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Global Share Market: वैश्विक शेयर बाजारों में दिखा भारत का दबदबा, चीन पिछड़ा; विदेशी निवेशकों का मिला समर्थन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, मुंबई/न्यूयॉर्क/शंघाई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 09 Jan 2026 04:30 AM IST
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सार

India Stock Market Performance: 2025 में वैश्विक उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय शेयर बाजार रिटर्न और स्थिरता दोनों में आगे रहे। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश और विदेशी पूंजी ने समर्थन दिया। अमेरिका की तेजी चुनिंदा सेक्टरों तक सीमित रही, जबकि चीन रियल एस्टेट संकट और कमजोर भरोसे से पिछड़ा।

India outperforms global stock markets US gains ground China lags behind investor confidence support
स्टॉक मार्केट। - फोटो : STOCK MARKET
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विस्तार
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वैश्विक शेयर बाजारों के लिए पिछला वर्ष उतार-चढ़ाव भरा रहा। अमेरिका में मौद्रिक नीति, भारत में तेज आर्थिक वृद्धि, यूरोप में सुस्ती और चीन में संरचनात्मक संकट ने प्रमुख शेयर बाजारों की दिशा तय की। अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसियों एसएंडपी ग्लोबल, मूडीज और फिच रेटिंग्स के आकलनों के आधार पर 2025 में भारतीय बाजार रिटर्न और स्थिरता के मामले में अग्रणी रहा। चीन का बाजार सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।
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एजेंसियों के अनुसार, भारत की मजबूती का मुख्य कारण मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे में सरकारी निवेश, बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और वैश्विक पूंजी का लगातार निवेश रहा। एसएंडपी ग्लोबल ने रिपोर्ट में कहा, भारत सबसे भरोसेमंद उभरता हुआ इक्विटी बाजार बना रहा। आईटी, बैंकिंग, रक्षा और कैपिटल गुड्स सेक्टर ने बाजार को सहारा दिया।
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भारत क्यों रहा मजबूत?
भारत की बढ़त का निर्णायक कारण यह रहा कि बाजार की दिशा घरेलू खपत और निवेश चक्र से तय हुई न कि वैश्विक पूंजी के मूड से। सार्वजनिक पूंजीगत खर्च और निजी निवेश के एक साथ सक्रिय रहने से आय और रोजगार का चक्र बना। इसने बाजार को मजबूती दी। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज और नैस्डैक ने सकारात्मक रिटर्न दिया। खासकर वर्ष के दूसरे हिस्से में। नैस्डैक को एआई, सेमीकंडक्टर और दिग्गज टेक कंपनियों से सहारा मिला। मूडीज के अनुसार, ऊंची ब्याज दरों और उपभोक्ता खर्च में नरमी से अमेरिकी बाजार की बढ़त सेक्टर-विशिष्ट रही।

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कौन निकला आगे, कौन पीछे और क्यों
अमेरिकी बाजार बढ़ा, लेकिन व्यापक नहीं हो सका: अमेरिका में तेजी मार्केट-वाइड नहीं, थीम-ड्रिवन रही। हाई-वैल्यू टेक कंपनियों ने इंडेक्स को ऊपर रखा। अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से ऊंची वित्तीय लागत के अनुकूलन में लगे रहे। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज ने मध्यम लेकिन स्थिर बढ़त दर्ज की। येन की कमजोरी से निर्यात आधारित कंपनियों को फायदा मिला। इससे ऑटो व इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर मजबूत बने रहे। लंदन स्टॉक एक्सचेंज (एलएसई) का प्रदर्शन औसत। यूरोप में कमजोर औद्योगिक उत्पादन, और ब्रेग्जिट की संरचनात्मक चुनौतियों ने बाजार की रफ्तार सीमित रखी। शंघाई स्टॉक एक्सचेंज का प्रदर्शन वैश्विक बाजारों में कमजोर रहा। चीन के रियल एस्टेट संकट, उपभोक्ता विश्वास में गिरावट और विदेशी निवेशकों की सतर्कता सेे बाजार पर दबाव रहा।

आर्थिक बुनियाद और स्थिरता असली ताकत
2025 ने यह साफ कर दिया कि केवल वैश्विक आकार नहीं, बल्कि आर्थिक बुनियाद और नीति स्थिरता शेयर बाजार की असली ताकत होती है। भारत ने इस वर्ष दिखाया कि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ उभरता बाजार भी विकसित देशों को पीछे छोड़ सकता है, जबकि चीन का उदाहरण बताता है कि बड़े पैमाने के बावजूद संरचनात्मक संकट बाजार को लंबे समय तक दबाव में रख सकते है।

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