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RBI : बैंकिंग सिस्टम में जान फूंकने के लिए ₹1 लाख करोड़ का मेगा प्लान; जानें क्या है ओएमओ और करेंसी स्वैप
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 27 Jan 2026 09:15 PM IST
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सार
आरबीआई ने लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ₹1 लाख करोड़ के ओएमओ और $10 अरब के करेंसी स्वैप का एलान किया। जानें 29 जनवरी और 5 फरवरी को होने वाली नीलामी और इसका बैंकिंग सिस्टम पर असर।
भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में नकदी के प्रवाह को बढ़ाने के लिए मंगलवार को दो बड़े और अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय बैंक ने एलान किया है कि वह ओपन मार्केट ऑपरेशंस के जरिए 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी सिक्योरिटीज खरीदेगा और साथ ही 5 अरब डॉलर नहीं, बल्कि पूरे 10 अरब डॉलर की करेंसी स्वैप नीलामी आयोजित करेगा। इस कदम का सीधा मकसद बाजार में पैसों की तंगी को दूर करना और वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करना है।
क्या है आरबीआई का एक लाख करोड़ का ओएमओ प्लान?
RBI ने अपने बयान में बताया है कि वह कुल 1,00,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। यह प्रक्रिया एक बार में नहीं, बल्कि दो चरणों में पूरी की जाएगी:
10 अरब का 'डॉलर-रुपया स्वैप' क्या, आसान भाषा में समझें
लिक्विडिटी बढ़ाने के दूसरे बड़े कदम के तहत, आरबीआई 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर (लगभग 83,000 करोड़ रुपये से अधिक) की 'बॉय/सेल' करेंसी स्वैप नीलामी करेगा। इस स्वैप की अवधि तीन साल की होगी। यह कैसे काम करेगा? आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह एक साधारण 'खरीद/बिक्री' विदेशी मुद्रा स्वैप होगा।
इन दोनों कदमों ओएमओके जरिए बॉन्ड खरीद और डॉलर स्वैप- का मिला-जुला असर यह होगा कि बैंकिंग सिस्टम में भारी मात्रा में रुपया (कैश) आएगा। जब बैंकों के पास ज्यादा पैसा होगा, तो वे आसानी से लोन बांट सकेंगे और ब्याज दरों पर दबाव कम होगा। यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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क्या है आरबीआई का एक लाख करोड़ का ओएमओ प्लान?
RBI ने अपने बयान में बताया है कि वह कुल 1,00,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। यह प्रक्रिया एक बार में नहीं, बल्कि दो चरणों में पूरी की जाएगी:
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- पहला चरण: 50,000 करोड़ रुपये की नीलामी 29 जनवरी को होगी।
- दूसरा चरण: बाकी बचे 50,000 करोड़ रुपये की नीलामी 5 फरवरी को की जाएगी।
10 अरब का 'डॉलर-रुपया स्वैप' क्या, आसान भाषा में समझें
लिक्विडिटी बढ़ाने के दूसरे बड़े कदम के तहत, आरबीआई 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर (लगभग 83,000 करोड़ रुपये से अधिक) की 'बॉय/सेल' करेंसी स्वैप नीलामी करेगा। इस स्वैप की अवधि तीन साल की होगी। यह कैसे काम करेगा? आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह एक साधारण 'खरीद/बिक्री' विदेशी मुद्रा स्वैप होगा।
- इस प्रक्रिया में, बैंक अपने पास मौजूद अमेरिकी डॉलर आरबीआई को बेचेंगे।
- इसके बदले में आरबीआई उन्हें भारतीय रुपये देगा (जिससे बाजार में रुपये की लिक्विडिटी बढ़ेगी)।
- इसके साथ ही, बैंक एक समझौता करेंगे कि वे स्वैप की अवधि (3 साल) खत्म होने पर उतनी ही राशि के डॉलर आरबीआई से वापस खरीद लेंगे।
इन दोनों कदमों ओएमओके जरिए बॉन्ड खरीद और डॉलर स्वैप- का मिला-जुला असर यह होगा कि बैंकिंग सिस्टम में भारी मात्रा में रुपया (कैश) आएगा। जब बैंकों के पास ज्यादा पैसा होगा, तो वे आसानी से लोन बांट सकेंगे और ब्याज दरों पर दबाव कम होगा। यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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