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Inflation: गेहूं एक महीने में 8 फीसदी महंगा, बढ़ सकती हैं खाद्य तेल की कीमतें; क्यों बिगड़ रहा रसोई का बजट?

Fri, 17 Jul 2026 03:27 AM IST
Devesh Tripathi बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बोनस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Fri, 17 Jul 2026 03:27 AM IST
सार

त्योहारी सीजन से पहले गेहूं और खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर रूस-यूक्रेन क्षेत्र में आपूर्ति संबंधी चुनौतियों और घरेलू बाजार में उत्पादन तथा स्टॉक को लेकर चिंताओं के कारण गेहूं के दाम ऊपर गए हैं। वहीं, सोयाबीन की बुआई, पाम तेल की सीमित उपलब्धता, बढ़ती आयात लागत और त्योहारी मांग के चलते खाद्य तेल भी महंगे बने रहने की संभावना है।

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गेहूं की कीमत बढ़ीं - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई का बजट फिर बिगड़ सकता है। घरेलू बाजार में पिछले एक माह में गेहूं की कीमतें 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। खाद्य तेलों की कीमतों में भी तेजी आने की पूरी आशंका है।
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काले सागर में आपूर्ति के बढ़ते जोखिमों के कारण शिकागो गेहूं वायदा पिछले सत्र में 5 फीसदी उछलने के बाद दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। यूक्रेन के बंदरगाह पर हुए हमलों से गेहूं निर्यात प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य में प्रतिबंध से रूस का गेहूं निर्यात भी मुश्किल में आ गया है। इन व्यवधानों ने वैश्विक गेहूं बाजारों में एक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है।
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गेहूं की वैश्विक कीमतों में आए इस उछाल का असर भारतीय बाजार पर भी हुआ है। इस दौरान इंदौर मंडी में गेहूं के दाम सबसे अधिक 8.44 फीसदी तक बढ़े हैं। दिल्ली, कानपुर और कोटा जैसी प्रमुख मंडियों में कीमतें औसतन 3.5-4 फीसदी के बीच बढ़ी हैं।
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गेहूं उत्पादन हो सकता है प्रभावित
गेहूं उत्पादन का परिदृश्य प्रतिकूल मौसम की स्थिति के प्रति संवेदनशील बना हुआ है, क्योंकि बढ़ता तापमान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि पैदावार एवं अनाज की गुणवत्ता के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। मौसम में हालिया व्यवधानों के कारण व्यापारियों ने अगले रबी सीजन के उत्पादन पूर्वानुमान को 11.35 करोड़ टन से घटाकर 11.40 करोड़ टन कर दिया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में अधिक उत्पादन के बावजूद शुरुआती उम्मीदों से कम है।

खाद्य तेलों में तेजी के चार कारण
  • इस साल सोयाबीन की खेती 6 फीसदी तक कम रहने की आशंका है। 15 दिनों में बारिश में सुधार नहीं हुआ, तो प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 5 से 7 फीसदी घट सकता है। 
  • वैश्विक बाजारों में पाम तेल की उपलब्धता में कमी और घरेलू बाजार में सरसों व सोयाबीन के पर्याप्त स्टॉक के चलते भारत ने आयात कम किया है, जिससे आने वाले समय में घरेलू स्टॉक पर दबाव बढ़ेगा।
  • एफएमसीजी कंपनियों और स्टॉकिस्टों की मांग थोड़ी सुस्त जरूर है। लेकिन, अगस्त के पहले पखवाड़े से बाजार में रिकवरी आएगी और दिवाली तक त्योहारी मांग चरम पर होगी। यह मांग कीमतों को और ऊपर धकेलेगी।
  • वैश्विक स्तर पर बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ने से सोया तेल और सूरजमुखी तेल महंगा हुआ है। रुपये की कमजोरी ने रिफाइनर्स के लिए आयात लागत बढ़ा दिया है।
कितने बढ़ सकते हैं खाद्य तेल के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कीमतों में अचानक कोई बड़ा विस्फोट भले न हो, लेकिन आने वाले दिनों में कीमतों में तेजी बनी रहेगी। सूरजमुखी तेल 1,580 से 1,600 प्रति क्विंटल के स्तर पर बनी रहेगी। यानी इसके दाम 160 रुपये प्रति लीटर से ऊपर बने रहने के आसार है। सोयाबीन तेल का दाम 1,420 रुपये के मजबूत स्तर पर बरकरार रहने की उम्मीद है, जिससे इसमें मंदी की गुंजाइश खत्म हो गई है। पाम तेल काफी अच्छे डिस्काउंट पर आ चुका है, इसलिए 1,340 से 1,350 के स्तर पर इसमें तगड़ी खरीदारी लौटती दिख रही है।

एक माह में ऐसे बढ़े गेहूं के भाव
मंडी 17 जून 16 जुलाई बढ़ोतरी
दिल्ली 2,688 2,785 97
कानपुर 2,500 2,602 102
कोटा 2,575 2,670 95
इंदौर 2,476 2,685 209
राजकोट 2,575 2,600 25
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