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भारत का बेहतरीन समय: यह तुक्का नहीं, तपस्या है; जानें राज्यसभा में वित्त मंत्री महंगाई व जीडीपी पर क्या बोलीं

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Thu, 12 Feb 2026 05:35 PM IST
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सार

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में बजट पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने बजट में लघु  मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए समर्थन पर जोर दिया। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

Finance Minister Nirmala Sitharaman replies to budget 2026 debate in Rajya Sabha Business News in Hindi
राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय उस मुकाम पर खड़ी है, जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'दुर्लभ संतुलन' कहा जाता है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में बजट चर्चा का जवाब देते हुए यह बात ही। उन्होंने कहा कि देश में मजबूत जीडीपी वृद्धि और ऐतिहासिक रूप से कम मुद्रास्फीति का दौर कोई संयोग या 'तुक्का' नहीं है। उन्होंने इसे सरकार की बारीक योजना, अथक प्रयास और समयबद्ध कार्रवाई का नतीजा बताया। सीतारमण ने जोर देकर कहा कि बजट 2026-27 भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की नींव को और मजबूत करेगा।

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जीडीपी 7.4% और महंगाई 2%: आंकड़ों की जुबानी वित्त मंत्री ने सदन में आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष रखा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले अग्रिम अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4% रहने का अनुमान है, जबकि नॉमिनल ग्रोथ लगभग 8% रहेगी। सबसे बड़ी राहत महंगाई के मोर्चे पर है, जहां सीपीआई मुद्रास्फीति घटकर लगभग 2% के स्तर पर आ गई है। सीतारमण ने इसे भारत का "स्वर्णमय क्षण" करार दिया।
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एमएसएमई को बूस्टर डोज
लघु एवं मध्यम उद्यमों को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इनके लिए खजाना खोल दिया गया है।

  • नया फंड: एसएमई विकास कोष के लिए बजट में 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
  • क्लस्टर रिवाइवल: सरकार ने देश भर में 200 पुराने औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार की योजना बनाई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन कदमों का सीधा असर रोजगार सृजन और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने पर पड़ेगा।
  • मिशन 2047: सर्विस सेक्टर में 10% ग्लोबल हिस्सेदारी पर नजर सरकार ने सर्विस सेक्टर के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि 2047 तक वैश्विक सेवा बाजार में भारत की हिस्सेदारी 10% करने का लक्ष्य है। इसके लिए:
  • एक उच्च स्तरीय 'शिक्षा से रोजगार' समिति का गठन किया जा रहा है।
  • यह समिति आईटी, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और एआईजैसे क्षेत्रों पर फोकस करेगी।
  • हेल्थकेयर में मौके: अगले 5 वर्षों में 1 लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार किया जाएगा। इसके लिए इस वर्ष 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

यूपीए के मुकाबले फंड का बेहतर इस्तेमाल 
बजट चर्चा के दौरान विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सीतारमण ने फंड के इस्तेमाल पर यूपीए सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने बताया कि पिछले 10 वर्षों में 14 सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में केवल 37,000 करोड़ रुपये खर्च नहीं हो पाए, जबकि यूपीए के कार्यकाल में यह आंकड़ा 94,000 करोड़ रुपये था। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे बजट में घोषित योजनाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और किसी भी राज्य के फंड को नहीं रोका गया है।

वित्त मंत्री ने अपने भाषण के अंत में ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को भविष्य की योजना का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल एक साल का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि अगले दो दशकों की विकास यात्रा का रोडमैप है।निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में कहा कि 7.4% जीडीपी और 2% महंगाई का संतुलन कोई तुक्का नहीं है। एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ और सर्विस सेक्टर में 10% ग्लोबल शेयर का लक्ष्य रखा गया है।

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