{"_id":"696d8943e250a728930ec08a","slug":"eu-trade-agreement-will-boost-textile-pharmaceutical-and-chemical-exports-big-announcement-on-27-jan-2026-01-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"EU Trade Agreement: ईयू व्यापार समझौते से कपड़ा, फार्मा-केमिकल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, 27 जनवरी को अहम घोषणा","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
EU Trade Agreement: ईयू व्यापार समझौते से कपड़ा, फार्मा-केमिकल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, 27 जनवरी को अहम घोषणा
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: लव गौर
Updated Mon, 19 Jan 2026 07:00 AM IST
विज्ञापन
सार
ईयू व्यापार समझौते से कपड़ा, फार्मा व केमिकल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे में 27 जनवरी को समझौते के बातचीत के निष्कर्ष की घोषणा हो सकती है।
ईयू व्यापार समझौता
- फोटो : एएनआई
विज्ञापन
विस्तार
भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते से वस्त्र, फार्मा, केमिकल, इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषणों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। समझौते के लिए बातचीत के निष्कर्ष की घोषणा 27 जनवरी को होने की संभावना है। उद्योग का अनुमान है कि मुक्त व्यापार समझौते के कारण टैरिफ चरणबद्ध तरीके से समाप्त होने से अगले तीन वर्षों में यूरोपीय संघ को निर्यात दोगुना हो जाएगा।
निर्यातकों ने कहा, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हमें एक स्थिर और पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करेगा। इससे भारतीय कंपनियां लंबे समय के निवेश की योजना बना सकेंगी। यूरोपीय मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हो सकेंगी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद बाजार तक पहुंच सुरक्षित कर सकेंगी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा, यह एफटीए किसी एक बाजार पर हमारी निर्भरता को कम करने के मामले में गेम चेंजर साबित होगा। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ बहुत अधिक होने के कारण घरेलू निर्यातकों को एक प्रमुख बाजार में उच्च लागत और कम प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो भारतीय निर्यातकों को निर्यात बाजार में विविधता लाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
शक्तिवेल ने कहा, समझौते के दौरान लगातार हुई वार्ताओं में उन क्षेत्रों पर जोर दिया गया है जहां यूरोपीय संघ में भारत की निर्यात उपस्थिति मजबूत है। वस्त्र और परिधान, फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद और केमिकल इन चर्चाओं के केंद्र में हैं। यूरोपीय संघ में वस्त्र और परिधान पर वर्तमान में 12-16 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। इससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाती है। यूरोपीय संघ में तैयार वस्त्रों पर औसत आयात शुल्क 12 प्रतिशत है। यह यूरोपीय संघ की सामान्यीकृत वरीयता योजना (अब डीसीटीएस) के तहत भारत को मिलने वाली तरजीही पहुंच के कारण 9.6 प्रतिशत के बराबर हो जाता है।
बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक ईयू
यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। यह भारत के माल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत और सेवाओं के व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, यूरोपीय संघ के साथ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने से अन्य जगहों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में टैरिफ दबावों के विपरीत प्रभावों को आंशिक रूप से कम किया जा सकेगा। इससे भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति मजबूत होगी। इस समझौते से लाभान्वित होने वाले प्रमुख सेवा क्षेत्रों में आईटी, कानूनी सेवाएं, परामर्श, लेखांकन और प्रबंधन शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार 2024-25 में लगभग 136.5 अरब डॉलर था।
सभी व्यापारिक समझौतों की होगी जननी
भारत 27 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह और 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में एक ऐसे समझौते की नींव रखी जा रही है जो इस दशक के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। यदि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा के दौरान यह समझौता संपन्न हो जाता है, तो लंबे समय से लंबित भारत-यूरोपीय संघ एफटीए न केवल दोनों साझेदारों के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए भी एक रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक मोड़ साबित होगा। यह अब तक के सभी समझौतों की जननी होगी।
घरेलू चमड़ा उद्योग उठाए लाभ.
कानपुर स्थित ग्रोमोर इंटरनेशनल के एमडी यादवेंद्र सिंह सचान ने कहा, घरेलू चमड़ा निर्यातकों को इस अवसर का लाभ उठाकर निर्यात में तेज वृद्धि करनी चाहिए। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने कहा, अमेरिकी टैरिफ में भारी वृद्धि से निर्यात के विभिन्न क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है। यह निर्यात बाजारों और व्यापार रणनीतियों के विविधीकरण की जरूरत को दिखाता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ब्राजील-नाइजीरिया भारतीय दवा कंपनियों के प्रमुख निर्यात गंतव्य बने
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ब्राजील और नाइजीरिया भारतीय दवा कंपनियों के लिए प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नाइजीरिया सबसे तेजी से बढ़ते गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। इसने चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में निर्यात में 17.9 करोड़ डॉलर की वृद्धि दर्ज की और कुल निर्यात वृद्धि में 14 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया।
आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल-नवंबर के दौरान ब्राजील में भी निर्यात में लगभग 10 करोड़ डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। एक अधिकारी ने कहा, ये बाजार स्वास्थ्य सेवा तक बढ़ती पहुंच, सार्वजनिक खरीद के विस्तार और भारतीय जेनेरिक दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाते हैं, जो उच्च विकास मांग वाले क्षेत्रों में पसंदीदा आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करते हैं। देश के दवा निर्यात में अप्रैल-नवंबर के दौरान 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 20.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ये भी पढ़ें: CII: सीआईआई का व्यापार विश्वास सूचकांक लगातार तीसरी तिमाही में बढ़कर 66.5 पर, पांच तिमाहियों में सबसे ज्यादा
आंकड़ों से यह भी पता चला है कि अमेरिका सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है। अप्रैल-नवंबर के दौरान निर्यात में 31 प्रतिशत से अधिक का इसका हिस्सा था। अमेरिका के साथ फ्रांस, नीदरलैंड, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी लगातार वृद्धि दर्ज की है, जो सामूहिक रूप से निर्यात विस्तार में योगदान देते हुए स्थिर हिस्सेदारी बनाए रखते हैं। विशेष रूप से, नीदरलैंड ने निर्यात में 5.8 करोड़ डॉलर से अधिक की वृद्धि की है, जो यूरोपीय फार्मा वितरण नेटवर्क में भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।
Trending Videos
निर्यातकों ने कहा, मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) हमें एक स्थिर और पूर्वानुमानित ढांचा प्रदान करेगा। इससे भारतीय कंपनियां लंबे समय के निवेश की योजना बना सकेंगी। यूरोपीय मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हो सकेंगी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद बाजार तक पहुंच सुरक्षित कर सकेंगी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष ए शक्तिवेल ने कहा, यह एफटीए किसी एक बाजार पर हमारी निर्भरता को कम करने के मामले में गेम चेंजर साबित होगा। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ बहुत अधिक होने के कारण घरेलू निर्यातकों को एक प्रमुख बाजार में उच्च लागत और कम प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है, जो भारतीय निर्यातकों को निर्यात बाजार में विविधता लाने के लिए प्रेरित कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शक्तिवेल ने कहा, समझौते के दौरान लगातार हुई वार्ताओं में उन क्षेत्रों पर जोर दिया गया है जहां यूरोपीय संघ में भारत की निर्यात उपस्थिति मजबूत है। वस्त्र और परिधान, फार्मा, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद और केमिकल इन चर्चाओं के केंद्र में हैं। यूरोपीय संघ में वस्त्र और परिधान पर वर्तमान में 12-16 प्रतिशत आयात शुल्क लगता है। इससे भारतीय वस्तुओं की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाती है। यूरोपीय संघ में तैयार वस्त्रों पर औसत आयात शुल्क 12 प्रतिशत है। यह यूरोपीय संघ की सामान्यीकृत वरीयता योजना (अब डीसीटीएस) के तहत भारत को मिलने वाली तरजीही पहुंच के कारण 9.6 प्रतिशत के बराबर हो जाता है।
बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक ईयू
यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। यह भारत के माल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत और सेवाओं के व्यापार में महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है। फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, यूरोपीय संघ के साथ टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने से अन्य जगहों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में टैरिफ दबावों के विपरीत प्रभावों को आंशिक रूप से कम किया जा सकेगा। इससे भारत की वैश्विक व्यापार उपस्थिति मजबूत होगी। इस समझौते से लाभान्वित होने वाले प्रमुख सेवा क्षेत्रों में आईटी, कानूनी सेवाएं, परामर्श, लेखांकन और प्रबंधन शामिल हैं। भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय माल व्यापार 2024-25 में लगभग 136.5 अरब डॉलर था।
सभी व्यापारिक समझौतों की होगी जननी
भारत 27 जनवरी को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह और 16वें भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के लिए यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में एक ऐसे समझौते की नींव रखी जा रही है जो इस दशक के सबसे महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। यदि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की यात्रा के दौरान यह समझौता संपन्न हो जाता है, तो लंबे समय से लंबित भारत-यूरोपीय संघ एफटीए न केवल दोनों साझेदारों के लिए बल्कि वैश्विक व्यापार प्रणाली के लिए भी एक रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक मोड़ साबित होगा। यह अब तक के सभी समझौतों की जननी होगी।
घरेलू चमड़ा उद्योग उठाए लाभ.
कानपुर स्थित ग्रोमोर इंटरनेशनल के एमडी यादवेंद्र सिंह सचान ने कहा, घरेलू चमड़ा निर्यातकों को इस अवसर का लाभ उठाकर निर्यात में तेज वृद्धि करनी चाहिए। भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) ने कहा, अमेरिकी टैरिफ में भारी वृद्धि से निर्यात के विभिन्न क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है। यह निर्यात बाजारों और व्यापार रणनीतियों के विविधीकरण की जरूरत को दिखाता है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ब्राजील-नाइजीरिया भारतीय दवा कंपनियों के प्रमुख निर्यात गंतव्य बने
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ब्राजील और नाइजीरिया भारतीय दवा कंपनियों के लिए प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नाइजीरिया सबसे तेजी से बढ़ते गंतव्यों में से एक बनकर उभरा है। इसने चालू वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में निर्यात में 17.9 करोड़ डॉलर की वृद्धि दर्ज की और कुल निर्यात वृद्धि में 14 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया।
आंकड़ों से पता चला है कि अप्रैल-नवंबर के दौरान ब्राजील में भी निर्यात में लगभग 10 करोड़ डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई। एक अधिकारी ने कहा, ये बाजार स्वास्थ्य सेवा तक बढ़ती पहुंच, सार्वजनिक खरीद के विस्तार और भारतीय जेनेरिक दवाओं पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाते हैं, जो उच्च विकास मांग वाले क्षेत्रों में पसंदीदा आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करते हैं। देश के दवा निर्यात में अप्रैल-नवंबर के दौरान 6.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 20.48 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
ये भी पढ़ें: CII: सीआईआई का व्यापार विश्वास सूचकांक लगातार तीसरी तिमाही में बढ़कर 66.5 पर, पांच तिमाहियों में सबसे ज्यादा
आंकड़ों से यह भी पता चला है कि अमेरिका सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है। अप्रैल-नवंबर के दौरान निर्यात में 31 प्रतिशत से अधिक का इसका हिस्सा था। अमेरिका के साथ फ्रांस, नीदरलैंड, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों ने भी लगातार वृद्धि दर्ज की है, जो सामूहिक रूप से निर्यात विस्तार में योगदान देते हुए स्थिर हिस्सेदारी बनाए रखते हैं। विशेष रूप से, नीदरलैंड ने निर्यात में 5.8 करोड़ डॉलर से अधिक की वृद्धि की है, जो यूरोपीय फार्मा वितरण नेटवर्क में भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।