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डिफॉल्टर बैंकों से वापस नहीं खरीद सकेंगे अपनी जब्त संपत्ति: 1 अक्तूबर से लागू होगा नया नियम, RBI का बड़ा फैसला

Fri, 17 Jul 2026 03:18 AM IST
Devesh Tripathi बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Fri, 17 Jul 2026 03:18 AM IST
सार

भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण वसूली प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके तहत बैंक की कब्जे में आई अचल संपत्तियों को मूल डिफॉल्टर या उससे जुड़े किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोबारा बेचने की अनुमति नहीं होगी। नए नियम 1 अक्तूबर 2026 से लागू होंगे और सभी संबंधित बैंक तथा वित्तीय संस्थानों पर समान रूप से लागू रहेंगे।

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आरबीआई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों की वसूली प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि वसूली के दौरान किसी असाधारण परिस्थिति में बैंक के स्वामित्व में आई अचल संपत्ति को मूल उधारकर्ता (डिफॉल्टर) या उससे जुड़े किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोबारा नहीं बेचा जा सकेगा। यह नया नियम 1 अक्तूबर 2026 से लागू होगा। इस व्यवस्था के बाद ऐसे डिफॉल्टर अपनी जब्त की गई संपत्ति को बैंक से वापस नहीं खरीद पाएंगे।
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किन परिस्थितियों में बैंक के पास आती है संपत्ति?
आरबीआई ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि सामान्य परिस्थितियों में बैंकों का काम गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों का मालिक बनना नहीं है। बैंक मुख्य रूप से ऋण देने और वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए होते हैं। हालांकि, जब कोई उधारकर्ता लंबे समय तक ऋण नहीं चुकाता और उसका खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) में बदल जाता है, तब बैंक कानूनी या अनुबंध संबंधी अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए गिरवी रखी गई अचल संपत्ति अपने कब्जे में ले सकते हैं। यह कदम बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया का हिस्सा होता है।
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नया नियम क्यों लाया गया है?
आरबीआई का कहना है कि जब्त की गई गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट और एक समान व्यवस्था जरूरी थी। इसी उद्देश्य से नए मानदंड तैयार किए गए हैं। इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वसूली प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी भी तरह के हितों के टकराव या पक्षपात की संभावना न रहे। साथ ही, यह व्यवस्था बैंकों को ऐसी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी उपलब्ध कराएगी।
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जब्त संपत्ति का निपटान कैसे होगा?
केंद्रीय बैंक ने निर्देश दिया है कि बैंक जब्त की गई अचल संपत्तियों को अपने पास लंबे समय तक रखने के बजाय जल्द से जल्द सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से बेचने का प्रयास करें। सार्वजनिक नीलामी से बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और संपत्ति का उचित बाजार मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। इससे बैंकों को फंसे हुए कर्ज की वसूली में मदद मिलेगी और गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों को लंबे समय तक अपने पास रखने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।


नियम लागू होने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई गई?
आरबीआई ने बताया कि इन नियमों का मसौदा इसी वर्ष मई में जारी किया गया था। इसके बाद बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नया नियम 1 अक्तूबर से प्रभावी होगा और इसके बाद सभी संबंधित बैंक एवं वित्तीय संस्थानों को इन्हीं प्रावधानों के अनुसार जब्त संपत्तियों का निपटान करना होगा।
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