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SBI Report: महंगाई के आंकड़ों पर सवाल; CPI के नए आधार वर्ष में चुनिंदा राज्यों का दबदबा, पेंच कहां जानें?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 13 Feb 2026 02:46 PM IST
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सार

एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, नए खुदरा महंगाई दर के नए इंडेक्स में यूपी और महाराष्ट्र का दबदबा 43% है, जिससे महंगाई के आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं। जानें क्या बदला है आपकी महंगाई की टोकरी में।

CPI Inflation India SBI Report New CPI Series 2024 Retail Inflation Core Inflation Indian Economy
खुदरा महंगाई दर - फोटो : ANI
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विस्तार

भारत में खुदरा महंगाई मापने के पैमाने यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में हाल ही में किए गए बदलावों ने अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का ध्यान खींचा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की नवीनतम रिपोर्ट ने सीपीआई के नए गणना तरीके में बाजारों के चयन पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नए इंडेक्स में शामिल किए गए नए बाजारों का वितरण भौगोलिक रूप से असंतुलित है, जिसमें उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का गैरवाजिब रूप में दबदबा है। यह गड़बड़ी देश की महंगाई की वास्तविक तस्वीर को धुंधला कर सकती है।

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बाजार के विस्तार में भारी असंतुलन
सरकार ने महंगाई के आंकड़ों को ज्यादा सटीक बनाने के लिए सीपीआई-2024 सीरीज पेश की है, जिसमें भौगोलिक कवरेज और वस्तुओं की संख्या बढ़ाई गई है। हालांकि, एसबीआई की रिपोर्ट इस विस्तार की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है:

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  • नए बाजारों पर निर्भरता: पुरानी 2012 की सीरीज के मुकाबले नई सीरीज में कुल 565 नए ग्रामीण और शहरी बाजारों को जोड़ा गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 565 नए बाजारों में से अकेले 43% हिस्सेदारी केवल दो राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से हैं। 
  • असंतुलित प्रतिनिधित्व: रिपोर्ट में साफ-साफ कहा गया है कि नए बाजारों प्रतिनिधित्व बहुत हद तक असमान है और यह कुछ खास राज्यों की ओर झुका हुआ है।" इसका सीधा मतलब है कि राष्ट्रीय महंगाई दर पर इन दो राज्यों की कीमतों का असर जरूरत से अधिक हो सकता है।

सीपीआई बास्केट से क्या बाहर क्या-अंदर?
महंगाई की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की टोकरी  को भी बदलते उपभोग पैटर्न के हिसाब से अपडेट किया गया है:

  • वस्तुओं की संख्या बढ़ी:नई सीरीज में वेटेड आइटम की कुल संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। इसमें वस्तुओं की संख्या 259 से 314 और सेवाओं की संख्या 40 से 50 हो गई है।
  • क्या जोड़ा गया: अब महंगाई के आंकड़ों में ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया/स्ट्रीमिंग सेवाएं, वैल्यू-एडेड डेयरी उत्पाद, जौ और इसके उत्पाद, पेनड्राइव, हार्ड डिस्क, बेबीसिटर और एक्सरसाइज इक्विपमेंट जैसी आधुनिक जरूरतें शामिल हैं।
  • क्या हटाया गया: वीसीआर/डीवीडी प्लेयर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, पुराने कपड़े और कैसेट्स जैसी अब प्रचलित न रहने वाली वस्तुओं को बाहर कर दिया गया है।

ई-कॉमर्स और शहरों के चयन में चूक
डिजिटल अर्थव्यवस्था को सीपीआई में शामिल करने के लिए सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 शहरों में 'ऑनलाइन मार्केट' प्राइस ट्रैकिंग शुरू की है। इसमें मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, सूरत, पुणे, जयपुर, लखनऊ और कानपुर को शमिल किया गया है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इसमें इंदौर, पटना, नागपुर, भोपाल और ठाणे जैसे तेजी से बढ़ते शहरों को छोड़ दिया गया है, जो जनसंख्या के लिहाज से 25 लाख के करीब हैं और जहां ऑनलाइन खपत तेजी से बढ़ रही है।

महंगाई के आंकड़ों पर असर
नई सीरीज के लागू होते ही आंकड़ों में बदलाव दिखने लगा है:

  • हेडलाइन इन्फ्लेशन: जनवरी 2026 में नई सीरीज के तहत सीपीआई महंगाई 2.75% रही, जो पुरानी सीरीज (लिंकिंग फैक्टर 0.5267 का उपयोग करने पर) के 2.55% की तुलना में अधिक है।
  • कोर इन्फ्लेशन में गिरावट: राहत की बात यह है कि जनवरी 2026 में नई सीरीज के तहत कोर इन्फ्लेशन (आधारभूत महंगाई दर) घटकर 3.4% रह गई, जो पुरानी सीरीज में लगभग 4.15% थी। इस गिरावट का मुख्य कारण सोने (सोने) के वेटेज को 2012 के 1.08% से घटाकर 2024 सीरीज में 0.62% करना है।

सीपीआई का नया आधार वर्ष निश्चित रूप से बदलते भारत की उपभोग से जुड़ी आदतों को बेहतर ढंग से दर्शाता है, खासकर स्ट्रीमिंग सेवाओं और ऑनलाइन बाजारों को शामिल करके। हालांकि, डेटा कलेक्शन प्वाइंट्स में कुछ राज्यों के अत्यधिक प्रतिनिधित्व और टियर-2 शहरों की अनदेखी से यह सवाल उठता है कि क्या यह इंडेक्स पूरे भारत की महंगाई का सही प्रतिनिधित्व कर पाएगा या नहीं।

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