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ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: केंद्र ने ग्रीन अमोनिया और मेथनॉल के लिए नए मानक तय किए, जानिए सरकार ने क्या बताया

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 07 Mar 2026 04:34 PM IST
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सार

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के नए मानक अधिसूचित किए हैं। इन मानकों में उत्सर्जन की अधिकतम सीमा तय की गई है, ताकि इन्हें ग्रीन श्रेणी में रखा जा सके। आइए विस्तार से जानते हैं। 

Green Hydrogen Mission: Centre sets new standards for green ammonia and methanol, know what gov said
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद
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विस्तार

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को गति देने के लिए शनिवार को ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए नए मानक अधिसूचित किए। इन मानकों का उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन से बनने वाले ईंधन के व्यापार और उपयोग को बढ़ावा देना है।

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  • नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अनुसार, ये मानक 27 फरवरी 2026 को अधिसूचित किए गए हैं।
  • इनमें यह तय किया गया है कि किन शर्तों और उत्सर्जन सीमा के तहत अमोनिया और मेथनॉल को ग्रीन श्रेणी में रखा जाएगा।
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  • राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को 4 जनवरी 2023 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
  • इसके लिए 19,744 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट रखा गया है।
  • इसका लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

 

क्या है सरकार के मानक?

  • सरकार द्वारा जारी मानकों के अनुसार, ग्रीन अमोनिया के उत्पादन में कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 0.38 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • इसमें ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और साइट पर भंडारण से होने वाला उत्सर्जन शामिल होगा, जिसे पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर मापा जाएगा।
  • इसी तरह, ग्रीन मेथनॉल के लिए उत्सर्जन सीमा 0.44 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम मेथनॉल निर्धारित की गई है। इसमें ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मेथनॉल संश्लेषण, शुद्धिकरण और भंडारण से होने वाला कुल गैर-जैविक उत्सर्जन शामिल रहेगा।
  • सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन में उपयोग होने वाला कार्बन डाइऑक्साइड जैविक स्रोतों, डायरेक्ट एयर कैप्चर या मौजूदा औद्योगिक स्रोतों से लिया जा सकता है।
  • मंत्रालय समय-समय पर CO₂ के पात्र स्रोतों में संशोधन भी कर सकता है।
  • इसके अलावा, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन की विस्तृत प्रक्रिया अलग से जारी की जाएगी।


सरकार का कहना है कि इन मानकों से उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को स्पष्ट दिशा मिलेगी और ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ईंधन के विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन में भी मदद मिलेगी।

सरकार के अनुसार, इन मानकों के लागू होने से ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत का नियामकीय ढांचा और मजबूत होगा तथा देश ग्रीन ईंधन के विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा।


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