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Budget 2026: भारत की अर्थव्यवस्था में लचीलापन बनाए रखने के लिए दीर्घकालिक सोच की जरूरत, जानिए क्या बोले राजन

Wed, 28 Jan 2026 12:39 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 28 Jan 2026 12:39 PM IST
सार

पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट को दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को बनाने पर जोर दिया। साथ ही मौजूदा वैश्विक हालात को बेहद खतरनाक बताया। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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Long-term vision is essential in the budget; find out what the former RBI governor said about the economy
बजट 2026 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार को अल्पकालिक राहत के बजाय दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक लचीला और संकटों के प्रति मजबूत बनाया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत समेत पूरी दुनिया के लिए बेहद खतरनाक समय हैं।

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बजट सिर्फ सालान योजनाओं तक नहीं होनी चाहिए

राजन ने कहा कि पहले भारत में पंचवर्षीय योजनाएं हुआ करती थीं, लेकिन तब भी बजट को उनसे प्रभावी ढंग से नहीं जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि 2026-27 का बजट सिर्फ सालाना योजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह दिखाना चाहिए कि भारत किस तरह अधिक लचीला, स्वतंत्र और तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन सकता है।

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राजन ने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में ऐसे सुधारों की दिशा तय करेंगी, जो भारत को वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच मजबूती देंगे। उन्होंने कुछ जरूरी सुझाव दिए

  • एआई में भारी निवेश जैसे अवसर मौजूद हैं, लेकिन कुछ चुनिंदा वैश्विक शक्तियों पर अत्यधिक निर्भरता भारत को कमजोर भी बना सकती है।
  • भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर तरीके से जुड़ने के लिए कुछ टैरिफ दरों में कटौती करनी पड़ सकती है और राज्यों को निवेश के अनुकूल नीतियां बनाने की दिशा में और कदम उठाने होंगे।
  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन उसे अपने पड़ोसी देशों बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल सहित ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंध मजबूत करने होंगे।

 

अमेरिका के साथ जारी व्यापारिक तनाव पर क्या बोले?

अमेरिका के साथ व्यापार तनाव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अगर तनाव और बढ़ता है, तो भारत को बाहरी शोर से कुछ समय के लिए दूरी बनाकर अपनी घरेलू आर्थिक सुधार प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि 1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में हुए बड़े सुधारों के बाद अब एक नए सुधार दौर की जरूरत है, ताकि भारत की विकास दर में 2 प्रतिशत तक की अतिरिक्त वृद्धि की जा सके।

अनिश्चितता के दौर में भारत के पास क्या अवसर?

राजन ने कहा कि अमेरिका और अन्य महाशक्तियों की नीतिगत अनिश्चितता भारत के लिए एक अवसर भी है, जिससे वह वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है। उन्होंने यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, पश्चिम एशिया और पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने पर जोर दिया।

अस्थायी और असंतुलित विकास से बचने की जरूरत

उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अस्थायी और असंतुलित विकास से बचना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि हर शहर में मेट्रो परियोजनाओं और कुछ बुनियादी ढांचा निवेशों की उपयोगिता पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है, क्योंकि ऐसी परियोजनाएं लंबे समय में आर्थिक बोझ बन सकती हैं।



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