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US Tariffs: टैरिफ से राजस्व की जिद पर अड़े हैं ट्रंप, क्या US सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उभरते बाजारों को राहत?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 26 Feb 2026 12:46 PM IST
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सार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की ओर से टैरिफ को रद्द करने के फैसले से वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता कम होने की उम्मीद है। इससे भारत सहित उभरते बाजारों को फायदा मिल सकता है। जेएम फाइनेंशियल के अनुसार, इससे डॉलर पर दबाव और रुपये को सहारा मिल सकता है, हालांकि अमेरिकी प्रशासन के वैकल्पिक टैरिफ कदम अंतिम प्रभाव तय करेंगे।

Trump insists on revenue from tariffs. Will the US Supreme Court's decision provide relief to emerging markets
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया रद्द - फोटो : AI/ANI/AmarUjala
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विस्तार

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की ओर से ट्रंप के टैरिफ उपायों को रद्द किए जाने का असर वैश्विक व्यापार और उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर सकारात्मक माना जा रहा है। ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला भारत सहित उभरते बाजारों के लिए राहतभरा हो सकता है और रुपये पर डॉलर के मुकाबले पड़ने वाले दबाव को भी कुछ हद तक कम कर सकता है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में कहा था कि समय के साथ टैरिफ से मिलने वाला राजस्व इनकम टैक्स की जगह ले सकता है और इसके लिए कांग्रेस की अतिरिक्त कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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टैरिफ के हथियार की तरह इस्तेमाल का प्रभाव होगा कम

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोर्ट के इस फैसले से वैश्विक व्यापार वातावरण अधिक पूर्वानुमेय बनने की संभावना है, क्योंकि टैरिफ के हथियार की तरह इस्तेमाल का प्रभाव कम होगा। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार गतिविधियों में स्थिरता आएगी और भारत जैसे देशों को फायदा मिल सकता है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रंप की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शंक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ को निरस्त कर दिया। इसे वैश्विक व्यापार नीति के लिहाज से एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, फैसले के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू किया, जिसे बाद में बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया, ताकि रद्द किए गए शुल्क की भरपाई की जा सके।

अमेरिकी कोर्ट का फैसला प्रभावि रहा तो आगे क्या?

जेएम फाइनेंशियल का मानना है कि अगर कोर्ट के मूल फैसले को प्रभावी रूप से लागू रहने दिया जाता है, तो इससे वैश्विक व्यापार नीतियों में स्पष्टता आएगी और उभरती अर्थव्यस्थाओं, खासकर भारत, को लाभ होगा। रिपोर्ट के अनुसार, पहले आयात पर औसत टैरिफ दर लगभग 16 प्रतिशत थी, जो इस फैसले के बाद घटकर करीब 9 प्रतिशत तक आ सकती है। हालांकि, अगर वैकल्पिक रास्तों से नए शुल्क लगाए जाते हैं, तो यह दर फिर से बढ़कर लगभग 14 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

अमेरिकी प्रशासन ने कोर्ट के फैसले को दरकिनार किया तो

रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी प्रशासन कोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए नए टैरिफ उपाय लागू करता है, तो उभरते बाजारों को मिलने वाला लाभ काफी हद तक कम हो सकता है। साथ ही, निकट भविष्य में अमेरिका में नीतिगत अनिश्चितता बढ़ने की आशंका जताई गई है, जिसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों और व्यापार प्रवाह पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विकास दर और बढ़ते कर्ज को लेकर अनिश्चितता से सुरक्षित निवेश साधनों जैसे सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं, कमजोर आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर पर दबाव बन सकता है, जिससे भारतीय रुपये समेत उभरते बाजारों की मुद्राओं को सहारा मिल सकता है। कुल मिलाकर, यह फैसला वैश्विक व्यापार में स्थिरता लाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को समर्थन देने वाला माना जा रहा है, हालांकि अंतिम प्रभाव आगे अमेरिकी नीति कदमों पर निर्भर करेगा।

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