Silver Prices: एआई और डिजिटल होती दुनिया का सर्राफा बाजार पर हो रहा क्या असर? जानें विशेषज्ञों की राय
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, डिजिटलीकरण, एआई और डेटा सेंटर की बढ़ती जरूरत से चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि सीमित आपूर्ति और अनिश्चित नीतियों के कारण 2026 में भी सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
विस्तार
सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव लगातार जारी हैं। इसकी मुख्य वजह अस्थिर वैश्विक भू-राजनीति और व्यापारिक तनाव है। लेकिन इसके अलावा भी कई और कारणों की वजह से भी इन कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखा गया। इसमें चांदी ने पिछले कई वर्षों से निवेशकों और रिटेल खरीदारी को चौकाया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक तेजी से डिजिटलाइजेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के विस्तार और डेटा सेंटर व आईटी इंफ्रास्टक्चर में वृद्धि होने से चांदी की मांग 2026 में भी बनी रहेगी। हालांकि कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
एआई, आईटी बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रिक सिस्टम चांदी की मांग
जिन प्रमुख कारकों ने 2025 में चांदी की कीमतों को बढ़ाया वहीं प्रमुख कारक 2026 में भी इन्हें बढ़ाने का काम करेंगे। तेजी से डिजिटलीकरण, एआई के विस्तार और डेटा केंद्रों व आईटी बुनियादी ढांचे के साथ कंप्यूटिंग और इलेक्ट्रिक सिस्टम में चांदी का इस्तेमाल बढ़ने से इसकी मांग बढ़ रही है।
वहीं दूसरी ओर चांदी की सीमित भौतिक आपूर्ति, भू-राजनीतिक अस्थिरिता और अमेरिकी व्यापार नीतियों की अनिश्चितता की वजह से बुलियन में सुरक्षित निवेश के आकर्षण को बनाए रखा है। जबकि सोने में मजबूती से चांदी के लिए गिरावट के रिस्क को कम करने में मदद मिलेगी, भले ही जल्द ही कीमतों में अधिक उतार-चढ़ाव की संभावना है।
2026 की शुरुआत में चांदी स्पॉट ने नया रिकॉर्ड बनाया
जियोजित इंवेस्टमेंट के अनुसार 2025 में शानदार 146 प्रतिशत का रिटर्न देने के बाद, जनवरी में चांदी कई ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई और पहली बार 100 अमेरिकी डॉलर के मुख्य मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर चली गई। इस तेज बढ़त ने सोन और चांदी के रेश्यों को 50 से अधिक कर दिया, जो 2012 के बाद इसका सबसे निचला स्तर है। हालांकि चांदी बाद में 63.00 के करीब वापस आ गई। 2025 में चांदी की कीमतों को बढ़ाने वाले कारक इस साल 2026 में भी मजबूत बने हुए हैं। जिसमें लंदन में भौतिक आपूर्ति में कमी, भू-राजनीतिक उतार-चढ़ाव, अमेरिका में पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता कीमती धातु को सहारा दे रहे हैं। इसके अलावा चांदी की फंडामेंटल आपूर्ति और मांग का संतुलन कंस्ट्रक्विट बना हुआ है।
चांदी की कहानी तीन चरणों में आगे बढ़ी
सैमको सिक्योरिटीज के अनुसार 2023 से अब तक चांदी की कहानी तीन चरणों में आगे बढ़ी है।
- पहला चरण अक्युमुलेशन यानी बड़े निवेशकों की खरीदारी, उस समय चांदी सस्ती थी और यह चर्चा में नहीं थी, लेकिन तकनीकी रूप से मजबूत स्थिति में थी।
- दूसरा चरण की शुरुआत तब हुई जब घरेलू बाजार में चांदी की कीमतें 78,000 रुपये प्रति किलो और बाद में एक लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर पहुंच गईं।
- तीसरे चरण जो अभी चल रहा है, इसे स्ट्रक्चरल बुल मार्केट कहा जा सकता है। यहां औद्योगिकी मांग, लेकिन आपूर्ति में कमी और सिल्वर ईटीएफ में बढ़ते निवेश से यह मूव अधिक व्यापक हो गया है।
रिटेल निवेशकों लंबी अवधि के लिए निवेश की रणनीति और उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहे
सैमको सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को लंबी अवधि के लिए अपना नजरिया रखना चाहिए। निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और संतुलित एसेट एलोकेशन करें। क्योंकि जब डॉलर कमजोर होता है और लिक्विडिटी बेहतर होती है, तब चांदी अच्छा प्रदर्शन करती है। अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश करने की जरूरत है, साथ ही बीच-बीच में कीमतों में उतार-चढ़ाव तैयार रहना भी जरूरी है।