 

एआई के दौर में खेती के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। इसे देखते हुए आरबीआई ने केसीसी में भी इससे जुड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। ड्राफ्ट में पहली बार तकनीकी पहलुओं से जुड़े खर्च को ऋण के दायरे में लाया गया है। अब सॉइल टेस्टिंग, रियल-टाइम मौसम की जानकारी और ऑर्गेनिक खेती के सर्टिफिकेशन का खर्च भी 'पात्र व्यय' माना जाएगा। इन खर्चों को कृषि संपत्तियों की मरम्मत और रखरखाव के लिए मिलने वाले 20% अतिरिक्त घटक के भीतर कवर किया जाएगा।

6 मार्च तक आम लोगों से मांगी गई केसीसी पर राय

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि बदलावों का मकसद कृषि क्षेत्र की उभरती जरूरतों को पूरा करना और क्रेडिट कवरेज का विस्तार करना है। केंद्रीय बैंक ने इन प्रस्तावों पर बैंकों, विशेषज्ञों और आम जनता से 6 मार्च 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं।

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