Forex Reserves: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि, 675 अरब डॉलर के पार पहुंचा आंकड़ा
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर बढ़कर 675.157 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। जानें इसके मुख्य कारण और घटक।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 10 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर बढ़ गया है। यह बढ़कर कुल 675.157 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब देश के भंडार में वृद्धि दर्ज की गई है।
इससे पिछले सप्ताह में भी कुल भंडार में 7.26 अरब अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी। तब यह 674.193 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया था। इस वर्ष 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब अमेरिकी डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर था। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया था। इसके चलते आरबीआई को विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा था। केंद्रीय बैंक ने डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर किया था। इस वजह से कई हफ्तों तक भंडार में गिरावट देखी गई थी। अब इसमें फिर से तेजी आ रही है।
विदेशी मुद्रा भंडार में क्या-क्या शामिल है?
10 जुलाई को समाप्त सप्ताह के लिए, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां भंडार का एक प्रमुख घटक हैं। इनमें 93 करोड़ अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़कर 546.508 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई हैं। केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, डॉलर के संदर्भ में व्यक्त विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गैर-अमेरिकी इकाइयों का मूल्य शामिल होता है। इनमें यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राएं शामिल हैं। इनके मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी इन परिसंपत्तियों पर पड़ता है।
अन्य घटकों की स्थिति क्या है?
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 2.4 करोड़ डॉलर बढ़ गया। यह बढ़कर 105.223 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में भी 30 लाख अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई है। यह 18.626 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भारत की आरक्षित स्थिति भी 70 लाख अमेरिकी डॉलर बढ़ी है। यह रिपोर्टिंग सप्ताह के अंत में 4.793 अरब अमेरिकी डॉलर हो गई है।