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India vs China at WTO: भारत ने चीन को दिया झटका; ऑटो और EV स्कीम के खिलाफ जांच पैनल बनाने से रोका

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 27 Jan 2026 09:24 PM IST
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सार

भारत ने डब्ल्यूटीओ में ऑटो और ईवी पीएलआई स्कीम के खिलाफ चीन की पैनल बनाने की मांग को ठुकराया। जानें क्या है विवाद और भारत-चीन व्यापार घाटे के ताजा आंकड़े। 

India China WTO Dispute PLI Scheme Auto Electric Vehicle Policy Trade Deficit India China
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
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विस्तार
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जेनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन में भारत ने चीन के एक बड़े कूटनीतिक दांव को रोक दिया है। मंगलवार को भारत ने अपनी ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोत्साहन योजनाओं के खिलाफ 'विवाद निपटान पैनल' गठित करने की चीन की मांग को आधिकारिक तौर पर 'ब्लॉक' कर दिया। एक अधिकारी ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की।
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चीन का आरोप है कि भारत की ये नीतियां चीनी सामानों के साथ भेदभाव करती हैं, जबकि भारत अपने 'मेक इन इंडिया' और पीएलआई (PLI) स्कीम्स के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर अडिग है।
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क्या है पूरा विवाद?
यह मामला भारत की महत्वाकांक्षी 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' योजनाओं से जुड़ा है।
• चीन का आरोप: पिछले साल अक्टूबर में बीजिंग ने आरोप लगाया था कि एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली भारत की नीतियां वैश्विक व्यापार नियमों का उल्लंघन करती हैं। चीन का दावा है कि ये शर्तें चीनी उत्पादों के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं।

• बातचीत हुई विफल: चीन ने WTO को बताया कि इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच 25 नवंबर, 2025 और 6 जनवरी, 2026 को द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। चीन के मुताबिक, दुर्भाग्य से ये बैठकें बेनतीजा रहीं और कोई समाधान नहीं निकल पाया, जिसके बाद उसने पैनल गठित करने की मांग की थी।

आगे क्या होगा? 
नियमों के अनुसार, भारत द्वारा पैनल को ब्लॉक करना प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन यह अंत नहीं है।
• चीन का अगला कदम: चीन अगली बैठक में फिर से पैनल बनाने का अनुरोध कर सकता है।
• प्रक्रिया: डब्ल्यूटीओ के नियमों के तहत, विवाद समाधान का पहला चरण 'परामर्श' (Consultation) होता है। यदि इसमें हल नहीं निकलता, तो शिकायतकर्ता देश मामले पर फैसला सुनाने के लिए पैनल बनाने की मांग करता है। भारत ने फिलहाल इसी मांग को रोका है।

व्यापार घाटे की चिंताजनक तस्वीर
यह कानूनी लड़ाई ऐसे समय में चल रही है जब दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। चीन अभी भी भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

ताजा आंकड़ों (2024-25) के अनुसार:
• व्यापार घाटा:
भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर 99.2 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
• आयात बढ़ा: चीन से भारत का आयात 11.52% बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया है।
• निर्यात गिरा: दूसरी ओर, चीन को होने वाला भारतीय निर्यात 14.5% घटकर महज 14.25 अरब डॉलर रह गया है।
भारत की ओर से डब्ल्यूटीओ में चीन की मांग को ब्लॉक करना दिखाता है कि सरकार अपनी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने वाली नीतियों  का मजबूती से बचाव करने के लिए तैयार है। हालांकि, चीन द्वारा दोबारा अनुरोध किए जाने की संभावना को देखते हुए आने वाले दिनों में यह व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है।

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