AI Impact Summit 2026: दिल्ली में दिखा भविष्य का भारत, समझदार कार से लेकर कृष्ण के एआई अवतार तक; देखें झलक
India AI Impact Summit 2026 ने यह साबित कर दिया है कि भारत एआई को एक 'टूल' से बदलकर 'साथी' बना रहा है। चाहे वह ड्राइवर की जान बचाना हो, क्रिकेट सिखाना हो, या खतरनाक मशीनों की निगरानी करना हो- एआई अब अदृश्य एल्गोरिदम से निकलकर ठोस वास्तविकता बन चुका है।
विस्तार
राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक्सपो सेंटर में भारत के तकनीकी भविष्य का खाका खींचा गया है। 'पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस' के तीन मूल मंत्रों पर आधारित इस समिट में यह साफ हो गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल कोडिंग या क्लाउड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह फिजिकल एआई के रूप में सड़कों, खेल के मैदानों और यहां तक कि अध्यात्म में भी उतर आया है।
अमर उजाला की टीम ने जब एक्सपो की पड़ताल की तो यह साफ हो गया कि एआई अब महज हाइप से आगे बढ़कर एप्लीकेशन और सोल्यूशन के दौर में प्रवेश कर चुका है।
मोबिलिटी के भविष्य के रूप में सामने आई टाटा की समझदार कार
ऑटोमोबाइल सेक्टर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और टाटा ग्रुप ने ऑटोनॉमस ड्राइविंग का एक ऐसा प्रोटोटाइप पेश किया है जो सुरक्षा के मानकों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। यह केवल एक सेल्फ-ड्राइविंग कार नहीं है, बल्कि एक 'इंटेलीजेंट को-पायलट' यानी एक समझदार कार का नमूना है।
प्रदर्शनी में दिखाए गए डेमो के अनुसार, यह कार 'V2X' वीकल टू एवरीथिंग तकनीक से लैस है। उदाहरण के लिए, घने कोहरे में जब दृश्यता शून्य होती है, तो इसके रेडार और सेंसर मिली-सेकंड में निर्णय लेकर ब्रेक लगा सकते हैं। सबसे खास इसका 'ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम' है, जो चालक के चेहरे पर 200 से अधिक पॉइंट्स को स्कैन करता है। यदि ड्राइवर को 'माइक्रो स्लीप' या झपकी आती है, या कोई मेडिकल इमरजेंसी होती है, तो कार खुद को सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लेन में पार्क कर देगी। इसके अलावा, यह एंबुलेंस को पहचानकर उसे रास्ता देने और पीछे चल रही गाड़ियों को अलर्ट भेजने में भी सक्षम है।
गूगल बनेगा आपका पर्सनल क्रिकेट कोच
खेल और लाइफस्टाइल में एआई का दखल गूगल के एआई क्रिकेट कोच के जरिए देखने को मिला। अब क्रिकेट सीखने के लिए आपको महंगे कोच के पास शारीरिक रूप से उपस्थित होने की बाध्यता नहीं रहेगी। इस तकनीक में खिलाड़ी की ओर से खेले गए शॉट का वीडियो रिकॉर्ड किया जाता है और एआई उसका विश्लेषण करता है। यह सिस्टम ठीक एक पेशेवर कोच की तरह बताता है कि शॉट खेलते समय आपके सिर की स्थिति सही थी या नहीं, आपका संतुलन कैसा था, और कलाई का उपयोग कैसे किया गया। यह डेटा-आधारित कोचिंग जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को निखारने में 'गेम-चेंजर' साबित हो सकती है।
इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स के लिए 'क्वाड्रापैड' और स्मार्ट आर्म्स
एक्सपो में 'फिजिकल एआई' का सबसे बेहतरीन उदाहरण 'रोबो-डॉग' या 'क्वाड्रापैड' है। टाटा समूह द्वारा प्रदर्शित यह रोबोट केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि गंभीर औद्योगिक कार्यों के लिए है। यह खतरनाक वातावरण, जैसे कि संकरी जगहों या ऐसी फैक्ट्रियों में जहां इंसानों का जाना जोखिम भरा है, वहां पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग कर सकता है। इसमें लगे इंफ्रारेड सेंसर और 'कॉग्निटिव ब्रेन' इसे सीढ़ियां चढ़ने, दोष पहचानने और नमस्ते जैसे जेस्चर करने में सक्षम बनाते हैं। इसके साथ ही, वेयरहाउस ऑटोमेशन में ऐसे स्मार्ट रोबोट दिखाए गए जो अब केवल कन्वेयर बेल्ट पर निर्भर नहीं हैं। वे कहीं भी रखी वस्तु को पहचानने, उसके आकार और तापमान को सेंस करने और उसे सुरक्षित रूप से उठाने में सक्षम हैं।
भगवान कृष्ण का एआई अवतार भी
भारत में तकनीक और परंपरा का संगम हमेशा दिलचस्प रहा है। समिट में एआई और होलोग्राम तकनीक का उपयोग करके महाभारत के पात्रों, विशेष रूप से भगवान कृष्ण को जीवंत किया गया है। यह सिस्टम केवल पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश नहीं सुनाता, बल्कि एआई का उपयोग करके उपयोगकर्ताओं के सवालों- जैसे धर्म क्या है?- का संदर्भ के अनुसार जवाब देता है। वॉइस मॉड्यूलेशन और 3D विजुअल्स इसे एक अनूठा अनुभव बनाते हैं, जो धार्मिक पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलता है।