Retail Inflation: जनवरी में 2.75% रही खुदरा महंगाई दर, सरकार ने बदला मुद्रास्फीति नापने का तरीका
जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 2.75% रही। सरकार ने सीपीआई का बेस ईयर 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। जानिए महंगाई की नई बास्केट में क्या जुड़ा और क्या हटा।
विस्तार
आम आदमी के लिए नए साल की शुरुआत में राहत भरी खबर आई है। जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 2.75% दर्ज की गई है। यह आंकड़े इसलिए खास हैं क्योंकि सरकार ने महंगाई मापने का पैमाना यानी 'बेस ईयर' बदल दिया है। अब 2012 की जगह साल 2024 को आधार मानकर महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं।
अब नए तरीके से नापी जाएगी आपकी जेब महंगाई की मार
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में बड़ा बदलाव किया है। सरकार का कहना है कि पिछले एक दशक में लोगों के खर्च करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है, इसलिए पुराने पैमाने को अपडेट करना जरूरी था। नए इंडेक्स का ढांचा 'घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24' पर आधारित है।
महंगाई की टोकरी से वीसीआर बाहर, पेन ड्राइव और ओटीटी अंदर
महंगाई की गणना जिस 'सामान की टोकरी' के आधार पर होती है, उसमें बड़े बदलाव किए गए हैं।
- क्या बाहर हुआ: वीसीआर, वीसीडी/डीवीडी प्लेयर, रेडियो, टेप रिकॉर्डर, पुराने कपड़े और कैसेट्स को बाहर कर दिया गया है क्योंकि अब इनका इस्तेमाल न के बराबर होता है।
- क्या शामिल हुआ: अब महंगाई की लिस्ट में ऑनलाइन मीडिया और स्ट्रीमिंग सर्विस (ओटीटी), पेन ड्राइव, एक्सटर्नल हार्ड डिस्क, बेबीसिटर (आया), एक्सरसाइज इक्विपमेंट और ग्रामीण आवास को जोड़ा गया है। यह बदलाव डिजिटल होती दुनिया और बदलती लाइफस्टाइल को दिखाता है।
शहरों के मुकाबले गांवों में थोड़ी कम महंगाई नए आंकड़ों के मुताबिक, महंगाई अभी काबू में नजर आ रही है:
- कुल महंगाई: 2.75%
- ग्रामीण महंगाई: 2.73%
- शहरी महंगाई: 2.77%
- खाद्य महंगाई: खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर राष्ट्रीय स्तर पर 2.13% रही।
- हाउसिंग: आवास से जुड़ी महंगाई 2.05% दर्ज की गई।
क्या होगा असर?
बेस ईयर बदलने का मतलब सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं है। इसमें अलग-अलग कैटेगरी के 'वेटेज' (महत्व) को बदला गया है। जानकारों का मानना है कि नए बेस ईयर (2024) से नीति निर्माताओं और आरबीआई को ज्यादा सटीक डेटा मिलेगा, जिससे भविष्य में आर्थिक फैसले लेने में आसानी होगी।