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Infrastructure: सरकार का बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर, घाटा नियंत्रित रखते हुए निवेश को मिल रहा बढ़ावा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Sat, 07 Mar 2026 05:09 PM IST
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सार

वित्त मंत्रालय की फरवरी 2026 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, सरकार वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है। अप्रैल-जनवरी के दौरान पूंजीगत व्यय 11.2% बढ़ा है, जबकि राजस्व खर्च सीमित रहा। 

The government's emphasis on infrastructure development is boosting investment while keeping the deficit under
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार

वित्त मंत्रालय की फरवरी 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, केंद्र सरकार खर्च और घाटे को नियंत्रित रखते हुए बुनियादी ढांचे पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही है, ताकि आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सके।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की वित्तीय नीति इस तरह बनाई जा रही है कि आर्थिक स्थिरता बनी रहे और साथ ही सड़कों, रेल, ऊर्जा जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य उत्पादक परिसंपत्तियों में निवेश जारी रहे।

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पूंजीगत व्यय को लेकर रिपोर्ट में क्या?

समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से जनवरी के बीच पूंजीगत व्यय में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 
वहीं राजस्व व्यय में केवल 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जिससे पता चलता है कि सरकार बुनियादी ढांचा निर्माण को प्राथमिकता दे रही है।

राजकोषीय घाटा को लेकर बड़ा दावा

वित्त मंत्रालय ने बताया कि बेहतर राजस्व संग्रह और खर्च के बेहतर प्रबंधन की वजह से इस साल सरकार के राजकोषीय संकेतकों में सुधार हुआ है। जनवरी तक राजकोषीय घाटा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम रहा।


समीक्षा में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भी यही रणनीति जारी रहेगी। सरकार आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए पूंजीगत व्यय को जारी रखते हुए वित्तीय अनुशासन पर भी ध्यान दे रही है।

राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखा है। इसका मतलब है कि सरकार धीरे-धीरे घाटा कम करने के साथ-साथ विकास के लिए निवेश भी जारी रखेगी।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा और लंबे समय में आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी। साथ ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि, नियंत्रित महंगाई और सुधारों के कारण स्थिर बनी हुई है।

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