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नए आंकड़े: क्या नई सीपीआई सीरीज में 4% के नीचे बनी रहेगी महंगाई, बीओबी ने कहा- सब्जियों और सोने ने बदला गणित

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 13 Feb 2026 03:37 PM IST
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सार

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट: नई सीपीआई सीरीज में बेहतर संतुलन से महंगाई 4% के नीचे रहेगी। जानें टमाटर, प्याज और सोने के नए वेटेज का आपकी जेब और अर्थव्यवस्था पर असर। आइए इस बारे में विस्तार से जानें। 

CPI Inflation India Bank of Baroda Report New CPI Series Retail Inflation TOP Vegetables Weightage
बैंक ऑफ बड़ौदा (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

महंगाई के मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा  की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई सीरीज के तहत खुदरा महंगाई दर के रिजर्व बैंक की ओर से तय किए गए 4% के लक्ष्य से नीचे बने रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की बास्केट में 'वेटेज' का जो नया संतुलन बनाया गया है, वह आंकड़ों को बेवजह की अस्थिरता से बचाएगा।

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बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट बताती है कि नई सीरीज का असर दिखना शुरू हो गया है। जनवरी 2026 में हेडलाइन सीपीआई 2.8% दर्ज की गई, जो बैंक के 2.9% के अनुमान के बेहद करीब है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि महंगाई के अधिकांश उप-घटकों में कोई बड़ा तनाव नहीं है। यह स्थिरता मौद्रिक नीति के फैसलों के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि नई सीरीज समकालीन और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जो भारत के बदलते उपभोग को बेहतर ढंग से कैप्चर करती है।
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टीओपी और गोल्ड का घटता दबदबा
पुरानी सीरीज में सब्जियों और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव अक्सर हेडलाइन महंगाई को बिगाड़ देता था। नई सीरीज में इसे सुधारा गया है:

टीओपी (टमाटर, प्याज, आलू): रिपोर्ट के अनुसार, नई सीरीज में इन तीन प्रमुख सब्जियों का वेटेज कम कर दिया गया है। इससे पहले की 2011-12 सीरीज में मौजूद पूर्वाग्रहों को खत्म करने में मदद मिली है, जो मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण से एक बड़ा कदम है।

सोना और आभूषण: नई सीरीज में सोने और अन्य आभूषणों को पुरानी सीरीज की तुलना में कम वेटेज दिया गया है। हालांकि, जनवरी के आंकड़ों में जो थोड़ी बहुत अस्थिरता देखी गई, वह मुख्य रूप से सोने की कीमतों से प्रेरित थी, लेकिन कम वेटेज के कारण इसका कुल प्रभाव सीमित रहा। आगे की राह भी सकारात्मक दिखाई दे रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा का इन-हाउस ट्रैकर (बीओबी ईसीआई) फरवरी 2026 के पहले 11 दिनों के लिए साल-दर-साल आधार पर -0.4% चल रहा है, जो कीमतों में नरमी का संकेत है। हालांकि, रिपोर्ट ने कुछ चिंताओं को भी रेखांकित किया है जिन पर नजर रखने की जरूरत है:

खाद्य तेल और दालें: मूंगफली, सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे खाद्य तेलों और अरहर व उड़द जैसी दालों को छोड़कर, उच्च आवृत्ति वाले खाद्य मूल्यों में कोई तत्काल जोखिम नहीं है।

कोर इन्फ्लेशन
रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि कीमती धातुओं की कीमतें कोर इन्फ्लेशन के लिए एक 'अपसाइड रिस्क' पैदा कर सकती हैं, इसलिए इसकी निगरानी जरूरी है।

कुल मिलाकर, बैंक ऑफ बड़ौदा का विश्लेषण यह भरोसा दिलाता है कि नई सीपीआई सीरीज न केवल भारत के बदलते उपभोग पैटर्न के अनुरूप है, बल्कि यह एक अधिक संतुलित और समग्र तस्वीर पेश करती है। वस्तुओं के बेहतर संतुलन के कारण, महंगाई दर के 4% (दो प्रतिशत अधिक या कम) के दायरे में ही रहने की उम्मीद है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरों पर निर्णय लेने में अधिक स्पष्टता मिलेगी।

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