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ईयू का कार्बन कर आज से लागू: भारतीय स्टील-एल्युमीनियम निर्यातकों पर दबाव,15% तक घटानी पड़ सकती हैं कीमतें

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 01 Jan 2026 06:14 AM IST
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सार

यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म 1 जनवरी 2026 से लागू हो गया है। इससे भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम निर्यातकों पर कीमतें घटाने का दबाव बढ़ेगा।

EU Carbon Tax Comes Into Force: Big Challenge for Indian Steel and Aluminium Exporters
कार्बन कर आज से लागू - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
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विस्तार
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यूरोपीय संघ (ईयू) का कुछ धातुओं पर कार्बन कर (सीबीएएम) एक जनवरी, 2026 से लागू होने जा रहा है। यह भारत के एल्युमीनियम एवं इस्पात निर्यातकों के लिए बड़ा झटका है। आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने बुधवार को कहा, यूरोपीय संघ के इस कदम से कई भारतीय निर्यातकों को कीमतों में 15 से 22 फीसदी तक की कटौती करनी पड़ सकती है, ताकि ईयू के आयातक उसी मुनाफे (मार्जिन) से सीबीएएम कर का भुगतान कर सकें। कीमतों में कटौती करना प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए भी जरूरी है। 

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हालांकि, भारतीय निर्यातकों को सीधे तौर पर कार्बन कर का भुगतान नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि यूरोपीय संघ स्थित आयातकों (जो अधिकृत सीबीएएम घोषणाकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं) को आयातित वस्तुओं में निहित उत्सर्जन से संबंधित सीबीएएम प्रमाणपत्र खरीदने होंगे। इसका भार अंततः भारतीय निर्यातकों को ही उठाना पड़ेगा।
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दरअसल, 27 देशों का समूह यूरोपीय संघ उन वस्तुओं पर कार्बन कर लगा रहा है, जिनके निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन होता है। इस्पात क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेस-बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस मार्ग में उत्सर्जन सबसे अधिक होता है, जबकि गैस आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) में यह कम एवं कबाड़ आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस में सबसे कम होता है। इसी तरह, एल्युमीनियम में बिजली का स्रोत एवं ऊर्जा की खपत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोयले से उत्पादित बिजली से कार्बन बोझ बढ़ता है, जिससे सीबीएएम लागत भी अधिक होती है। एजेंसी

ईयू बाजार से बाहर हो सकते हैं छोटे निर्यातक
जीटीआरआई संस्थापक ने कहा, एक जनवरी 2026 से ईयू में प्रवेश करने वाली भारतीय इस्पात एवं एल्युमीनियम की हर खेप पर कार्बन लागत जुड़ेगी, क्योंकि सीबीएएम रिपोर्टिंग चरण से भुगतान चरण में प्रवेश करेगा। जटिल आंकड़ा और सत्यापन प्रक्रियाओं की वजह से अनुपालन लागत बढ़ेगी, जिससे कई छोटे निर्यातक ईयू बाजार से बाहर हो सकते हैं। जीटीआरआई संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, भारत और ईयू के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत में भी कार्बन कर एक अहम मुद्दा है।

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